बिहटा में ‘घरेलू गैस’ के व्यवसायिक खेल पर प्रशासन का कड़ा प्रहार; होटल में छापेमारी के दौरान तीन सिलेंडर और भट्ठियां जब्त; किस्टो गुप्ता पर एफआईआर के साथ सप्लाई इंस्पेक्टर की बड़ी कार्रवाई

समाचार के मुख्य बिंदु: चूल्हे की आग में सुलगता ‘कालाबाज़ारी’ का बड़ा नेटवर्क

  • संयुक्त छापेमारी: बिहटा और नौबतपुर के आपूर्ति पदाधिकारियों ने गुप्त सूचना के आधार पर एक स्थानीय होटल में अचानक दस्तक दी।
  • बरामदगी: छापेमारी स्थल से तीन घरेलू एलपीजी सिलेंडर, दो बड़ी भट्ठियां और घरेलू उपयोग वाले चूल्हे जब्त किए गए।
  • कानूनी कार्रवाई: होटल मालिक किस्टो गुप्ता के खिलाफ बिहटा थाने में आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
  • प्रशासनिक चेतावनी: थानाप्रभारी ने स्पष्ट किया है कि घरेलू गैस के व्यवसायिक उपयोग और इसकी कालाबाजारी के खिलाफ यह अभियान अब और तेज होगा।
  • VOB इनसाइट: राजधानी पटना के बाहरी इलाकों, जैसे बिहटा और नौबतपुर में, घरेलू गैस का होटलों में अवैध उपयोग एक पुराना नासूर है। कमर्शियल सिलेंडर की तुलना में घरेलू सिलेंडर सस्ता पड़ता है, और इसी मुनाफे के चक्कर में होटल संचालक न केवल सरकारी राजस्व को चपत लगा रहे हैं, बल्कि घनी आबादी वाले इलाकों में बड़े हादसे को भी दावत दे रहे हैं। आपूर्ति पदाधिकारियों की यह संयुक्त कार्रवाई दर्शाती है कि अब ‘ऊपरी पहुंच’ और ‘स्थानीय सांठगांठ’ का दौर खत्म हो रहा है। बिहटा जैसे औद्योगिक हब बन रहे शहर के लिए यह सुरक्षा की दृष्टि से भी अनिवार्य कदम है।

बिहटा (पटना) | 30 मार्च, 2026

​पटना जिले का बिहटा ब्लॉक, जो इन दिनों अपने बढ़ते शहरीकरण और औद्योगिक गतिविधियों के लिए जाना जा रहा है, सोमवार को प्रशासनिक सरगर्मी का केंद्र बना रहा। बिहटा और पड़ोसी ब्लॉक नौबतपुर के आपूर्ति पदाधिकारियों की एक विशेष टीम ने संयुक्त रूप से नगर के एक चर्चित होटल में छापेमारी कर घरेलू गैस के अवैध कारोबार का भंडाफोड़ किया। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, यह कार्रवाई केवल सिलेंडरों की जब्ती तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन संचालकों के लिए एक सीधा संदेश है जो घरेलू सब्सिडी वाले ईंधन का उपयोग अपने निजी व्यवसाय को चमकाने के लिए कर रहे हैं।

छापेमारी की पूरी दास्तान: नौबतपुर और बिहटा की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’

​सोमवार की सुबह जब होटल में ग्राहकों की आवाजाही शुरू हुई थी, तभी बिहटा और नौबतपुर के आपूर्ति पदाधिकारियों ने पुलिस बल के साथ वहां घेराबंदी कर दी। होटल के भीतर जैसे ही टीम ने प्रवेश किया, रसोई घर में चल रही गतिविधियों ने कालाबाजारी की पोल खोल दी। आपूर्ति विभाग को लंबे समय से शिकायत मिल रही थी कि होटल मालिक किस्टो गुप्ता द्वारा व्यवसायिक सिलेंडरों के बजाय घरेलू गैस सिलेंडरों का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जा रहा है।

