​बिहार परिवहन विभाग की वित्तीय ‘महा-छलांग’: 4191 करोड़ का रिकॉर्ड राजस्व, सुस्त अफसरों पर गिरी गाज, मुस्तैद होंगे सम्मानित

पटना/भागलपुर। बिहार के राजस्व मानचित्र पर परिवहन विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के समापन पर एक ऐसी लकीर खींच दी है, जो आने वाले वर्षों के लिए नजीर साबित होगी। विभाग ने न केवल अपने निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त किया है, बल्कि उसे पार करते हुए सरकारी खजाने में उम्मीद से अधिक योगदान दिया है। 3 अप्रैल 2026 को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, परिवहन विभाग ने इस वित्तीय वर्ष में कुल 4191.55 करोड़ रुपये का राजस्व संग्रह किया है। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि विभाग के लिए 4070 करोड़ रुपये का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसे पीछे छोड़ते हुए 103 प्रतिशत की सफलता दर हासिल की गई है। इस वित्तीय सफ़लता के पीछे विभाग की सख्ती, डिजिटल पारदर्शिता और अधिकारियों की जवाबदेही का एक त्रिकोण काम कर रहा है।

अंतिम चार महीनों का ‘मिशन मोड’: जब बदली विभाग की चाल

​राजस्व के इन आंकड़ों का अगर सूक्ष्म विश्लेषण किया जाए, तो पता चलता है कि असली बदलाव पिछले चार महीनों में आया है। वित्तीय वर्ष की अंतिम तिमाही और उससे ठीक पहले के महीने में विभाग ‘मिशन मोड’ में नजर आया। दिसंबर 2025 से लेकर मार्च 2026 तक की अवधि में राजस्व वसूली में जो उछाल देखा गया, वह पिछले कई वर्षों के औसत से कहीं अधिक है।

​इस तेजी के पीछे परिवहन मंत्री श्रवण कुमार की सक्रियता को मुख्य कारण माना जा रहा है। उन्होंने केवल दफ्तरों में बैठकर फाइलों का अवलोकन नहीं किया, बल्कि स्वयं कमान संभालते हुए जिला परिवहन पदाधिकारियों (DTO) और चेक-पोस्टों की कार्यशैली को अपनी रडार पर रखा। श्रवण कुमार ने स्पष्ट कर दिया था कि राजस्व संग्रहण में किसी भी प्रकार की ढिलाई को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, जिसका सीधा असर निचले स्तर के कर्मचारियों और अधिकारियों की कार्यक्षमता पर पड़ा।

जवाबदेही का डंडा: 40 अधिकारियों पर ‘शो कॉज’ की गाज

​परिवहन विभाग की इस सफलता की कहानी केवल पुरस्कारों की नहीं, बल्कि दंड की भी है। सुशासन और पारदर्शिता का दावा करने वाली सरकार ने इस बार ‘काम नहीं तो खैर नहीं’ की नीति अपनाई। राजस्व वसूली में लापरवाही बरतने और विभागीय लक्ष्यों को गंभीरता से न लेने वाले कुल 40 अधिकारियों के खिलाफ कारण बताओ (शो कॉज) नोटिस जारी किया गया है।

​इन 40 अधिकारियों की सूची में जिला परिवहन पदाधिकारी (DTO), सहायक जिला परिवहन पदाधिकारी (ADTO), मोटर यान निरीक्षक (MVI) और प्रवर्तन अवर निरीक्षक (ESI) स्तर के अधिकारी शामिल हैं। यह बिहार के प्रशासनिक इतिहास में संभवतः पहली बार है जब इतनी बड़ी संख्या में परिवहन विभाग के अधिकारियों को एक साथ जवाबदेही के कटघरे में खड़ा किया गया है। इस सख्ती ने विभाग के भीतर एक कड़ा संदेश दिया कि अब केवल पद पर बने रहना काफी नहीं है, बल्कि परिणामों के आधार पर ही मूल्यांकन होगा।

चेक-पोस्टों पर कड़ाई और सीधी निगरानी

​राजस्व में बढ़ोतरी का एक बड़ा स्रोत राज्य की सीमाओं पर स्थित चेक-पोस्ट रहे हैं। श्रवण कुमार ने स्वयं विभिन्न चेक-पोस्टों का औचक निरीक्षण किया। इन निरीक्षणों का उद्देश्य न केवल चोरी रोकना था, बल्कि वसूली की प्रक्रिया को मानवीय हस्तक्षेप से मुक्त कर अधिक पारदर्शी बनाना था। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि बकाया टैक्स की वसूली के लिए घर-घर नोटिस भेजने या सड़कों पर सघन जांच अभियान चलाने में कोई कोताही न बरती जाए।

​चेक-पोस्टों पर तकनीक के इस्तेमाल और मंत्री की सीधी नजर ने बिचौलियों के प्रभाव को कम किया। इससे वह पैसा जो पहले भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाता था, अब सीधे सरकारी खाते में पहुँच रहा है। प्रवर्तन टीमों को सक्रिय किया गया, जिससे बिना परमिट और ओवरलोडेड वाहनों से होने वाली राजस्व की हानि में बड़ी गिरावट आई है।

