होली के रंग में घुला मौत का ‘जहर’! सेप्टिक टैंक साफ करने उतरे पिता-पुत्र समेत 4 की मौत; गांव में पसरा सन्नाटा

खबर के मुख्य बिंदु (Highlights):

  • बड़ा हादसा: बोखरा प्रखंड के कुरहर गांव में शौचालय टंकी की सफाई के दौरान भीषण दुर्घटना।
  • मौत का तांडव: दम घुटने से पिता-पुत्र और दो भाइयों समेत एक ही परिवार के 4 लोगों की जान गई।
  • बचाव की जंग: एक को बचाने के चक्कर में एक-एक कर टैंक में उतरे थे 7 लोग, 3 की बची जान।
  • पुष्टि: एसपी अमित रंजन ने कहा— “जहरीली गैस और ऑक्सीजन की कमी बनी मौत की वजह।”

सीतामढ़ी: जहां पूरा बिहार बुधवार को होली के रंगों और फागुनी गीतों में सराबोर था, वहीं सीतामढ़ी जिले के बोखरा प्रखंड से एक ऐसी हृदयविदारक खबर सामने आई जिसने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया। कुरहर गांव में शौचालय की सेप्टिक टंकी की सफाई करना एक ही परिवार के लिए काल बन गया। इस हादसे में पिता-पुत्र समेत चार लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जिससे त्योहार की खुशियां मातम की चीखों में बदल गईं।

एक को बचाने की कोशिश… और बिछ गई 4 लाशें

​हादसे की शुरुआत मंगलवार शाम को हुई, जब कुरहर पंचायत (वार्ड 13) निवासी राजीव सहनी अपने घर के सेप्टिक टैंक की सफाई करने नीचे उतरे।

  • चेन रिएक्शन: टैंक के अंदर जमी विषैली गैस की वजह से राजीव बेहोश हो गए। उन्हें बचाने के लिए उनका 12 साल का मासूम बेटा कृष्ण कुमार अंदर कूदा, लेकिन वह भी गैस की चपेट में आ गया।
  • बढ़ता गया दायरा: भाई को बचाने के लिए रविंद्र सहनी और फिर चचेरे भाई विनय सहनी भी एक-एक कर टैंक में उतरते गए। गहराई अधिक होने और हवा की कमी के कारण सभी अचेत हो गए।
  • कुल शिकार: कुल 7 लोग इस गैस की चपेट में आए थे, जिनमें से ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत के बाद सभी को बाहर निकाला।

इलाज के दौरान तोड़ा दम: मृतकों की पहचान

​ग्रामीणों ने सभी को तुरंत बोखरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुँचाया, जहाँ से उन्हें सदर अस्पताल, सीतामढ़ी रेफर किया गया। बुधवार को इलाज के दौरान चार लोगों ने दम तोड़ दिया:

    1. राजीव सहनी (40 वर्ष): पिता
    2. कृष्ण कुमार (12 वर्ष): पुत्र (राजीव का बेटा)
    3. रविंद्र सहनी (30 वर्ष): भाई (लालू सहनी का बेटा)
    4. विनय सहनी (26 वर्ष): ममेरा भाई (रामबाबू का बेटा)

​”सेप्टिक टैंक की गहराई अधिक थी और अंदर पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं थी। जहरीली गैस के कारण दम घुटने से यह हादसा हुआ। पुलिस ने शवों का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया है।” — अमित रंजन, एसपी, सीतामढ़ी

 

गांव में ‘ठंडी’ रही होली, नहीं जला किसी के घर चूल्हा

​कुरहर गांव के वार्ड संख्या 12 और 13 में इस घटना के बाद से सन्नाटा पसरा है। एक ही परिवार के चार अर्थियां एक साथ उठने के मंजर ने हर किसी की आंखों को नम कर दिया। ग्रामीणों की तत्परता से तीन लोगों की जान तो बच गई, लेकिन इस परिवार ने अपने घर के चार मजबूत स्तंभों को खो दिया।

VOB का नजरिया: जानलेवा साबित हो रही है लापरवाही

​शौचालय की टंकियों में जहरीली गैस से होने वाली मौतें बिहार के लिए नई नहीं हैं। बिना किसी सुरक्षा उपकरण (Mask or Oxygen) के गहरे टैंकों में उतरना सुसाइड मिशन जैसा है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ नागरिकों से अपील करता है कि ऐसी सफाई के लिए विशेषज्ञों की सलाह लें और खुद की जान जोखिम में न डालें। प्रशासन को भी चाहिए कि वह ऐसे संवेदनशील कामों के लिए सुरक्षा दिशा-निर्देश जारी करे।

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