नितीश कुमार की 2024 बैच के आईएएस अधिकारियों के साथ ‘संकल्प’ में बड़ी बैठक: बिहार के भविष्य के नौकरशाहों को दिया सुशासन और सेवा का मंत्र

पटना (द वॉयस ऑफ बिहार)।

एक अणे मार्ग के ‘संकल्प’ कक्ष में सजी सुशासन की नई पाठशाला

बिहार की राजधानी पटना के सबसे महत्वपूर्ण पते, एक अणे मार्ग स्थित मुख्यमंत्री आवास के ‘संकल्प’ सभागार में आज एक विशेष प्रशासनिक गहमागहमी देखी गई। अवसर था 2024 बैच के बिहार कैडर के नवनियुक्त आईएएस अधिकारियों के साथ मुख्यमंत्री नितीश कुमार की परिचयात्मक और मार्गदर्शन बैठक। बिहार की प्रशासनिक मशीनरी में नई ऊर्जा और ताजी सोच को शामिल करने के उद्देश्य से आयोजित इस बैठक में मुख्यमंत्री ने उन युवा चेहरों से सीधा संवाद किया, जिनके कंधों पर आने वाले दशकों में बिहार के विकास की रूपरेखा को धरातल पर उतारने की जिम्मेदारी होगी। ‘संकल्प’ की दीवारों के बीच आज केवल फाइलों की बात नहीं हुई, बल्कि उन संकल्पों को दोहराया गया जो बिहार को एक विकसित राज्य बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रहे हैं। इस बैठक को केवल एक औपचारिक मुलाकात के तौर पर नहीं, बल्कि बिहार के प्रशासनिक भविष्य की नींव रखने वाले एक महत्वपूर्ण सत्र के रूप में देखा जा रहा है।

न्याय के साथ विकास: मुख्यमंत्री ने नए अधिकारियों को बताया बिहार का मूल मंत्र

बैठक की शुरुआत करते हुए नितीश कुमार ने 2024 बैच के सभी आईएएस अधिकारियों का बिहार कैडर में स्वागत किया और उन्हें राज्य की विशिष्टताओं से अवगत कराया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बिहार में शासन का एक ही आधार है— ‘न्याय के साथ विकास’। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को समझाया कि इसका अर्थ समाज के हर तबके का विकास है, जिसमें कोई भी पीछे न छूटे, चाहे वह दलित हो, पिछड़ा हो, महिला हो या अल्पसंख्यक। नितीश कुमार ने कहा कि न्याय के साथ विकास का मतलब है कि विकास का फल अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने युवा अधिकारियों को आगाह किया कि वे केवल फाइलों के आंकड़ों में न उलझें, बल्कि योजनाओं के वास्तविक प्रभाव को जमीन पर जाकर देखें। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि बिहार की मिट्टी में काम करने का अनुभव आपको वह परिपक्वता देगा जो शायद किसी अन्य राज्य में संभव नहीं है।

क्षेत्रीय भ्रमण और जनसंपर्क: दफ्तर की कुर्सी छोड़ गांव की चौपाल तक जाने की हिदायत

मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक कार्यकुशलता को लेकर एक कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि एक आईएएस अधिकारी की असली पहचान उसके दफ्तर की चकाचौंध से नहीं, बल्कि क्षेत्र में उसके द्वारा किए गए दौरों से होती है। नितीश कुमार ने 2024 बैच के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे जितना अधिक संभव हो सके, ग्रामीण इलाकों का भ्रमण करें। उन्होंने कहा कि जब तक आप गांव की गलियों में नहीं जाएंगे, तब तक आपको वहां की समस्याओं और लोगों की उम्मीदों का अहसास नहीं होगा। मुख्यमंत्री ने अपने पुराने अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि कैसे जमीनी फीडबैक के आधार पर बड़ी योजनाओं में सुधार किए गए हैं। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जनता की समस्याओं को सुनने के लिए समय निकालें और उनके प्रति संवेदनशील रहें। नितीश कुमार के अनुसार, एक संवेदनशील नौकरशाह ही बिहार जैसे विशाल और विविधतापूर्ण राज्य में सफल प्रशासनिक सुधार ला सकता है।

सात निश्चय और आत्मनिर्भर बिहार: युवा ब्यूरोक्रेट्स को मिला भविष्य का रोडमैप

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने बिहार की फ्लैगशिप योजनाओं, विशेषकर ‘सात निश्चय-2’ के कार्यान्वयन पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर बिहार के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए ‘सात निश्चय’ की योजनाओं को पूरी पारदर्शिता और गति के साथ लागू करना नए अधिकारियों की प्राथमिकता होनी चाहिए। चाहे वह हर घर नल का जल हो, पक्की नाली-गली हो, या युवाओं को कौशल विकास के माध्यम से सशक्त बनाना हो, इन सभी क्षेत्रों में नई सोच और तकनीक के इस्तेमाल की गुंजाइश है। नितीश कुमार ने अधिकारियों से कहा कि वे इन योजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली तकनीकी और प्रशासनिक बाधाओं को दूर करने के लिए नवाचार (innovation) का सहारा लें। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार के पास संसाधनों की कमी नहीं है, बस जरूरत इस बात की है कि अधिकारी उन संसाधनों का सही और समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित करें ताकि बिहार की प्रगति की रफ्तार को और तेज किया जा सके।

सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जंग: शराबबंदी और दहेज प्रथा पर अधिकारियों की जवाबदेही

नितीश कुमार ने विकास के साथ-साथ सामाजिक सुधारों को भी प्रशासनिक जिम्मेदारी का अभिन्न अंग बताया। उन्होंने अधिकारियों को याद दिलाया कि बिहार में शराबबंदी कानून केवल एक कानूनी प्रावधान नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक क्रांति है जिसने लाखों परिवारों की जिंदगी बदल दी है। उन्होंने 2024 बैच के अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे अपने कार्यक्षेत्र में शराबबंदी को कड़ाई से लागू करना सुनिश्चित करें और किसी भी स्तर पर ढिलाई न बरतें। इसके साथ ही, बाल विवाह और दहेज प्रथा जैसी कुरीतियों के खिलाफ जन जागरूकता पैदा करने में भी अधिकारियों को अग्रणी भूमिका निभानी होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक सशक्त बिहार के लिए स्वस्थ और शिक्षित समाज का होना अनिवार्य है, और इसमें प्रशासनिक अधिकारियों का नेतृत्व बहुत मायने रखता है। उन्होंने कहा कि जब समाज बदलता है, तभी विकास के असली मायने सिद्ध होते हैं।

अनुभव और ऊर्जा का मेल: मुख्य सचिव और वरिष्ठ अधिकारियों ने भी साझा किए सुझाव

इस महत्वपूर्ण बैठक में मुख्यमंत्री के अलावा राज्य के मुख्य सचिव, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। वरिष्ठ अधिकारियों ने 2024 बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों को बिहार की प्रशासनिक बारीकियों और जिले में काम करने के दौरान आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों के बारे में बताया। मुख्य सचिव ने कहा कि युवा अधिकारियों की ऊर्जा और वरिष्ठों का अनुभव मिलकर बिहार को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकता है। उन्होंने नए आईएएस अधिकारियों को सलाह दी कि वे अपने वरिष्ठों से सीखें और जिला प्रशासन के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करें। बैठक में यह भी बताया गया कि बिहार में प्रशासनिक अधिकारियों को निर्णय लेने की पूरी स्वतंत्रता दी जाती है, बशर्ते वे नियम-सम्मत और जनहित में हों। वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी ने इस सत्र को एक व्यापक शैक्षणिक और रणनीतिक मंच बना दिया।

चुनौतियां और अवसर: बाढ़ प्रबंधन और आपदा में अधिकारियों की भूमिका पर चर्चा

बिहार की भौगोलिक चुनौतियों का जिक्र करते हुए नितीश कुमार ने बाढ़ प्रबंधन और आपदा राहत कार्यों में अधिकारियों की सक्रियता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि बिहार का एक बड़ा हिस्सा हर साल प्राकृतिक आपदाओं का सामना करता है। ऐसे में एक आईएएस अधिकारी की असली परीक्षा आपदा के समय ही होती है। मुख्यमंत्री ने 2026 की आगामी मानसून चुनौतियों का हवाला देते हुए नए अधिकारियों को मानसिक रूप से तैयार रहने को कहा। उन्होंने कहा कि आपदा के समय त्वरित निर्णय लेना और प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाना सबसे बड़ी सेवा है। नितीश कुमार ने अधिकारियों को तकनीक के इस्तेमाल से आपदा प्रबंधन को और अधिक सटीक बनाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि बिहार में चुनौतियां बहुत हैं, लेकिन ये चुनौतियां ही एक अधिकारी को बेहतरीन लीडर के रूप में गढ़ती हैं।

​** Land of Buddha and Mahavira: ऐतिहासिक विरासत को संजोने का मिला आह्वान**

बैठक के समापन की ओर बढ़ते हुए नितीश कुमार ने बिहार की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आप उस धरती पर सेवा करने आए हैं जिसने दुनिया को लोकतंत्र का पहला पाठ पढ़ाया और जहां बुद्ध व महावीर जैसे महापुरुषों ने शांति व अहिंसा का संदेश दिया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि वे बिहार के स्वाभिमान और गौरव को ध्यान में रखकर काम करें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि 2024 बैच के ये ऊर्जावान अधिकारी अपनी कार्यकुशलता और ईमानदारी से बिहार की छवि को और अधिक उज्ज्वल करेंगे। ‘संकल्प’ से बाहर निकलते समय युवा अधिकारियों के चेहरों पर एक नई जिम्मेदारी का अहसास और मुख्यमंत्री के विजन को धरातल पर उतारने का उत्साह साफ देखा जा सकता था। यह बैठक बिहार के प्रशासनिक गलियारों में एक नई शुरुआत के रूप में दर्ज हो गई है।

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