​जांच के दौरान टीम ने पाया कि रसोई में खाना पकाने के लिए तीन नीले रंग के बजाय लाल रंग के घरेलू सिलेंडर (14.2 किलोग्राम वाले) उपयोग में लाए जा रहे थे। इसके अलावा, वहां दो बड़ी भट्ठियां भी जल रही थीं जो घरेलू उपयोग के मानकों के बिल्कुल विपरीत थीं। प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से तीनों सिलेंडर, दोनों भट्ठियां और घरेलू उपयोग वाले चूल्हों को जब्त कर लिया। इस दौरान होटल में अफरा-तफरी का माहौल रहा और आसपास के अन्य दुकानदार भी अपनी दुकानों के शटर गिराकर खिसकते नजर आए।

किस्टो गुप्ता पर कानूनी शिकंजा: थाने में दर्ज हुई प्राथमिकी

​कार्रवाई के बाद आपूर्ति पदाधिकारी ने जब्त सामान की सूची तैयार की और होटल मालिक किस्टो गुप्ता को नामजद करते हुए बिहटा थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए किस्टो गुप्ता के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है।

​आपूर्ति विभाग के अधिकारियों का कहना है कि घरेलू गैस का उपयोग केवल घरों में भोजन बनाने के लिए किया जाना चाहिए। इसका व्यवसायिक केंद्रों जैसे होटलों, रेस्टोरेंट्स या हलवाई की दुकानों में उपयोग करना कानूनन अपराध है। यह कृत्य ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम’ की विभिन्न धाराओं के तहत आता है, जिसमें भारी जुर्माने के साथ-साथ जेल की सजा का भी प्रावधान है। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि किस्टो गुप्ता को ये घरेलू सिलेंडर नियमित रूप से कौन सा गैस एजेंसी या बिचौलिया सप्लाई कर रहा था।

अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर दोहरा प्रहार: क्यों खतरनाक है यह खेल?

​होटल और ढाबों में घरेलू गैस का उपयोग करना केवल राजस्व की चोरी नहीं है, बल्कि यह एक बड़ा सुरक्षा जोखिम भी है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) ने विशेषज्ञों से बात की, जिसमें कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए:

  1. राजस्व की हानि: कमर्शियल सिलेंडर (19 किलो) की कीमत घरेलू सिलेंडर की तुलना में काफी अधिक होती है। होटल संचालक सब्सिडी वाले घरेलू सिलेंडर का उपयोग कर सरकार की उस योजना को नुकसान पहुँचाते हैं जो गरीब परिवारों के लिए बनाई गई है।
  2. हादसे का डर: घरेलू रेगुलेटर और पाइप कमर्शियल भट्ठियों के उच्च दबाव (High Pressure) को झेलने के लिए नहीं बने होते। बिहटा जैसे भीड़भाड़ वाले बाजारों में घरेलू सिलेंडर के फटने से जान-माल का बड़ा नुकसान हो सकता है।
  3. कालाबाजारी को बढ़ावा: जब होटलों में घरेलू सिलेंडर खपने लगते हैं, तो बाजार में आम उपभोक्ताओं के लिए सिलेंडरों की किल्लत हो जाती है, जिससे ब्लैक मार्केटिंग करने वालों की चांदी हो जाती है।

बिहटा पुलिस का रुख: “जारी रहेगी धरपकड़”

​बिहटा थानाप्रभारी ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि घरेलू गैस की कालाबाजारी को लेकर जिला प्रशासन काफी सख्त है। उन्होंने कहा, “थाना क्षेत्र के अंतर्गत जितने भी होटल और रेस्टोरेंट हैं, उन्हें पहले ही चेतावनी दी जा चुकी है कि वे केवल कमर्शियल सिलेंडरों का ही उपयोग करें। किस्टो गुप्ता के होटल में हुई छापेमारी केवल शुरुआत है। हम आपूर्ति विभाग के साथ मिलकर एक बड़ी सूची तैयार कर रहे हैं और आने वाले दिनों में बिहटा के अन्य इलाकों में भी इसी तरह की कार्रवाई देखने को मिलेगी।”

​पुलिस का यह भी कहना है कि वे गैस एजेंसियों के डिलीवरी मैन पर भी नजर रख रहे हैं। अक्सर देखा गया है कि डिलीवरी मैन थोड़े से अतिरिक्त मुनाफे के चक्कर में घरेलू उपभोक्ताओं का सिलेंडर होटलों में बेच देते हैं। इस सिंडिकेट को तोड़ना पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

 

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