
मुंगेर/पटना। बिहार में भूमि विवादों के निपटारे और राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली को पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए मुंगेर की ऐतिहासिक धरती पर 4 अप्रैल 2026 को एक विशाल ‘भूमि सुधार जन-कल्याण संवाद’ का आयोजन होने जा रहा है। मुंगेर के प्रेक्षा गृह (ऑडिटोरियम) में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम की कमान स्वयं उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा संभालेंगे। यह आयोजन केवल शिकायतों को सुनने का मंच नहीं है, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही तय करने और वर्षों से लंबित पड़े जमीन के मामलों को फाइलों से निकालकर धरातल पर सुलझाने की एक बड़ी कवायद है। 3 अप्रैल की रात तक इस महा-संवाद की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और प्रशासन हाई अलर्ट पर है।
नौ अंचल, नौ काउंटर: अव्यवस्था रोकने के लिए ब्लॉकवार रजिस्ट्रेशन की रणनीति
मुंगेर जिले की भौगोलिक और प्रशासनिक जटिलता को देखते हुए, उपमुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि किसी भी आवेदक को भीड़ या अव्यवस्था का सामना न करना पड़े। इसके लिए जिले के सभी नौ अंचलों—मुंगेर सदर, जमालपुर, बरियारपुर, धरहरा, खड़गपुर, तारापुर, संग्रामपुर, टेटिया बम्बर और असरगंज—के लिए अलग-अलग रजिस्ट्रेशन काउंटर स्थापित किए जा रहे हैं।
सुबह 9:00 बजे से ही इन काउंटरों पर आवेदकों का पंजीकरण शुरू हो जाएगा, जो 10:30 बजे तक चलेगा। प्रत्येक काउंटर पर संबंधित अंचल के कर्मचारी और अधिकारी मौजूद रहेंगे जो दाखिल-खारिज (म्यूटेशन), परिमार्जन, भूमि मापी, अतिक्रमण और पुराने भूमि विवादों से जुड़ी शिकायतों को दर्ज करेंगे। इसके अलावा, एक अलग ‘पूछताछ केंद्र’ भी बनाया गया है ताकि जो लोग पहली बार अपनी समस्या लेकर आ रहे हैं, उन्हें प्रक्रिया की सही जानकारी मिल सके।
आमने-सामने की सुनवाई: जब अधिकारियों की मौजूदगी में गूंजेगी फरियाद
सुबह 11:00 बजे से जनसंवाद का मुख्य सत्र शुरू होगा। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा केवल आवेदनों को जमा नहीं करेंगे, बल्कि वे शिकायतकर्ता और संबंधित अंचल के अधिकारी-कर्मचारी को आमने-सामने बैठाकर सवाल-जवाब करेंगे। विभाग का मानना है कि अधिकारियों की उपस्थिति में सीधे संवाद से सच्चाई जल्द सामने आती है और टालमटोल की गुंजाइश खत्म हो जाती है।
उपमुख्यमंत्री ने यह भी साफ कर दिया है कि जिन लोगों ने पहले भी अपनी समस्याओं को लेकर अंचल या अनुमंडल कार्यालय में आवेदन दिया है और उनका काम नहीं हुआ है, वे अपने पुराने आवेदनों की प्रति जरूर साथ लाएं। ऐसे लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर सुना जाएगा और अधिकारियों से जवाब तलब किया जाएगा कि आखिर इतने समय तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
अधिकारियों का भारी जमावड़ा: मुंगेर में जुटेगा राजस्व विभाग का ‘थिंक टैंक’
इस कार्यक्रम की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पटना से राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के आला अधिकारियों की एक पूरी फौज मुंगेर पहुँच रही है। विभाग के प्रधान सचिव सीके अनिल, ओएसडी चंद्रिका अत्री, भू-अर्जन निदेशक कमलेश कुमार सिंह समेत अपर सचिव और उप निदेशक स्तर के आधा दर्जन से अधिक अधिकारी इस दौरान मौजूद रहेंगे। यह पहली बार है जब विभाग के इतने वरीय अधिकारी सीधे किसी जिले में जाकर आम जनता के बीच बैठ रहे हैं। इससे न केवल स्थानीय प्रशासन पर दबाव बढ़ेगा, बल्कि नीतिगत फैसलों में भी तेजी आएगी।
3:30 बजे की समीक्षा बैठक: लंबित फाइलों पर गिरेगी गाज
