​सिल्क सिटी में गूँजी वैश्विक विचारों की प्रतिध्वनि: ट्रिपल आईटी भागलपुर में ‘टेड-एक्स’ का सफल आयोजन, पीढ़ीगत बदलाव और प्रगति के ‘अध्याय’ पर हुआ मंथन

भागलपुर। बिहार के अंग जनपद की धरती और तकनीकी शिक्षा के प्रमुख केंद्र, भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपल आईटी) भागलपुर में शनिवार, 4 अप्रैल 2026 को वैचारिक क्रांति का एक नया अध्याय लिखा गया। वैश्विक स्तर पर विख्यात ‘टेड’ (TED) प्लेटफॉर्म के तत्वावधान में ‘टेड-एक्स ट्रिपल आईटी भागलपुर’ का शानदार आयोजन संस्थान के लेक्चर हॉल में संपन्न हुआ। यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि बदलते दौर की सोच, तकनीकी विकास और मानवीय मूल्यों के बीच के समन्वय को समझने का एक अंतरराष्ट्रीय मंच था। ‘अध्याय: पीढ़ियों के पार के अध्याय’ (Adhyaay: Chapters Across Generations) थीम पर आधारित इस कार्यक्रम ने जनरेशन-एक्स से लेकर जनरेशन-अल्फा तक के सफर और विचारों के क्रमिक विकास को एक सूत्र में पिरोने का काम किया।

सांस्कृतिक और औपचारिक शुरुआत: दीप प्रज्वलन से सरस्वती वंदना तक

​कार्यक्रम का आगाज गरिमामय उपस्थिति के साथ हुआ। उद्घाटन सत्र की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ की गई, जिसमें ट्रिपल आईटी भागलपुर के निदेशक मधुसूदन सिंह, छात्र कल्याण के सहायक डीन धीरज सिन्हा, आमंत्रित वक्ता और आयोजन समिति के सदस्य शामिल रहे। इस अवसर पर संस्थान के छात्रों द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना ने आधुनिक वातावरण में सांस्कृतिक जड़ों की महत्ता को रेखांकित किया। टेड-एक्स जैसे वैश्विक ब्रांड के साथ भागलपुर के नाम का जुड़ना यह दर्शाता है कि यह शहर अब केवल रेशम उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि बौद्धिक विनिमय और नवाचार (Innovation) का भी नया केंद्र बन रहा है।

पीढ़ियों का संगम: क्या है ‘अध्याय’ की मूल भावना?

​इस वर्ष के टेड-एक्स का विषय ‘अध्याय’ बेहद प्रासंगिक रहा। इसमें विस्तार से चर्चा की गई कि कैसे जनरेशन-एक्स (1965-1980), मिलेनियल्स (1981-1996), जनरेशन-जेड (1997-2012) और अब जनरेशन-अल्फा (2013 के बाद) की सोच में बदलाव आया है।

द वॉयस ऑफ बिहार के विशेष विश्लेषण के अनुसार, इस थीम का चयन इसलिए किया गया ताकि यह समझा जा सके कि तकनीक और वैश्वीकरण ने मानवीय संबंधों और कार्यशैली को कैसे प्रभावित किया है। जहाँ जनरेशन-एक्स ने संघर्ष और अनुशासन को प्राथमिकता दी, वहीं जनरेशन-जेड और अल्फा डिजिटल क्रांति के साथ ‘स्मार्ट वर्क’ और सामाजिक चेतना पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि प्रगति का साझा नैरेटिव तभी सफल हो सकता है जब हर पीढ़ी एक-दूसरे के अनुभवों से सीखे।

वक्ताओं के विचार: जीवन के विभिन्न अध्यायों का जीवंत चित्रण

​कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिष्ठित वक्ताओं के प्रभावशाली संबोधन रहे। उनके अनुभवों ने छात्रों और शिक्षकों को जीवन के प्रति एक नया दृष्टिकोण प्रदान किया:

