रिश्तों का कत्ल और रूह कंपा देने वाली दरिंदगी: पटना के परसा बाजार में सोती हुई तीन साल की मासूम को उठा ले गया सगा चाचा, दो दोस्तों के साथ मिलकर खेत में किया सामूहिक दुष्कर्म; एम्स में जिंदगी की जंग लड़ रही बच्ची

  • ​बिहार की राजधानी पटना के परसा बाजार थाना क्षेत्र में मानवता को शर्मसार करने वाली एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने खून के रिश्तों पर से विश्वास उठा दिया है।
  • ​एक तीन साल की मासूम बच्ची, जो अपनी मां की गोद के पास बेफिक्र सो रही थी, उसे उसके ही सगे चाचा ने नशे की हालत में अगवा किया और हवस का शिकार बनाया।
  • ​इस घृणित कृत्य में चाचा के साथ उसके दो अन्य दोस्त भी शामिल थे, जिन्होंने घर से महज 500 मीटर की दूरी पर एक सुनसान खेत में इस जघन्य वारदात को अंजाम दिया।
  • ​एक स्थानीय ग्रामीण की सतर्कता के कारण बच्ची की जान बच सकी, जिसने चीखें सुनकर शोर मचाया और दरिंदों को भागने पर मजबूर कर दिया।
  • ​पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी (चाचा) और उसके एक सहयोगी को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि एक अन्य फरार आरोपी की तलाश में छापेमारी जारी है।

पटना (द वॉयस ऑफ बिहार)।

रक्षक ही बना भक्षक: विश्वास और रिश्तों की बलि

पटना का परसा बाजार इलाका शुक्रवार की रात एक ऐसी चीख का गवाह बना, जिसने पूरे बिहार की अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया है। जहाँ एक ओर समाज विकास और आधुनिकता की बातें करता है, वहीं दूसरी ओर रिश्तों के भीतर छिपा भेड़ियापन मासूमों की जिंदगी निगल रहा है। एक तीन साल की बच्ची, जिसके लिए उसका चाचा सुरक्षा का प्रतीक होना चाहिए था, वही उसकी अस्मत का लुटेरा बन गया। यह घटना केवल एक अपराध नहीं है, बल्कि उस सामाजिक पतन का प्रमाण है जहाँ नशा और हैवानियत मिलकर इंसान को जानवर से भी बदतर बना देते हैं। शुक्रवार की वह काली रात उस मासूम के लिए कभी न भूलने वाला जख्म दे गई है।

साजिश और वारदाता का घटनाक्रम: नींद में थी मासूम, बाहर खड़ी थी मौत

शुक्रवार की रात लगभग 11:30 बजे, जब पूरा गांव गहरी नींद में सो रहा था, परसा बाजार के एक घर में दरिंदगी की पटकथा लिखी जा रही थी। पीड़ित बच्ची अपनी मां के पास घर के भीतर सो रही थी. इसी दौरान उसका सगा चाचा, जो नशे में पूरी तरह धुत था, दबे पांव घर में दाखिल हुआ. उसने सोती हुई अपनी ही भतीजी को चुपचाप उठाया और घर से बाहर निकल गया. नशे के सुरूर और हवस की आग में अंधे हो चुके इस शख्स ने बच्ची को घर से करीब 500 मीटर दूर एक सुनसान खेत में ले गया. वहां उसके दो दोस्त पहले से ही मौजूद थे। इन तीनों ने मिलकर उस नन्ही जान के साथ वह किया जिसे शब्दों में बयान करना भी मुमकिन नहीं है.

देवदूत बनकर आया ग्रामीण: तालाब की रखवाली ने बचाई जान

इस खौफनाक रात में अगर गांव के एक व्यक्ति ने हिम्मत और सतर्कता नहीं दिखाई होती, तो शायद परिणाम और भी भयावह हो सकते थे। गांव का ही एक व्यक्ति रात के वक्त अपने मछली पालन वाले तालाब की रखवाली कर रहा था. सन्नाटे को चीरती हुई किसी बच्ची के रोने और चिल्लाने की आवाज उसके कानों तक पहुँची. उसे पहले लगा कि शायद गांव में कोई बच्चा चोर घुस आया है और उसने शोर मचाना शुरू कर दिया. ग्रामीण का शोर सुनकर और पकड़े जाने के डर से चाचा और उसका दोस्त लहूलुहान हालत में तड़पती हुई बच्ची को वहीं खेत में छोड़कर अंधेरे का फायदा उठाते हुए फरार हो गए. ग्रामीण के शोर मचाने पर बच्ची के परिजन भी उसे ढूंढते हुए वहां पहुँच गए और अपनी लाडली को दर्द से कराहते देख उनके पैरों तले जमीन खिसक गई.

