
समाचार के मुख्य बिंदु: हाशिए के समाज से निकलकर मेधा के शिखर तक का सफर
- ऐतिहासिक प्रदर्शन: अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग द्वारा संचालित डॉ. भीमराव अम्बेडकर आवासीय विद्यालयों ने वर्ष 2026 की मैट्रिक परीक्षा में 95.40% की भारी सफलता दर दर्ज की है.
- आंकड़ों की बाजीगरी: जहाँ बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) का कुल पास प्रतिशत 81.79% रहा, वहीं विभाग के इन आवासीय विद्यालयों ने 95.40% अंक के साथ राज्य के औसत को काफी पीछे छोड़ दिया है.
- प्रथम श्रेणी का वर्चस्व: कुल सफल 1805 विद्यार्थियों में से 923 छात्र-छात्राओं (48.78%) ने प्रथम श्रेणी में बाजी मारी है.
- विभागीय टॉपर: पटना जिले के पुनपुन स्थित अम्बेडकर आवासीय विद्यालय के छात्र ने 95.80% अंक प्राप्त कर विभाग में सर्वोच्च स्थान पाया है.
- 100% का कीर्तिमान: राज्य के 72 आवासीय विद्यालयों में से 31 विद्यालयों ने शत-प्रतिशत सफलता हासिल की है.
- मंत्री का संबोधन: विभाग के मंत्री लखेंद्र कुमार रोशन ने इस परिणाम को सामाजिक न्याय और शैक्षणिक सशक्तीकरण की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर बताया है.
- VOB इनसाइट: यह परिणाम केवल अंकों का खेल नहीं है, बल्कि बिहार के उन वंचित वर्गों के उदय की कहानी है जो संसाधनों के अभाव के बावजूद मुख्यधारा की शिक्षा में अपनी जगह बना रहे हैं। आवासीय विद्यालयों में उपलब्ध कराई जा रही निःशुल्क और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि सही वातावरण मिले, तो मेधा किसी वर्ग या विशेष आर्थिक स्थिति की मोहताज नहीं होती। पुनपुन के छात्र का प्रदर्शन यह बताता है कि ग्रामीण परिवेश के ये विद्यालय अब निजी संस्थानों को कड़ी टक्कर दे रहे हैं।
पटना | 29 मार्च, 2026
बिहार की मेधा ने एक बार फिर पूरी दुनिया को अपनी ताकत का अहसास कराया है, लेकिन इस बार यह गूँज उन विद्यालयों से आई है जो समाज के अंतिम पायदान पर खड़े बच्चों को भविष्य के लिए तैयार कर रहे हैं। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग के अधीन संचालित डॉ. भीमराव अम्बेडकर आवासीय विद्यालयों ने मैट्रिक परीक्षा 2026 में जो कीर्तिमान स्थापित किया है, उसने शिक्षाविदों और नीति निर्माताओं को अचंभित कर दिया है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की विशेष पड़ताल के अनुसार, इन विद्यालयों का प्रदर्शन बिहार के सामान्य शैक्षणिक प्रदर्शन से कहीं अधिक ऊँचा रहा है, जो विभाग के समर्पण और विद्यार्थियों की जीवटता का जीता-जागता प्रमाण है।
सफलता का गणित: जब आंकड़े खुद अपनी कहानी कहने लगें
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा रविवार को जारी किए गए परिणामों में डॉ. भीमराव अम्बेडकर आवासीय विद्यालयों का रिपोर्ट कार्ड अत्यंत गौरवशाली रहा है। विभाग द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष इन आवासीय विद्यालयों से कुल 1892 विद्यार्थी परीक्षा के महाकुंभ में सम्मिलित हुए थे। इनमें से 1805 विद्यार्थियों ने अपनी कड़ी मेहनत और शिक्षकों के मार्गदर्शन के दम पर सफलता का परचम लहराया है।
