
पटना/वैशाली/बेगूसराय: बिहार बोर्ड परीक्षा में इस बार मेहनत, संघर्ष और लगन की प्रेरणादायक कहानियां सामने आई हैं। वैशाली जिले की ने 492 अंक हासिल कर राज्य में टॉप कर इतिहास रच दिया, वहीं बेगूसराय की 489 अंकों के साथ सेकेंड टॉपर बनीं।
रोज 11 घंटे पढ़ाई, फिर मिली सफलता
वैशाली के चेहरा कलां प्रखंड की रहने वाली सबरीन परवीन ने अपनी सफलता का श्रेय कड़ी मेहनत और अनुशासन को दिया है।
- रोजाना 10 से 11 घंटे पढ़ाई
- लगातार सेल्फ स्टडी और रिवीजन
- सीमित संसाधनों में भी लक्ष्य पर फोकस
उनकी मेहनत का नतीजा रहा कि उन्होंने 500 में से 492 अंक हासिल कर राज्य में टॉप किया।
पिता चलाते हैं टायर की दुकान
सबरिन के पिता पश्चिम बंगाल के रामपुरहाट में टायर की छोटी दुकान चलाते हैं। कम आमदनी के बावजूद उन्होंने अपनी बेटियों की पढ़ाई में कभी कमी नहीं आने दी।
मां अंगूरी देवी ने भी घर की जिम्मेदारियों के साथ-साथ बेटी को पढ़ाई के लिए हर संभव सहयोग दिया। तीन बहनों में सबसे बड़ी सबरीन शुरू से ही पढ़ाई में मेधावी रही हैं।
पुष्पांजलि के साथ साझा किया टॉप स्थान
इस बार टॉप स्थान पर सबरीन अकेली नहीं रहीं।
ने भी 492 अंक (98.4%) हासिल कर संयुक्त रूप से पहला स्थान प्राप्त किया।
दोनों छात्राओं की सफलता ने बिहार के शिक्षा जगत में नई मिसाल पेश की है।
इमाम की बेटी बनी सेकेंड टॉपर
बेगूसराय की नाहिद सुल्तान ने 489 अंक हासिल कर पूरे राज्य में दूसरा स्थान प्राप्त किया।
- रोजाना 6-7 घंटे सेल्फ स्टडी
- ऑनलाइन क्लास और प्राइवेट ट्यूशन का सहारा
- इंटरव्यू और तैयारी में शानदार प्रदर्शन
नाहिद के पिता बेंगलुरु में मस्जिद के इमाम हैं, जबकि उनकी मां गृहिणी हैं।
डॉक्टर बनकर करना चाहती हैं सेवा
नाहिद का सपना डॉक्टर बनना है। उनका कहना है कि कोरोना काल में लोगों को इलाज के लिए संघर्ष करते देखा, जिससे प्रेरित होकर उन्होंने मेडिकल फील्ड में जाने का फैसला किया।
वह आगे चलकर समाज सेवा और मरीजों की मदद करना चाहती हैं।
परिवार और गांव में खुशी का माहौल
दोनों छात्राओं की सफलता से उनके परिवार, स्कूल और गांव में जश्न का माहौल है।
- मिठाइयां बांटी गईं
- बधाइयों का तांता लगा
- पूरे इलाके में गर्व का माहौल
बिहार बोर्ड के इस रिजल्ट ने एक बार फिर साबित कर दिया कि मेहनत, लगन और सही दिशा में किया गया प्रयास किसी भी मुश्किल को पार कर सकता है। सबरीन परवीन और नाहिद सुल्तान की सफलता उन लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं।


