भागलपुर में खूनी रंजिश: तस्करों के खिलाफ आवाज उठाने पर युवक पर अंधाधुंध फायरिंग; आंख के नीचे लगी गोली, पत्रकार पर भी आरोप

भागलपुर/बरारी | 28 फरवरी, 2026: भागलपुर के औद्योगिक थाना क्षेत्र (बरारी) अंतर्गत मीराचक इलाके में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। यहाँ अवैध कारोबार का विरोध करने पर एक युवक को जान से मारने की कोशिश की गई है। शराब और हथियार तस्करी के खिलाफ आवाज उठाने वाले युवक सचिन कुमार पर अंधाधुंध फायरिंग की गई, जिसमें एक गोली का छर्रा उनकी आंख के नीचे जा लगा।

वारदात का विवरण: विरोध करने पर मिली ‘गोली’

​पीड़िता सचिन कुमार (पिता सुग्रीव शर्मा) ने औद्योगिक थाना में नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई है। घटना की मुख्य कड़ियाँ इस प्रकार हैं:

  • विवाद की जड़: सचिन का आरोप है कि इलाके का एक युवक बड़े पैमाने पर शराब और हथियार तस्करी के अवैध धंधे में लिप्त है। जब सचिन ने इन गतिविधियों का विरोध किया, तो आरोपी ने रंजिश पाल ली।
  • हमला और फायरिंग: शनिवार को आरोपी ने अपने 4-5 साथियों के साथ मिलकर सचिन को घेर लिया। पहले मारपीट की गई और फिर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी।
  • बाल-बाल बची जान: सचिन ने बताया कि वह जान बचाकर वहां से भागे, लेकिन गोली का एक हिस्सा (छर्रा) उनकी आंख के नीचे लग गया, जिससे वे लहूलुहान होकर घायल हो गए।

पत्रकार की भूमिका पर सवाल: समझौते का दबाव?

​इस मामले में एक स्थानीय पत्रकार सतीश सिंह का नाम सामने आने से मामला और पेचीदा हो गया है:

  1. Victim का आरोप: सचिन कुमार ने एफआईआर में आरोप लगाया है कि सतीश सिंह दोनों पक्षों को बैठाकर ‘समझौता’ कराने की कोशिश कर रहे थे।
  2. प्रशासन पर भरोसा: पीड़ित ने किसी भी तरह के गुप्त समझौते से इनकार कर दिया। सचिन ने कहा, “मुझे कानून पर भरोसा है, इसलिए मैंने पंचायत या समझौते के बजाय सीधे पुलिस का दरवाजा खटखटाया है।”

दहशत में परिवार: “कभी भी हो सकती है हत्या”

​सचिन कुमार ने प्रशासन से अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि आरोपी ने उन्हें खुलेआम जान से मारने की धमकी दी है और यदि आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी नहीं हुई, तो वे किसी बड़ी अनहोनी को अंजाम दे सकते हैं।

पुलिस की कार्रवाई

​औद्योगिक थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और आरोपियों की तलाश में छापेमारी शुरू कर दी है। पुलिस उन अवैध गतिविधियों (शराब व हथियार तस्करी) की भी जांच कर रही है, जिनका उल्लेख सचिन ने अपनी शिकायत में किया है।

VOB का नजरिया: ‘पंचायत’ या ‘पुलिस’—कौन देगा न्याय?

भागलपुर में फायरिंग की यह घटना दर्शाती है कि स्थानीय तस्करों का नेटवर्क कितना गहरा है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस गंभीर अपराध को दबाने के लिए ‘समझौते’ की कोशिश की गई। जब किसी पर गोली चलती है, तो वह ‘आपसी विवाद’ नहीं बल्कि ‘राज्य के खिलाफ अपराध’ होता है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ पीड़ित के इस कदम की सराहना करता है कि उन्होंने रसूखदारों के आगे झुकने के बजाय पुलिस व्यवस्था को चुना। औद्योगिक थाना पुलिस को अब निष्पक्ष जांच कर यह साबित करना होगा कि कानून किसी समझौते का मोहताज नहीं है।

ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।

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