
खबर के मुख्य बिंदु:
- बड़ा हादसा: सूरत के पांडेसरा में साड़ी डाइंग कंपनी की केमिकल टंकी में गिरे 4 मजदूर।
- शहादत: रोहतास के शिवसागर निवासी सोनू कुमार पासवान की इलाज के दौरान मौत।
- गंभीर: करगहर और कोचस के तीन अन्य युवक अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे।
- लापरवाही: होली की छुट्टी में कराई जा रही थी सफाई; सुरक्षा मानकों की अनदेखी का आरोप।
सूरत/रोहतास: गुजरात के सूरत से बिहार के लिए एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। पांडेसरा स्थित एक साड़ी डाइंग-पेंटिंग कंपनी में केमिकल टंकी की सफाई के दौरान हुए हादसे में रोहतास जिले के चार प्रवासी मजदूर बुरी तरह झुलस गए। इस हादसे ने एक परिवार का चिराग बुझा दिया है, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। यह घटना एक बार फिर दूसरे राज्यों में काम कर रहे बिहारी मजदूरों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़ा कर रही है।
होली की छुट्टी में ‘खतरनाक’ ड्यूटी
जानकारी के अनुसार, कंपनी में होली की छुट्टी चल रही थी, लेकिन इसी दौरान केमिकल युक्त कचरे की टंकी की सफाई का काम निकाला गया।
- हादसा: सफाई के दौरान अचानक संतुलन बिगड़ने से चारों मजदूर जहरीले और ज्वलनशील केमिकल वाली टंकी में गिर गए।
- रेस्क्यू: वहां मौजूद अन्य साथियों ने कड़ी मशक्कत के बाद उन्हें बाहर निकाला, लेकिन तब तक केमिकल के तीखे प्रभाव से वे बुरी तरह झुलस चुके थे।
- अस्पताल: सभी को तुरंत अस्पताल पहुँचाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने एक को मृत घोषित कर दिया।
मृतक और घायलों की पहचान
नाम | पता (रोहतास) | स्थिति |
|---|---|---|
सोनू कुमार पासवान | वार्ड नंबर-7, शिवसागर | मृत |
अंकित कुमार | घोड़िया गांव, करगहर | गंभीर (इलाज जारी) |
संदीप कुमार | कपासिया गांव, कोचस | गंभीर (इलाज जारी) |
अमरेंद्र कुमार | कपासिया गांव, कोचस | गंभीर (इलाज जारी) |
परिजनों का फूटा गुस्सा: “सुरक्षा किट क्यों नहीं थी?”
हादसे की खबर मिलते ही रोहतास में मृतकों और घायलों के गांवों में कोहराम मच गया है। परिजनों का आरोप है कि कंपनी प्रबंधन ने बिना किसी सुरक्षा उपकरण (Safety Kit) के मजदूरों को मौत की टंकी में उतारा था। उन्होंने गुजरात प्रशासन और बिहार सरकार से दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और उचित मुआवजे की मांग की है।
VOB का नजरिया: कब तक ‘सस्ता’ रहेगा बिहारी मजदूर का खून?
सूरत की फैक्ट्रियों में बिहार के मजदूरों के साथ हादसों का सिलसिला थम नहीं रहा है। अक्सर कंपनियां लागत बचाने के चक्कर में सुरक्षा मानकों को ताक पर रख देती हैं। सोनू की मौत केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक ‘सिस्टमैटिक मर्डर’ की तरह है जहाँ गरीब की जान की कीमत कुछ हजार रुपये से ज्यादा नहीं समझी जाती। बिहार सरकार को चाहिए कि वह गुजरात सरकार से संपर्क साधकर पीड़ित परिवारों को न्याय और आर्थिक संबल दिलाए।


