
पटना: आधार कार्ड में जन्मतिथि सुधार को लेकर हो रही देरी पर पटना हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट कहा है कि यदि किसी आवेदक के पास वैध दस्तावेज मौजूद हैं, तो अधिकारियों को बिना देरी के सुधार करना चाहिए। कोर्ट ने इस तरह की लापरवाही को गंभीर बताते हुए संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाई और जवाबदेही तय करने के संकेत दिए हैं।
क्या है पूरा मामला
यह मामला एक याचिका से जुड़ा है, जिसमें आवेदक ने अपने आधार कार्ड में दर्ज जन्मतिथि को सही कराने की मांग की थी। आधार में जन्मतिथि गलत दर्ज होने के कारण उन्हें कई प्रशासनिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।
याचिकाकर्ता के दस्तावेजों के अनुसार उनकी वास्तविक जन्मतिथि अलग थी, जबकि आधार कार्ड में अलग दर्ज थी। सुधार के लिए आवेदन देने के बावजूद लंबे समय तक कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिसके बाद उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायालय ने कहा कि:
- वैध दस्तावेज होने पर सुधार में देरी “खेदजनक” है
- अधिकारियों को स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई करनी चाहिए
- आम लोगों को छोटी-छोटी समस्याओं के लिए कोर्ट जाने को मजबूर नहीं किया जाना चाहिए
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि आवेदक संबंधित क्षेत्रीय अधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर अपने दस्तावेज प्रस्तुत करें, और सत्यापन के बाद जल्द से जल्द सुधार सुनिश्चित किया जाए।
UIDAI को दिए निर्देश
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से बताया गया कि जन्मतिथि सुधार की प्रक्रिया के लिए आवेदक को यूआईडीएआई (UIDAI) के क्षेत्रीय कार्यालय में आवेदन देना होता है।
हालांकि कोर्ट ने इस प्रक्रिया में हो रही देरी पर नाराजगी जताते हुए निर्देश दिया कि:
- स्पष्ट और सरल दिशा-निर्देश जारी किए जाएं
- मामलों का त्वरित निपटारा सुनिश्चित किया जाए
- अनावश्यक देरी और लापरवाही पर रोक लगे
क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला
आधार कार्ड आज के समय में सबसे महत्वपूर्ण पहचान दस्तावेजों में से एक बन चुका है। इसका उपयोग कई जरूरी कार्यों में होता है, जैसे:
- बैंक खाता खोलना
- मोबाइल सिम लेना
- सरकारी योजनाओं का लाभ उठाना
- आयकर रिटर्न दाखिल करना
ऐसे में जन्मतिथि या अन्य जानकारी में गलती होने पर लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
आम लोगों को होगी राहत
विशेषज्ञों का मानना है कि हाईकोर्ट के इस सख्त रुख से उन लाखों लोगों को राहत मिलेगी, जो लंबे समय से आधार में सुधार के लिए भटक रहे हैं।
अब उम्मीद की जा रही है कि संबंधित विभाग तेजी से कार्रवाई करेंगे और लोगों को समय पर सेवा उपलब्ध कराएंगे, जिससे उन्हें बार-बार दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
पटना हाईकोर्ट का यह आदेश प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। इससे न सिर्फ आधार सुधार प्रक्रिया तेज होगी, बल्कि आम जनता का सरकारी तंत्र पर भरोसा भी मजबूत होगा।
अगर इस दिशा में सख्ती जारी रहती है, तो भविष्य में आधार से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और सुविधा दोनों बढ़ने की संभावना है।


