भरत तिवारी मामला गरमाया, जन सुराज ने मुख्य सचिव से की मुलाकात; फर्जी एनकाउंटर बताकर न्यायिक जांच की मांग

भरत तिवारी मौत मामले को लेकर बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। ने इस मामले को फर्जी एनकाउंटर बताते हुए सरकार और प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। गुरुवार को पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने बिहार के मुख्य सचिव से मुलाकात कर पूरे मामले में न्यायिक जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने सात सूत्री मांग पत्र भी सौंपा और कहा कि भरत तिवारी की मौत को एनकाउंटर बताना सच्चाई से आंखें मूंदने जैसा है।

पटना में हुई इस मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए मनोज भारती ने कहा कि भरत तिवारी की मौत के बाद से जन सुराज लगातार पीड़ित परिवार के साथ खड़ा है और न्याय दिलाने की लड़ाई लड़ रहा है। उन्होंने कहा कि पार्टी के नेता और कार्यकर्ता घटनास्थल पर जाकर पूरी स्थिति का आकलन कर चुके हैं और वहां जो तथ्य सामने आए, वे बेहद गंभीर हैं। उनके अनुसार यह कोई सामान्य पुलिस कार्रवाई नहीं बल्कि योजनाबद्ध हत्या का मामला प्रतीत होता है।

मनोज भारती ने कहा कि मुख्य सचिव के साथ हुई बातचीत में उन्होंने घटना की विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि पार्टी द्वारा जुटाई गई जानकारी और मौके पर देखे गए तथ्यों के आधार पर साफ तौर पर कहा जा सकता है कि यह एनकाउंटर नहीं बल्कि हत्या का मामला है। उन्होंने आरोप लगाया कि भरत तिवारी ऐसे व्यक्ति थे जो वर्षों से सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहे और समाज के लिए काम करते रहे। उनके योगदान को लेकर प्रशासन ने भी कई अवसरों पर उन्हें सम्मानित किया था।

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कोई व्यक्ति समाज सेवा में सक्रिय रहा है और प्रशासन से सम्मान प्राप्त कर चुका है, तो उसकी इस तरह मौत होना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। मनोज भारती ने कहा कि इस मामले में शामिल सभी दोषियों को कानून के दायरे में लाकर कठोर से कठोर सजा दी जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच नहीं होती, तो लोगों का कानून व्यवस्था और प्रशासन पर विश्वास कमजोर हो सकता है।

इस मामले पर पूर्व विधायक ने भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य सचिव से आग्रह किया है कि जांच की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए सबसे पहले स्पष्ट टर्म ऑफ रेफरेंस जारी किया जाए। उनका कहना था कि जांच की दिशा और दायरा स्पष्ट होना बेहद जरूरी है ताकि कोई महत्वपूर्ण तथ्य छूट न जाए।

किशोर कुमार ने विशेष रूप से स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की भूमिका पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि एसटीएफ का उपयोग आमतौर पर संगठित अपराध, नक्सल गतिविधियों या अत्यंत खतरनाक अपराधियों के खिलाफ किया जाता है। ऐसे में भरत तिवारी के मामले में एसटीएफ की तैनाती कई सवाल पैदा करती है। उन्होंने पूछा कि यदि भरत तिवारी न तो दुर्दांत अपराधी थे और न ही नक्सली, तो उनके खिलाफ एसटीएफ का उपयोग किस आधार पर किया गया।

उन्होंने कहा कि इस मामले में गृह विभाग की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। उनका कहना था कि यह जानना जरूरी है कि एसटीएफ को किस आदेश और किन परिस्थितियों में भेजा गया। साथ ही उन्होंने फर्जी मुठभेड़ों पर रोक लगाने और इस तरह के मामलों के लिए स्पष्ट जवाबदेही तय करने की मांग की।

जन सुराज द्वारा मुख्य सचिव को सौंपे गए मांग पत्र में कई महत्वपूर्ण मांगें शामिल हैं। पार्टी की पहली मांग यह है कि सरकार इस घटना को एनकाउंटर बताना बंद करे और सार्वजनिक रूप से स्वीकार करे कि यह प्रशासनिक कार्रवाई के नाम पर हुई हत्या थी। पार्टी का कहना है कि जब तक घटना की प्रकृति को सही तरीके से स्वीकार नहीं किया जाएगा, तब तक न्याय की दिशा में आगे बढ़ना मुश्किल होगा।

दूसरी मांग में भोजपुर के एसपी, डीएसपी समेत उन सभी अधिकारियों को तत्काल निलंबित करने की मांग की गई है, जिनकी भूमिका घटना में सामने आ रही है। जन सुराज का कहना है कि निष्पक्ष जांच तभी संभव है जब संबंधित अधिकारियों को जांच पूरी होने तक पद से अलग रखा जाए।

तीसरी प्रमुख मांग यह है कि पूरे मामले की न्यायिक जांच उच्च न्यायालय के किसी वर्तमान न्यायाधीश की अध्यक्षता में कराई जाए। पार्टी का मानना है कि केवल उच्च स्तर की स्वतंत्र न्यायिक जांच ही मामले की सच्चाई सामने ला सकती है। चौथी मांग में कहा गया है कि जांच आयोग के कार्यक्षेत्र में गृह मंत्रालय और एसटीएफ की भूमिका को भी शामिल किया जाए।

पार्टी की पांचवीं मांग के अनुसार भरत तिवारी के परिवार के बयान के आधार पर आपराधिक मामला दर्ज किया जाए, ताकि जांच केवल प्रशासनिक दस्तावेजों तक सीमित न रहे बल्कि पीड़ित पक्ष की बात को भी समान महत्व मिले। वहीं छठी मांग में परिवार को मुआवजे के तौर पर एक करोड़ रुपये और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग रखी गई है।

जन सुराज का कहना है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति की मौत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बिहार में कानून व्यवस्था, पुलिस कार्रवाई और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा बड़ा प्रश्न बन चुका है। पार्टी नेताओं ने कहा कि यदि समय रहते निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो जनता के बीच असंतोष और बढ़ सकता है।

प्रतिनिधिमंडल में पूर्व विधान पार्षद रामबली चंद्रवंशी, सुभाष कुशवाहा, नरेंद्र प्रसाद मंडल, पद्मा ओझा और जीतेंद्र ओझा सहित कई नेता शामिल रहे। सभी ने एक स्वर में मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जाए।

भरत तिवारी मामले को लेकर बढ़ता राजनीतिक दबाव यह संकेत देता है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा बिहार की राजनीति में और बड़ा रूप ले सकता है। अब सभी की नजर सरकार और प्रशासन के अगले कदम पर टिकी है कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और पीड़ित परिवार को न्याय कब तक मिल पाता है।

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