एम्स पटना में इलाज और पुलिस की सक्रियता

परिजनों ने बिना समय गंवाए घटना की सूचना परसा बाजार थाने को दी। पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तुरंत मौके पर पहुँचकर बच्ची को अपने कब्जे में लिया और उसे तत्काल इलाज के लिए पटना एम्स (AIIMS) में भर्ती कराया. डॉक्टरों की एक विशेष टीम बच्ची की निगरानी कर रही है। हालांकि पुलिस का कहना है कि बच्ची की स्थिति अब खतरे से बाहर है, लेकिन शारीरिक और मानसिक रूप से जो चोट उसे लगी है, उससे उबरने में उसे लंबा समय लगेगा. पटना पुलिस ने इस मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए छापेमारी शुरू की और महज कुछ ही घंटों के भीतर मुख्य आरोपी चाचा और उसके एक साथी को दबोच लिया.

जांच की प्रक्रिया और एफएसएल (FSL) की रिपोर्ट

थानाप्रभारी मेनका रानी ने बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) की टीम को मौके पर बुलाया गया था. एफएसएल टीम ने घटनास्थल से महत्वपूर्ण साक्ष्य, मिट्टी के नमूने और अन्य जैविक साक्ष्य एकत्र किए हैं, जो न्यायालय में आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सबूत बनेंगे. इसके साथ ही पीड़ित बच्ची का मेडिकल परीक्षण कराया जा रहा है ताकि मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर दुष्कर्म की धाराओं को और मजबूती दी जा सके. पुलिस का दावा है कि उनके पास आरोपियों को सजा दिलाने के लिए पर्याप्त वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्य मौजूद हैं।

स्पीडी ट्रायल और कड़ी सजा का संकल्प

पुलिस प्रशासन ने साफ कर दिया है कि इस मामले में किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती जाएगी। थानाप्रभारी के अनुसार, न्यायालय में जल्द ही बच्ची और उसकी मां का बयान (धारा 164 के तहत) दर्ज कराया जाएगा. पुलिस इस मामले को ‘स्पीडी ट्रायल’ (त्वरित सुनवाई) के तहत चलाने की अनुशंसा करेगी ताकि कम से कम समय में दरिंदों को उनके किए की कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जा सके. फरार तीसरे आरोपी की पहचान कर ली गई है और पुलिस की दो टीमें उसकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। पुलिस का उद्देश्य है कि इस मामले में ऐसी सजा दिलाई जाए जो समाज के अन्य अपराधियों के लिए एक नजीर बने।

नशा और बढ़ते अपराध: एक सामाजिक विमर्श

इस पूरी घटना के केंद्र में एक बार फिर ‘नशा’ उभरकर सामने आया है। पीड़ित बच्ची की मां ने स्पष्ट रूप से कहा कि उसका देवर (बच्ची का चाचा) नशे में था. बिहार में पूर्ण शराबबंदी और नशामुक्त अभियान के दावों के बीच, इस तरह की घटनाएं यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि नशे की उपलब्धता और उसके कारण होने वाले अपराधों पर लगाम लगाने में हम कहाँ चूक रहे हैं। जब रक्षक ही नशे की हालत में भक्षक बन जाए, तो कानून के साथ-साथ सामाजिक चेतना को भी जागृत करने की आवश्यकता है। परसा बाजार की यह घटना चीख-चीख कर कह रही है कि केवल सड़कों पर गश्त बढ़ाना काफी नहीं है, बल्कि घरों के भीतर असुरक्षित महसूस कर रहे मासूमों के लिए भी एक सुरक्षा तंत्र विकसित करना होगा।

न्याय की उम्मीद और समाज की जिम्मेदारी

परसा बाजार में तीन साल की मासूम के साथ हुई इस दरिंदगी ने यह साबित कर दिया है कि अपराधियों के मन से कानून का खौफ खत्म होता जा रहा है। सगे चाचा द्वारा किया गया यह कृत्य रिश्तों के इतिहास में एक काला धब्बा है। पटना पुलिस की तत्परता और एम्स के डॉक्टरों का प्रयास सराहनीय है, लेकिन असली न्याय तब होगा जब फरार आरोपी भी सलाखों के पीछे होगा और इन हैवानों को फांसी के फंदे तक पहुँचाया जाएगा। द वॉयस ऑफ बिहार की टीम इस पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है और शासन-प्रशासन से यह मांग करती है कि इस मासूम को न्याय दिलाने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएं। समाज को भी आगे आकर ऐसे नरपिशाचों का बहिष्कार करना होगा ताकि कोई दूसरा चाचा अपनी ही भतीजी की जिंदगी उजाड़ने की जुर्रत न कर सके।

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