इस प्रदर्शन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सफलता दर है। जहाँ पूरे बिहार बोर्ड का औसत परिणाम 81.79% पर सिमट गया, वहीं अम्बेडकर आवासीय विद्यालयों ने 95.40% की जबरदस्त सफलता दर हासिल कर एक नई लकीर खींच दी है। यह अंतर करीब 13.61% का है, जो यह स्पष्ट करता है कि इन विशिष्ट विद्यालयों में शिक्षण की पद्धति और निगरानी की व्यवस्था कितनी सुदृढ़ है।
प्रथम श्रेणी का दबदबा: गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की प्रतिध्वनि
सफलता केवल पास होने तक सीमित नहीं रही, बल्कि अंकों की गुणवत्ता ने भी सबको प्रभावित किया है। विभाग के आंकड़े बताते हैं कि अम्बेडकर स्कूलों के विद्यार्थियों ने उच्च अंकों के साथ परीक्षा उत्तीर्ण की है:
- प्रथम श्रेणी (1st Division): 923 विद्यार्थियों (48.78%) ने इस श्रेणी में स्थान पाकर अपनी विशिष्टता साबित की है।
- द्वितीय श्रेणी (2nd Division): 667 विद्यार्थियों (35.25%) ने सफलता के इस पायदान को छुआ है।
- तृतीय श्रेणी (3rd Division): केवल 215 विद्यार्थी (11.36%) इस श्रेणी में रहे।
इन आंकड़ों का विश्लेषण करें तो पता चलता है कि लगभग आधे विद्यार्थी प्रथम श्रेणी में पास हुए हैं, जो इन विद्यालयों में दी जा रही शैक्षणिक सामग्री और विशेष कोचिंग व्यवस्था की सफलता को रेखांकित करता है।
पुनपुन की मेधा और 100% का जादुई आंकड़ा
इस वर्ष की मेधा सूची में पटना जिला के पुनपुन स्थित अम्बेडकर आवासीय विद्यालय ने अपनी एक अलग पहचान बनाई है। यहाँ के एक विद्यार्थी ने 95.80% अंक प्राप्त कर पूरे विभाग में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। यह स्कोर बिहार बोर्ड के कुल टॉपर (98.4%) के काफी करीब है, जो यह दर्शाता है कि विभागीय स्तर पर की जा रही मेहनत अब राज्य स्तरीय टॉपर्स की श्रेणी तक पहुँच रही है।
इतना ही नहीं, राज्य भर में संचालित कुल 72 आवासीय विद्यालयों में से 31 विद्यालयों ने 100% सफलता दर हासिल कर एक सामूहिक कीर्तिमान स्थापित किया है। वहीं, एक विद्यालय ने तो एक कदम और आगे बढ़ते हुए अपने यहाँ के शत-प्रतिशत विद्यार्थियों को प्रथम श्रेणी में पास कराकर एक नया प्रतिमान गढ़ा है।
लखेंद्र कुमार रोशन का विजन: “सशक्तीकरण का नया मील का पत्थर”
इस शानदार उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए विभाग के मंत्री लखेंद्र कुमार रोशन ने इसे एक सामूहिक जीत करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह परिणाम विद्यार्थियों की अथक मेहनत, शिक्षकों के अटूट समर्पण और विभाग द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण का ही प्रतिफल है।
लखेंद्र कुमार रोशन के अनुसार, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों के लिए शिक्षा ही वह एकमात्र औजार है जिससे वे सामाजिक और आर्थिक बंधनों को तोड़ सकते हैं। यह परिणाम उसी शैक्षणिक सशक्तीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने यह भी विश्वास दिलाया कि विभाग भविष्य में विद्यार्थियों को और भी बेहतर संसाधन, आधुनिक लैब, पुस्तकालय और करियर काउंसलिंग के अवसर उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। विभाग के वरीय पदाधिकारियों ने भी इस सफलता का श्रेय विद्यालय प्रबंधन और बच्चों की लगन को दिया है।


