‘क्यों नहीं डाला वोट?’ कांग्रेस विधायक मनोज विश्वास का बड़ा बयान, बोले—नेता का सम्मान नहीं हुआ

पटना/अररिया: बिहार में हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस बीच फारबिसगंज से कांग्रेस विधायक ने वोट नहीं डालने को लेकर चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि यह फैसला उन्होंने अपने वरिष्ठ नेता को उचित सम्मान नहीं मिलने के विरोध में लिया।

‘सम्मान नहीं मिला, इसलिए मतदान से दूरी’
मीडिया से बातचीत में मनोज विश्वास ने कहा कि पार्टी के भीतर उनके नेता की अनदेखी की गई, जो उन्हें स्वीकार नहीं था। इसी कारण उन्होंने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। उन्होंने यह भी बताया कि राजेश राम ने उन्हें स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने की अनुमति दी थी, जिसके बाद उन्होंने यह कदम उठाया।

चुनाव परिणाम पर पड़ा असर
बिहार राज्यसभा चुनाव में एनडीए ने सभी सीटों पर जीत हासिल की, जबकि महागठबंधन को हार का सामना करना पड़ा। इस दौरान कांग्रेस के तीन और राजद के एक विधायक द्वारा वोट न डालने से विपक्ष की स्थिति कमजोर हो गई और इसका सीधा असर नतीजों पर पड़ा।

‘गद्दारी नहीं, सिद्धांत का सवाल’
मनोज विश्वास ने अपने फैसले को लेकर स्पष्ट किया कि उन्होंने पार्टी के खिलाफ कोई गद्दारी नहीं की है। उन्होंने कहा कि उनका यह कदम केवल सम्मान और सिद्धांत से जुड़ा था। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी अगर उनके खिलाफ कोई कार्रवाई करती है तो वह उसे स्वीकार करने के लिए तैयार हैं।

खरीद-फरोख्त के आरोपों से इनकार
उन्होंने इस पूरे प्रकरण को लेकर लगाए जा रहे आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि इसमें पैसे या किसी तरह के दबाव का कोई सवाल ही नहीं है। उनका कहना था कि यह पूरी तरह आत्मसम्मान और नेतृत्व के सम्मान से जुड़ा मुद्दा है।

उम्मीदवार चयन पर सवाल
विधायक ने उम्मीदवार चयन प्रक्रिया पर भी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि यदि किसी अन्य उम्मीदवार, जैसे हिना शहाब, को मौका दिया जाता तो बेहतर परिणाम मिल सकते थे। उन्होंने यह भी कहा कि अंतिम समय में प्रत्याशी घोषित होने से कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ा।

‘क्रॉस वोटिंग नहीं की’
मनोज विश्वास ने साफ किया कि उन्होंने किसी के पक्ष में क्रॉस वोटिंग नहीं की, बल्कि केवल मतदान से दूरी बनाई। उनके अनुसार, यह विरोध जताने का लोकतांत्रिक तरीका था, जिससे पार्टी नेतृत्व तक संदेश पहुंच सके।

बिहार की राजनीति में बढ़ी सरगर्मी
इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है। कांग्रेस के अंदर भी इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि पार्टी इस मामले में क्या रुख अपनाती है और आने वाले दिनों में इसका राजनीतिक समीकरणों पर क्या असर पड़ता है।

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