बिहार में बदली शहरी निकाय चुनाव व्यवस्था: अब पार्षद करेंगे सशक्त स्थायी समिति का चयन, एक ही दिन में पूरी होगी प्रक्रिया

पटना: बिहार में शहरी प्रशासन को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए सरकार ने बड़ा बदलाव किया है। अब नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों में सशक्त स्थायी समिति के गठन की प्रक्रिया पूरी तरह बदल दी गई है। नई व्यवस्था के तहत अब मेयर या चेयरमैन नहीं, बल्कि वार्ड पार्षद गुप्त मतदान के जरिए समिति के सदस्यों का चयन करेंगे।

राज्य के 19 नगर निगम समेत कुल 264 शहरी निकायों में इस नई व्यवस्था के तहत चुनाव प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा जारी निर्देश के अनुसार, 15 से 20 अप्रैल 2026 के बीच सभी निकायों में चुनाव संपन्न कराए जाएंगे।

एक ही दिन में पूरी होगी पूरी प्रक्रिया

इस बार चुनाव प्रक्रिया को सरल और तेज बनाने के लिए बड़ा बदलाव किया गया है। नामांकन, मतदान और मतगणना—तीनों चरण एक ही दिन में पूरे किए जाएंगे।
मतदान समाप्त होते ही उसी दिन मतगणना की जाएगी और परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे। इसके तुरंत बाद निर्वाचित सदस्यों को शपथ दिलाकर समिति का गठन भी उसी दिन पूरा कर लिया जाएगा।

जिलाधिकारी की निगरानी में होगा चुनाव

चुनाव की पूरी जिम्मेदारी संबंधित जिले के जिलाधिकारी (DM) को सौंपी गई है।

  • डीएम चुनाव की तिथि, समय और स्थान की सूचना कम से कम एक सप्ताह पहले पार्षदों को देंगे
  • प्रत्येक रिक्ति के लिए अलग-अलग मतपेटियां रखी जाएंगी
  • हर रिक्ति के लिए एक सहायक निर्वाचन पदाधिकारी नियुक्त किया जाएगा
  • पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी अनिवार्य होगी

गुप्त मतदान से होगा चयन

नई व्यवस्था के तहत पार्षद गुप्त मतदान के जरिए समिति के सदस्यों का चयन करेंगे।

  • हर पार्षद सभी रिक्तियों के लिए अलग-अलग वोट डाल सकेगा
  • लेकिन नामांकन केवल एक ही रिक्ति के लिए मान्य होगा
  • एक से अधिक नामांकन की स्थिति में केवल पहली (न्यूनतम क्रमांक वाली) प्रविष्टि वैध मानी जाएगी

क्यों बदली गई व्यवस्था

पहले सशक्त स्थायी समिति के सदस्यों का चयन मेयर या चेयरमैन द्वारा किया जाता था। इस प्रक्रिया को लेकर अक्सर पक्षपात और मनमानी के आरोप लगते रहे हैं।
इन्हीं शिकायतों को देखते हुए बिहार सरकार ने नगर पालिका कानून में संशोधन किया और अब लोकतांत्रिक तरीके से पार्षदों के माध्यम से चयन की व्यवस्था लागू की गई है।

सरकार का क्या कहना है

नगर विकास मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि यह बदलाव स्थानीय निकायों को अधिक सशक्त और पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे न सिर्फ लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूती मिलेगी, बल्कि शहरी विकास कार्यों में भी तेजी आएगी।

क्या होगा इसका असर

विशेषज्ञों के अनुसार इस नई प्रणाली से:

  • निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी
  • पार्षदों की भागीदारी सुनिश्चित होगी
  • स्थानीय स्तर पर जवाबदेही मजबूत होगी
  • विवाद और आरोप-प्रत्यारोप में कमी आएगी

कुल मिलाकर, बिहार में शहरी निकायों की चुनाव व्यवस्था में यह बदलाव एक बड़े प्रशासनिक सुधार के रूप में देखा जा रहा है। अगर यह मॉडल सफल रहता है, तो भविष्य में अन्य राज्यों में भी इसे अपनाया जा सकता है।

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