भागलपुर में फर्जी शपथ पत्र कांड का खुलासा, 90 दिन की तकनीकी जांच के बाद गिरोह बेनकाब

भागलपुर जिले में चर्चित फर्जी शपथ पत्र और नामांतरण से जुड़े मामले में पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। करीब तीन महीने तक चली गहन और तकनीकी जांच के बाद जगदीशपुर थाना पुलिस ने इस संगठित फर्जीवाड़े के नेटवर्क का पर्दाफाश कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद पूरे मामले में शामिल गिरोह की परतें धीरे-धीरे सामने आने लगी हैं।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, वरीय अधिकारियों के निर्देश पर इस केस की जांच विशेष रूप से तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर की जा रही थी। जांच का नेतृत्व कर रहे एसआई विकास कुमार की टीम ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), सर्वर डेटा और अन्य डिजिटल माध्यमों की मदद से अहम सुराग जुटाए। इन साक्ष्यों के आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुंचने में सफल रही।

इसी क्रम में बुधवार शाम तातारपुर थाना क्षेत्र में छापेमारी कर स्वर्गीय मोहम्मद इस्लाम के पुत्र मो. सैफुल इस्लाम उर्फ बिक्की को एक प्रिंटिंग दुकान से गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर जगदीशपुर थाना में गहन पूछताछ की, जिसके बाद मेडिकल जांच कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया। हालांकि, बाद में कोर्ट से उसे बंधपत्र (बॉन्ड) पर रिहाई मिल गई।

यह मामला उस समय चर्चा में आया था, जब बिहार के डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा ने टाउन हॉल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान फर्जी नामांतरण और शपथ पत्र के मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बाद रेंज आईजी और एसएसपी स्तर से इस मामले की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही थी, जबकि जांच की जिम्मेदारी सिटी एसपी को सौंपी गई थी।

गौरतलब है कि इस मामले की शुरुआत 4 जनवरी को हुई थी, जब सदर एसडीओ के आदेश पर जगदीशपुर अंचल अधिकारी (सीओ) सतीश कुमार ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। शुरुआती जांच में ही बड़े पैमाने पर दस्तावेजों की फर्जीवाड़े की आशंका सामने आई थी, जिसके बाद पुलिस ने तकनीकी और वैज्ञानिक तरीकों से जांच को आगे बढ़ाया।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मुख्य आरोपी की मौत के बावजूद जांच को रोका नहीं गया और पूरे नेटवर्क तक पहुंचने के लिए लगातार प्रयास जारी रखा गया। अब तक की जांच में यह स्पष्ट हो चुका है कि यह कोई एक व्यक्ति का काम नहीं, बल्कि एक संगठित गिरोह की साजिश थी।

फिलहाल पुलिस इस नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों की तलाश में छापेमारी कर रही है। संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं, जिससे पूरे फर्जीवाड़े के तंत्र का पूरी तरह से पर्दाफाश हो सकेगा।

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