
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच लेबनान सरकार ने बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। आपात कैबिनेट बैठक के बाद सरकार ने ईरान समर्थित संगठन Hezbollah की सभी सैन्य और सुरक्षा गतिविधियों पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। साथ ही संगठन को अपने सभी हथियार सरकार को सौंपने का निर्देश दिया गया है।
यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है, जब हिजबुल्लाह की ओर से इजरायल पर रॉकेट और ड्रोन हमलों की खबरें सामने आईं। इन घटनाओं के कुछ घंटों बाद ही सरकार ने आपात बैठक बुलाई, जिसमें देश की सुरक्षा स्थिति और क्षेत्रीय हालात पर विस्तार से चर्चा की गई।
पीएम नवाफ सलाम का बयान
बैठक के बाद प्रधानमंत्री Nawaf Salam ने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि लेबनान किसी भी ऐसी सैन्य कार्रवाई को स्वीकार नहीं करेगा, जो देश के वैध संस्थानों और राष्ट्रीय सेना के नियंत्रण से बाहर हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल लेबनान की राष्ट्रीय सेना को ही हथियार रखने और सैन्य कार्रवाई करने का अधिकार है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि हिजबुल्लाह को अपने सभी हथियार सौंपने होंगे ताकि देश में कानून-व्यवस्था बनी रहे और लेबनान किसी बाहरी युद्ध में न उलझे। उनके अनुसार, गैर-राज्य सशस्त्र समूहों की गतिविधियां देश की संप्रभुता और आंतरिक स्थिरता के लिए खतरा बन रही हैं।
सरकार की सख्त तैयारी
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, इस फैसले के तहत हिजबुल्लाह के ट्रेनिंग कैंप, हथियार भंडारण केंद्र और सुरक्षा नेटवर्क के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। सुरक्षा एजेंसियों को आदेश दिया गया है कि वे इस निर्णय को सख्ती से लागू करें और किसी भी उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई करें।
गौरतलब है कि हिजबुल्लाह को लंबे समय से ईरान का समर्थन प्राप्त रहा है और वह खुद को इजरायल के खिलाफ “प्रतिरोध” का हिस्सा बताता रहा है। हालांकि, लेबनान सरकार का कहना है कि किसी भी संगठन को स्वतंत्र रूप से युद्ध छेड़ने की अनुमति नहीं दी जा सकती, क्योंकि इसका असर पूरे देश पर पड़ता है।
मिडिल ईस्ट में जारी अस्थिरता के बीच लेबनान का यह कदम क्षेत्रीय राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।


