पटना: बिहार में राज्यसभा चुनाव के बाद सियासी हलचल लगातार तेज होती जा रही है। वोटिंग के दौरान गैरहाजिर रहने वाले कांग्रेस विधायक अब खुलकर सामने आए हैं और उन्होंने अपने फैसले के पीछे की वजह सार्वजनिक कर दी है। उन्होंने साफ कहा कि उम्मीदवार चयन को लेकर असंतोष के कारण उन्होंने मतदान नहीं किया।
उम्मीदवार चयन पर जताई नाराजगी
सुरेंद्र कुशवाहा ने प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार तय करते समय सामाजिक संतुलन का ध्यान नहीं रखा गया। उनका आरोप है कि पिछड़ा, दलित, महादलित और अल्पसंख्यक वर्ग की पूरी तरह अनदेखी की गई, जबकि इन वर्गों का प्रतिनिधित्व जरूरी था।
उन्होंने कहा, “उम्मीदवार हम पर थोप दिया गया। अगर सभी वर्गों को ध्यान में रखकर चयन होता, तो हम जरूर वोट करते।”
‘हमसे कोई राय नहीं ली गई’
कुशवाहा ने यह भी आरोप लगाया कि प्रदेश नेतृत्व ने इस महत्वपूर्ण निर्णय में विधायकों से कोई सलाह-मशविरा नहीं किया। उन्होंने कहा कि उन्हें कभी बैठक के लिए नहीं बुलाया गया और न ही उनकी राय जानने की कोशिश की गई। इससे उन्हें लगा कि पार्टी में उनकी भूमिका को नजरअंदाज किया जा रहा है।
धनबल के आरोपों को किया खारिज
वोटिंग से दूरी को लेकर उठ रहे सवालों पर उन्होंने स्पष्ट किया कि इस फैसले का पैसे या किसी दबाव से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने दो टूक कहा कि “हमें कोई खरीद नहीं सकता। हम अपने सिद्धांतों पर चलते हैं और कांग्रेस के साथ हैं।”
कार्रवाई की चेतावनी पर भी दिया जवाब
प्रदेश कांग्रेस द्वारा कार्रवाई की संभावनाओं पर कुशवाहा ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि यदि उनके खिलाफ कोई कदम उठाया गया, तो वे इसका जवाब देंगे। उन्होंने संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर वे पूरे मामले को विस्तार से सार्वजनिक कर सकते हैं।
‘कांग्रेस के साथ हैं, लेकिन सुधार जरूरी’
उन्होंने यह भी साफ किया कि वे पार्टी के खिलाफ नहीं हैं और कांग्रेस के साथ बने रहेंगे। हालांकि, उन्होंने प्रदेश नेतृत्व को सलाह दी कि वह विधायकों के साथ संवाद बढ़ाए और निर्णय लेने की प्रक्रिया को अधिक सहभागी बनाए।
चुनाव परिणाम पर पड़ा असर
गौरतलब है कि बिहार राज्यसभा चुनाव में महागठबंधन को हार का सामना करना पड़ा, जबकि एनडीए ने सभी सीटों पर जीत दर्ज की। कई विधायकों के मतदान से दूरी बनाने का सीधा असर चुनाव परिणाम पर पड़ा।
पार्टी के भीतर बढ़ी खींचतान
इस पूरे घटनाक्रम ने कांग्रेस के अंदर चल रही अंदरूनी खींचतान को उजागर कर दिया है। लगातार सामने आ रहे बयानों से यह साफ है कि पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ रहा है।
आगे क्या होगा?
अब सभी की नजर कांग्रेस नेतृत्व के अगले कदम पर टिकी है। क्या पार्टी अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगी या फिर अंदरूनी मतभेदों को सुलझाने की कोशिश करेगी—यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। फिलहाल, इस मुद्दे ने बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।