जनसंवाद समाप्त होने के बाद, असली कड़ाई दोपहर 3:30 बजे से शुरू होने वाली समीक्षा बैठक में दिखेगी। प्रेक्षा गृह में ही आयोजित होने वाली इस बैठक में प्रमंडलीय आयुक्त, समाहर्ता (डीएम), अपर समाहर्ता और जिले के सभी अंचल अधिकारी (सीओ) शामिल होंगे।
विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट किया है कि बैठक में केवल ‘सब ठीक है’ की रिपोर्ट नहीं चलेगी। राजस्व ग्रामवार उन सभी मामलों की समीक्षा की जाएगी जो दाखिल-खारिज और परिमार्जन में महीनों से लंबित हैं। विशेष रूप से ‘अभियान बसेरा-2’ की प्रगति की भी जांच होगी, जिसका उद्देश्य भूमिहीनों को आवास के लिए जमीन उपलब्ध कराना है। जिन अधिकारियों के पास पेंडेंसी (लंबित मामले) का ग्राफ ऊंचा होगा, उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश भी दिए जा सकते हैं।
भूमि सर्वे की सूक्ष्म समीक्षा: मुंगेर के डिजिटल भविष्य का रोडमैप
बिहार में वर्तमान में चल रहे भूमि सर्वे (सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त) के कार्यों को लेकर आम जनता के मन में कई शंकाएं और जिज्ञासाएं हैं। मुंगेर के इस संवाद कार्यक्रम में सर्वे कार्यों की विशेष समीक्षा की जाएगी। जिला बंदोबस्त पदाधिकारी और सर्वे से जुड़े सभी अमीन और कानूनगो को बैठक में उपस्थित रहने का आदेश दिया गया है। उपमुख्यमंत्री का लक्ष्य है कि सर्वे की प्रक्रिया में पारदर्शिता आए ताकि भविष्य में जमीन से जुड़े विवाद जड़ से खत्म हो सकें।
पारदर्शिता के लिए डिजिटल ट्रैकिंग: मोबाइल पर मिलेगी पल-पल की खबर
इस जनसंवाद को केवल एक दिन के कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखा जाएगा। उपमुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि प्राप्त होने वाले सभी आवेदनों को तुरंत ‘जन शिकायत पोर्टल’ पर अपलोड किया जाएगा। आवेदन के समय आवेदक का मोबाइल नंबर अनिवार्य किया गया है ताकि उनके मामले में जो भी प्रगति हो, उसकी जानकारी उन्हें एसएमएस (SMS) के माध्यम से मिलती रहे। यह व्यवस्था दलालों और बिचौलियों के प्रभाव को कम करने के लिए की गई है।
क्या बदलेंगे मुंगेर के हालात?
मुंगेर में भूमि विवादों का इतिहास काफी पुराना और पेचीदा रहा है। कई मामले दशकों से न्यायालयों और अंचल कार्यालयों के बीच झूल रहे हैं। विजय कुमार सिन्हा का यह ‘भूमि जनसंवाद’ मॉडल जनता के बीच एक नई उम्मीद लेकर आया है। हालांकि, चुनौती यह है कि क्या एक दिन के संवाद से वर्षों पुराने विवाद सुलझ पाएंगे?
जानकारों का मानना है कि ऐसे आयोजनों से सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि निचले स्तर के अधिकारियों (अमीन, कर्मचारी, सीओ) में शासन का डर पैदा होता है। जब सीधे मंत्री और प्रधान सचिव स्तर के अधिकारी फाइलों की जांच करते हैं, तो भ्रष्टाचार की जड़ें कमजोर होती हैं। मुंगेर की जनता इस पहल को सकारात्मक मान रही है, लेकिन उनकी असली संतुष्टि तब होगी जब इस संवाद में दिए गए निर्देशों का धरातल पर पालन होगा।
सुशासन का नया संकल्प
विजय कुमार सिन्हा के नेतृत्व में होने वाला यह कार्यक्रम बिहार में ‘सुशासन’ के दावों को जमीन पर उतारने की एक कोशिश है। मुंगेर के प्रेक्षा गृह में 4 अप्रैल को होने वाली हलचल यह तय करेगी कि राज्य सरकार जमीन की समस्याओं को सुलझाने के प्रति कितनी गंभीर है। यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो आने वाले दिनों में इसे राज्य के अन्य जिलों में भी दोहराया जा सकता है। फिलहाल, मुंगेर के नौ अंचलों के लोग अपने कागजात संभाल रहे हैं, क्योंकि कल उनकी जमीन की किस्मत का फैसला खुद सरकार के शीर्ष नेतृत्व के हाथों में होगा।