  • अमित किशन: उन्होंने ‘स्ट्रेंथ बियॉन्ड बारबेल’ विषय पर बात करते हुए शारीरिक शक्ति से ऊपर आंतरिक शक्ति और मानसिक मजबूती के महत्व को समझाया। उन्होंने बताया कि असली ताकत वजन उठाने में नहीं, बल्कि जीवन की चुनौतियों के सामने अडिग रहने में है।
  • सूर्यांश सिंह: युवा नेतृत्व की मिसाल पेश करते हुए उन्होंने ‘आई डिडंट वेट: द मेकिंग ऑफ ए यंग लीडर’ विषय पर अपने विचार रखे। उन्होंने युवाओं को प्रेरित किया कि नेतृत्व करने के लिए किसी खास उम्र या पद का इंतजार नहीं करना चाहिए, बल्कि पहल (Initiative) करना ही नेतृत्व की पहली सीढ़ी है।
  • बुल्लू पटनायक: उन्होंने ‘द हिडन पावर ऑफ बिल्डिंग कनेक्शंस’ पर प्रकाश डाला। नेटवर्किंग और मानवीय संबंधों की शक्ति को समझाते हुए उन्होंने बताया कि आज के प्रतिस्पर्धी दौर में सामूहिक विकास और आपसी जुड़ाव ही सफलता की कुंजी है।
  • तूलिका रानी: उन्होंने ‘ओन एवरी चैप्टर ऑफ योर लाइफ’ विषय पर एक बेहद प्रेरणादायक भाषण दिया। उन्होंने जीवन के हर उतार-चढ़ाव को स्वीकार करने और अपने संघर्षों की जिम्मेदारी खुद लेने का संदेश दिया, जिसने दर्शकों को गहराई तक प्रभावित किया।

कला और संस्कृति का समावेश: बौद्धिकता के बीच रचनात्मकता

​टेड-एक्स ट्रिपल आईटी भागलपुर केवल गंभीर चर्चाओं तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें कलात्मक प्रस्तुतियों ने चार चांद लगा दिए। दीक्षा भारती के नृत्य प्रदर्शन ने भारतीय नृत्य कला की जीवंतता को मंच पर बिखेरा, वहीं अर्पिता चौधरी के सुरीले गायन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इन सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने यह संदेश दिया कि एक तकनीकी संस्थान में भी कला और रचनात्मकता उतनी ही जरूरी है जितनी कि कोडिंग और एल्गोरिदम।

नवाचार और नेतृत्व की नई राह

​सत्र के समापन की ओर बढ़ते हुए आयोजन समिति के महासचिव, छात्र कल्याण के सहायक डीन धीरज सिन्हा और निदेशक मधुसूदन सिंह ने छात्रों को संबोधित किया। मधुसूदन सिंह ने अपने संबोधन में एक महत्वपूर्ण बात कही कि ट्रिपल आईटी भागलपुर में हमारा प्रयास केवल एक ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) बनाना है जहाँ छात्र न केवल तकनीक सीखें, बल्कि उन विचारों के साथ भी जुड़ें जो समाज और भविष्य को आकार देते हैं।

​धीरज सिन्हा ने अंतर-पीढ़ीगत संवाद (Intergenerational Dialogue) की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि टेड-एक्स जैसे आयोजनों से छात्रों के सोचने के दायरे का विस्तार होता है। उन्होंने आयोजन टीम की मेहनत की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे मंच भागलपुर के युवाओं को वैश्विक विचारकों की श्रेणी में खड़ा करने में सहायक होंगे।

बौद्धिक विनिमय का सफल समापन

​कार्यक्रम का समापन वक्ताओं और टेड-एक्स कोर टीम के सम्मान समारोह के साथ हुआ। इसके बाद एक इंटरैक्टिव सत्र का भी आयोजन किया गया, जिसमें छात्रों ने वक्ताओं से सीधे सवाल पूछे और उनके अनुभवों से गहरी जानकारी प्राप्त की। यह आयोजन संस्थान की बौद्धिक विनिमय, रचनात्मकता और वैश्विक विचार नेतृत्व को जमीनी स्तर पर बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। टेड-एक्स ट्रिपल आईटी भागलपुर ने यह साबित कर दिया है कि जब तकनीक और विचार मिलते हैं, तो प्रगति का एक नया ‘अध्याय’ शुरू होता है।

द वॉयस ऑफ बिहार की टीम मानती है कि भागलपुर जैसे शहरों में ऐसे आयोजनों का होना बिहार की बदलती छवि का परिचायक है। यह छात्रों को स्थानीय सीमाओं से निकालकर वैश्विक सोच की ओर ले जाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

  • ये भी पढ़े..

    NIFT प्रवेश परीक्षा में भागलपुर के गौरव कुमार सिंह का शानदार प्रदर्शन, हासिल की ऑल इंडिया 577वीं रैंक

    Share Add as a preferred…

    “राबड़ी आवास पर घमासान: ‘हर हाल में बंगला खाली होगा’, सम्राट के ऐलान के बीच कोर्ट जाने की तैयारी में RJD?”

    Share Add as a preferred…