
पटना, बिहार की राजनीति में एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने राज्य की मौजूदा स्थिति को लेकर एनडीए सरकार पर सीधा हमला बोला है और 21 साल के शासन का हिसाब मांगते हुए मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्रियों को सार्वजनिक बहस की खुली चुनौती दी है। तेजस्वी ने सरकार के कामकाज पर सवाल उठाते हुए 31 बिंदुओं की एक विस्तृत सूची जारी की है, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आय और कानून-व्यवस्था जैसे अहम मुद्दे शामिल हैं।
‘विकास बनाम हकीकत’ की बहस तेज
तेजस्वी यादव का आरोप है कि पिछले दो दशकों में बिहार विकास के अधिकांश मानकों पर पिछड़ता गया है। उन्होंने कहा कि सरकार भले ही विकास के दावे करती रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। उनके मुताबिक, राज्य आज भी कई सामाजिक और आर्थिक सूचकांकों में देश के सबसे निचले पायदान पर बना हुआ है।
उन्होंने इसे “आसमानी विफलता” बताते हुए कहा कि सरकार अपनी कमियों को छिपाने के लिए विपक्ष पर आरोप लगाती रही है, जबकि वास्तविकता आंकड़ों में साफ दिखाई देती है।
शिक्षा और आय पर सरकार घिरी
विपक्ष ने खासतौर पर शिक्षा और आर्थिक स्थिति को लेकर सरकार को कठघरे में खड़ा किया है।
तेजस्वी के मुताबिक:
- बिहार में साक्षरता दर देश में सबसे कम है
- प्रति व्यक्ति आय और ग्रामीण आय सबसे नीचे है
- स्कूलों में छात्र-शिक्षक अनुपात (Pupil-Teacher Ratio) बेहद खराब है
- ड्रॉपआउट रेट सबसे ज्यादा है
- गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की कमी बनी हुई है
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में प्रति एक लाख आबादी पर कॉलेजों की संख्या भी काफी कम है, जिससे उच्च शिक्षा तक पहुंच सीमित हो जाती है।
रोजगार, पलायन और निवेश पर सवाल
तेजस्वी यादव ने रोजगार के मुद्दे को सबसे गंभीर बताते हुए कहा कि बिहार में बेरोजगारी दर लगातार ऊंची बनी हुई है।
उनके अनुसार:
- सबसे अधिक बेरोजगार युवा बिहार से हैं
- बड़े पैमाने पर पलायन जारी है
- प्रति व्यक्ति निवेश और औद्योगिक विकास बेहद कमजोर है
- किसानों की आय भी देश में सबसे कम है
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में औद्योगिक विकास और निवेश के मोर्चे पर सरकार पूरी तरह विफल रही है।
स्वास्थ्य और पोषण की स्थिति भी चिंताजनक
स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी विपक्ष ने कई गंभीर सवाल उठाए हैं। तेजस्वी ने कहा कि:
- डॉक्टरों के करीब 58% पद खाली हैं
- कुपोषण, एनीमिया और कम वजन वाले बच्चों की संख्या सबसे अधिक है
- स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता बेहद कमजोर है
इसके अलावा उन्होंने बहुआयामी गरीबी (Multidimensional Poverty) और बुनियादी सुविधाओं की कमी को भी बड़ा मुद्दा बताया।
कानून-व्यवस्था और प्रदूषण पर भी निशाना
विपक्ष ने कानून-व्यवस्था को लेकर भी सरकार को घेरा।
तेजस्वी के अनुसार:
- राज्य में अपराध दर ज्यादा है
- अपहरण और हिंसक घटनाएं चिंता का विषय हैं
- देश के सबसे प्रदूषित शहरों में बिहार के कई शहर शामिल हैं
सार्वजनिक बहस की चुनौती
तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्रियों को सीधी चुनौती देते हुए कहा कि अगर उनमें नैतिक साहस है, तो वे इन सभी मुद्दों पर सार्वजनिक मंच पर बहस करें। उन्होंने कहा कि बिहार की असली तस्वीर सामने आनी चाहिए और जनता को सच्चाई जानने का अधिकार है।
NDA का पक्ष क्या?
हालांकि, एनडीए सरकार पहले भी ऐसे आरोपों को खारिज करती रही है। सरकार का दावा है कि पिछले वर्षों में सड़क, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है और राज्य तेजी से विकास की ओर बढ़ रहा है।
सियासी तापमान बढ़ा
तेजस्वी यादव के इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में एक बार फिर गर्मी आ गई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है।
अब सवाल यह है कि क्या यह चुनौती महज राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रहेगी या फिर वास्तव में किसी सार्वजनिक बहस का रूप लेगी। फिलहाल, बिहार की राजनीति में ‘21 साल का हिसाब’ एक बड़ा मुद्दा बनता नजर आ रहा है।


