विक्रमशिला सेतु के पीलर की ‘फॉल्स दीवार’ गिरने से हड़कंप! इंजीनियरों की टीम ने किया मुआयना; बोले— “पुल के स्ट्रक्चर को कोई खतरा नहीं, वो बेकार हिस्सा था”

HIGHLIGHTS: भागलपुर की ‘लाइफलाइन’ पर सस्पेंस खत्म; निर्माण निगम ने दी ‘ऑल क्लियर’ रिपोर्ट

  • जांच पड़ताल: विक्रमशिला सेतु के नीचे एक दीवार गिरने की खबर के बाद पुल निर्माण निगम के अभियंताओं ने किया सघन निरीक्षण।
  • इंजीनियर का बयान: वरीय परियोजना अभियंता ज्ञान चंद्र दास ने स्पष्ट किया—पुल के मुख्य ढांचे (Structure) में कोई खराबी नहीं है।
  • क्या है ‘फॉल्स दीवार’: निर्माण के समय पानी का दबाव कम करने के लिए बनाया गया था अस्थाई ढांचा, जो पुल का हिस्सा नहीं है।
  • अगला कदम: जर्जर हो चुकी अन्य बेकार दीवारों को भी अब तोड़कर हटाया जाएगा ताकि कोई भ्रम न रहे।

भागलपुर | 20 मार्च, 2026

​भागलपुर की धड़कन कहे जाने वाले विक्रमशिला सेतु को लेकर पिछले कुछ घंटों से चल रही अटकलों पर विराम लग गया है। पुल के नीचे एक दीवार के नदी में समा जाने के बाद लोग डरे हुए थे, लेकिन शुक्रवार को पुल निर्माण निगम के अभियंताओं की टीम ने मौके पर पहुँचकर स्थिति स्पष्ट कर दी है। राहत की खबर यह है कि पुल पूरी तरह सुरक्षित है और जो हिस्सा गिरा है, उसका पुल की मजबूती से कोई लेना-देना नहीं है।

“पुल ‘फिट’ है, वो तो सिर्फ एक सपोर्ट था”

​निरीक्षण के बाद बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के वरीय परियोजना अभियंता ज्ञान चंद्र दास ने तकनीकी बारीकियों को साझा किया:

  • अस्थाई ढांचा: निर्माण के दौरान पानी के तेज बहाव और दबाव को नियंत्रित करने के लिए ‘फॉल्स दीवार’ (False Wall) खड़ी की जाती है।
  • हटाने में देरी: कायदे से पुल बनने के बाद इन दीवारों को तोड़ देना चाहिए था, लेकिन किन्हीं कारणों से ये वहीं रह गईं।
  • स्वैच्छिक गिरावट: वर्षों पुराने इस अस्थाई ढांचे में से एक दीवार कमजोर होकर गिर गई। अब विभाग ने तय किया है कि जो भी ऐसी दीवारें बची हैं, उन्हें विधिवत तोड़कर हटा दिया जाएगा।

VOB का नजरिया: क्या ‘पुराना मलबा’ बन रहा है अफवाहों की वजह?

​विक्रमशिला सेतु भागलपुर के लिए सामरिक और आर्थिक रूप से अति-महत्वपूर्ण है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि इंजीनियरों की त्वरित सफाई ने बड़ी अफवाह को फैलने से रोक लिया।

​हालांकि, यहाँ एक बड़ा सवाल ‘पुल निर्माण निगम’ की कार्यशैली पर भी है। अगर निर्माण पूरा होने के बाद उन फॉल्स दीवारों को तोड़ना जरूरी था, तो उन्हें वर्षों तक वैसे ही क्यों छोड़ दिया गया? ऐसी लापरवाही ही जनता के बीच ‘पुल गिरने’ जैसा डर पैदा करती है। पुल सुरक्षित है, यह अच्छी बात है, लेकिन भविष्य में निर्माण के बाद ‘साइट क्लीनिंग’ (मलबा हटाना) को प्राथमिकता देनी चाहिए ताकि गंगा की धारा भी साफ रहे और लोगों का दिल भी।

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