
पटना, 31 मार्च 2026: बिहार में बिजली दरों में हालिया बढ़ोतरी को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। माले (CPI-ML) के राज्य सचिव कुणाल ने राज्य सरकार के फैसले पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे आम जनता के साथ “सीधा धोखा” करार दिया है।
सोमवार को जारी बयान में कुणाल ने कहा कि चुनाव के दौरान 125 यूनिट मुफ्त बिजली देने का वादा कर जनता को आकर्षित किया गया था, लेकिन सत्ता में आने के कुछ ही महीनों के भीतर सरकार अपने वादों से पीछे हट गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह फैसला जनता के भरोसे को तोड़ने वाला है।
‘चुनावी वादों से मुकर रही सरकार’
माले नेता ने कहा कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे कर वोट हासिल किए गए, लेकिन अब सरकार उन वादों को निभाने में नाकाम साबित हो रही है। उन्होंने कहा कि महज चार महीनों के भीतर बिजली दरों में बढ़ोतरी करना इस बात का संकेत है कि सरकार की प्राथमिकता जनता नहीं, बल्कि राजस्व बढ़ाना है।
कुणाल ने यह भी कहा कि बिजली जैसी बुनियादी जरूरत को महंगा करना गरीब और मध्यम वर्ग के लिए गंभीर समस्या पैदा करेगा। इससे घरेलू बजट पर सीधा असर पड़ेगा और आम लोगों की आर्थिक स्थिति और कठिन हो जाएगी।
‘महंगाई के दौर में राहत नहीं, बोझ बढ़ा रही सरकार’
उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले से ही महंगाई की मार झेल रही जनता को राहत देने के बजाय सरकार अतिरिक्त बोझ डाल रही है। उन्होंने कहा कि यह फैसला खासकर ग्रामीण और निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए परेशानी का कारण बनेगा।
दर वृद्धि वापस लेने की मांग
माले ने सरकार से बिजली दरों में की गई बढ़ोतरी को तत्काल वापस लेने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी कि यदि सरकार इस फैसले पर पुनर्विचार नहीं करती है, तो पार्टी राज्यभर में आंदोलन तेज करेगी।
राजनीतिक माहौल हुआ गरम
बिजली दरों को लेकर विपक्ष के लगातार हमलों के बीच राज्य की राजनीति गरमा गई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और भी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है, जिससे यह मामला राजनीतिक रूप से और अहम बनता जा रहा है।


