OPEC+ ने तेल उत्पादन बढ़ाया, लेकिन ईरान-इजरायल युद्ध के कारण कीमतों पर दबाव बना रह सकता है

वॉशिंगटन/रियाद: मिडिल ईस्ट में ईरान और Israel-United States के बीच चल रहे युद्ध के बीच, OPEC+ देशों ने तेल उत्पादन बढ़ाने का बड़ा फैसला लिया है।

  • OPEC+ के वॉलंटरी एट (V8) समूह, जिसमें सऊदी अरब, रूस, कुवैत, ओमान, इराक और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं, ने रोजाना 2.06 लाख बैरल (206,000 bpd) अतिरिक्त उत्पादन बढ़ाने पर सहमति जताई।
  • यह निर्णय अप्रैल 2026 से लागू होगा।

आधिकारिक वजह और विशेषज्ञों की राय

OPEC+ के बयान में सीधे युद्ध का जिक्र नहीं किया गया। उत्पादन बढ़ाने की वजह वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिरता और मजबूत बाजार मांग बताई गई।

विशेषज्ञों का कहना है कि उत्पादन वृद्धि इतनी बड़ी नहीं है कि मिडिल ईस्ट के तनाव और युद्ध के कारण तेल कीमतों में संभावित उछाल को रोका जा सके।

  • रिस्टैड एनर्जी के विश्लेषक George Leon के अनुसार सबसे बड़ी चिंता स्ट्रेट ऑफ होर्मुज है, जो दुनिया की करीब एक-चौथाई समुद्री तेल सप्लाई का मार्ग है।
  • रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने इस मार्ग से गुजर रहे जहाजों को चेतावनी दी है और एक तेल टैंकर पर हमला होने की खबरें आई हैं।

क्या तेल की कीमतें बढ़ेंगी?

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज से तेल सप्लाई रुकती है, तो उत्पादन बढ़ाने का असर बहुत कम रह जाएगा। वर्तमान में सबसे बड़ा जोखिम केवल उत्पादन नहीं, बल्कि सप्लाई और ट्रांसपोर्ट है।

इसलिए, OPEC+ का उत्पादन बढ़ाने का कदम अस्थायी राहत दे सकता है, लेकिन युद्ध और सुरक्षा खतरे के कारण वैश्विक तेल बाजार में अनिश्चितता बनी रहेगी।

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