
खबर के मुख्य बिंदु:
- बड़ी स्ट्राइक: भोरे थाना क्षेत्र के रघुनाथपुर गांव में पुलिस और प्रशासन की संयुक्त छापेमारी।
- बरामदगी: करीब 4 धुर जमीन में अवैध रूप से उगाई गई लाखों की अफीम की फसल नष्ट।
- पुलिस एक्शन: एसपी विनय तिवारी के निर्देश पर SDM और SDPO ने खुद संभाली कमान।
- हिरासत: मौके से एक विधि-विरुद्ध बालक (Juvenile) निरुद्ध; मुख्य सरगनाओं की तलाश जारी।
गोपालगंज: बिहार में शराबबंदी के बीच अब नशे के सौदागरों ने जमीन के अंदर ‘खतरनाक खेल’ शुरू कर दिया है। गोपालगंज पुलिस ने एक गुप्त सूचना के आधार पर शनिवार को अवैध अफीम की खेती का बड़ा पर्दाफाश किया है। भोरे थाना क्षेत्र के रघुनाथपुर गांव में गेहूं और सरसों की आड़ में उगाई जा रही लाखों रुपये की अफीम की फसल को प्रशासन ने मौके पर ही ट्रैक्टर चलवाकर जमींदोज कर दिया। इस कार्रवाई से इलाके के तस्करों में हड़कंप मच गया है।
खेतों में ‘सफेद जहर’: 4 धुर जमीन पर थी लाखों की फसल
पुलिस को सटीक जानकारी मिली थी कि रघुनाथपुर में अफीम की अवैध खेती की जा रही है। सूचना मिलते ही एसपी विनय तिवारी ने एक स्पेशल टीम का गठन किया।
- जॉइंट ऑपरेशन: हथुआ SDM अभिषेक कुमार चंदन और SDPO आनंद मोहन गुप्ता के नेतृत्व में पुलिस बल ने गांव में दबिश दी।
- तैयार थी फसल: जांच के दौरान करीब 4 धुर जमीन में अफीम के पौधे पूरी तरह लहलहा रहे थे और फल आने के कगार पर थे। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत लाखों रुपये बताई जा रही है।
- ऑन द स्पॉट एक्शन: प्रशासन ने बिना देर किए पूरी फसल को उखाड़कर नष्ट कर दिया ताकि इसका इस्तेमाल न हो सके।
एक बालक निरुद्ध, मास्टरमाइंड की तलाश
पुलिस ने मौके से एक विधि-विरुद्ध बालक को निरुद्ध किया है, जिससे पूछताछ कर यह पता लगाया जा रहा है कि इस अवैध धंधे का असली ‘रिमोट कंट्रोल’ किसके हाथ में है।
”नशीले पदार्थों के खिलाफ हमारा अभियान ‘जीरो टॉलरेंस’ पर आधारित है। रघुनाथपुर में अफीम की खेती पकड़ी गई है। हम उन सफेदपोश लोगों की पहचान कर रहे हैं जो परदे के पीछे से इस काले कारोबार को बढ़ावा दे रहे हैं। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।” — आनंद मोहन गुप्ता, SDPO, हथुआ
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गोपालगंज जैसे सीमावर्ती जिले में अफीम की खेती मिलना एक गंभीर चेतावनी है। तस्करों ने अब माल मंगाने के बजाय खुद उगाने का रास्ता चुन लिया है। 4 धुर जमीन भले ही छोटी लगे, लेकिन यह एक बड़े नेटवर्क की टेस्टिंग लैब हो सकती है। प्रशासन की सक्रियता काबिले तारीफ है, लेकिन जरूरत इस बात की है कि ग्रामीण इलाकों के चौकीदारों और स्थानीय खुफिया तंत्र को और मजबूत किया जाए ताकि ‘नशे की ये नर्सरी’ पनपने से पहले ही उखाड़ दी जाए।