डिजिटल सेवाएं और फैंसी नंबर: आम जनता की रुचि और सरकारी कमाई

​राजस्व संग्रहण का एक बड़ा हिस्सा आधुनिक सेवाओं से भी आया है। परिवहन विभाग ने हाल के वर्षों में ड्राइविंग लाइसेंस (DL), वाहन निबंधन (Registration) और फैंसी नंबरों की नीलामी की प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन और सुगम बनाया है।

  1. फैंसी नंबरों का क्रेज: बिहार के युवाओं और रसूखदारों के बीच अपनी गाड़ियों के लिए विशेष नंबर (जैसे 0001, 8055 आदि) लेने की होड़ ने विभाग की झोली भर दी है। इन नंबरों की पारदर्शी नीलामी से करोड़ों रुपये का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हुआ।
  2. लंबित प्रक्रियाओं का निपटारा: डीटीओ कार्यालयों में पहले वाहन निबंधन की फाइलें महीनों दबी रहती थीं। श्रवण कुमार के निर्देश पर एक विशेष अभियान चलाकर लंबित निबंधन प्रक्रियाओं को तेजी से निपटाया गया। इससे न केवल जनता को राहत मिली, बल्कि निबंधन शुल्क के रूप में विभाग को बड़ा राजस्व मिला।
  3. ट्रैफिक चालान की सक्रियता: सड़कों पर लगे हाई-टेक कैमरों और ट्रैफिक पुलिस की सक्रियता से नियम तोड़ने वालों पर होने वाली जुर्माने की कार्रवाई अब सीधे डिजिटल वॉलेट और बैंक खातों से जुड़ गई है। हेलमेट, सीटबेल्ट और तेज रफ़्तार के खिलाफ चलाए गए चालान अभियान ने राजस्व में सीधे तौर पर योगदान दिया है।

सख्ती का लाभ या जनता पर बोझ?

​परिवहन विभाग की इस वित्तीय सफलता के दो पहलू हैं। एक तरफ जहां 103 प्रतिशत राजस्व वसूली सरकार की कार्यकुशलता को दर्शाती है, वहीं दूसरी तरफ सड़कों पर चलने वाले आम वाहन चालकों के मन में एक अनजाना सा भय भी रहता है। भारी भरकम चालान और सख्ती कई बार छोटे वाहन मालिकों के लिए आर्थिक बोझ बन जाती है।

  • पारदर्शिता की जीत: यह मानना होगा कि व्यवस्था जितनी डिजिटल और सख्त होगी, भ्रष्टाचार उतना ही कम होगा। 40 अधिकारियों को नोटिस मिलना यह बताता है कि विभाग के भीतर की सफाई जारी है।
  • सुविधाओं में सुधार की जरूरत: राजस्व तो बढ़ गया है, लेकिन क्या उसी अनुपात में डीटीओ कार्यालयों में आम आदमी को मिलने वाली सुविधाओं में सुधार हुआ है? दलालों का जाल आज भी कई जगहों पर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। विभाग को अब इस बढ़े हुए राजस्व का एक हिस्सा अपनी सेवाओं को और अधिक ‘यूजर फ्रेंडली’ बनाने में खर्च करना चाहिए।

बेहतर काम का इनाम: ‘कैरट एंड स्टिक’ पॉलिसी

​श्रवण कुमार ने साफ कर दिया है कि उनका विभाग केवल दंड देने में विश्वास नहीं रखता। उन्होंने घोषणा की है कि वित्तीय वर्ष की विस्तृत जिलेवार रिपोर्ट आने के बाद उन पदाधिकारियों को सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया जाएगा जिन्होंने अपने लक्ष्यों को समय से पहले और ईमानदारी से प्राप्त किया है। यह ‘कैरट एंड स्टिक’ (पुरस्कार और दंड) की नीति विभाग के भीतर एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा पैदा करने वाली है।

​सम्मान की इस घोषणा से उन अधिकारियों का मनोबल बढ़ेगा जो विपरीत परिस्थितियों में भी ईमानदारी से काम कर रहे हैं। भागलपुर, मुजफ्फरपुर और गया जैसे बड़े जिलों के परिवहन कार्यालयों की विशेष रिपोर्ट तैयार की जा रही है ताकि प्रदर्शन का सटीक आकलन हो सके।

सुशासन और आर्थिक मजबूती का संगम

​4191.55 करोड़ रुपये का यह आंकड़ा केवल एक संख्या नहीं है, बल्कि बिहार के विकास कार्यों के लिए ईंधन का काम करेगा। परिवहन विभाग ने यह साबित किया है कि अगर नेतृत्व सक्रिय हो और मॉनिटरिंग सीधी हो, तो किसी भी लक्ष्य को हासिल करना नामुमकिन नहीं है। श्रवण कुमार के नेतृत्व में विभाग ने जो अनुशासन दिखाया है, उसकी गूंज अन्य विभागों में भी सुनाई देनी चाहिए।

द वॉयस ऑफ बिहार की टीम इस उपलब्धि को राज्य की आर्थिक सेहत के लिए एक शुभ संकेत मानती है। हालांकि, विभाग की असली चुनौती अब इस प्रदर्शन को अगले वित्तीय वर्ष में भी बरकरार रखने और आम जनता की परेशानियों को कम करने की होगी। 40 अधिकारियों पर की गई कार्रवाई एक नजीर बने और सम्मानित होने वाले अधिकारी एक प्रेरणा, तभी परिवहन विभाग का यह सफर वाकई ‘शानदार’ कहलाएगा।

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