मनियारपुर में खूनी संघर्ष: शराब के विवाद में भिड़े दो गुट; लाठी-डंडों से आधा दर्जन लहूलुहान, पुलिस गश्त पर उठे सवाल

भागलपुर/मधुसूदनपुर | 28 फरवरी, 2026: भागलपुर जिले के मधुसूदनपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत बेलखोरिया पंचायत के मनियारपुर गांव में शनिवार को मामूली विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। अवैध शराब और वर्चस्व को लेकर दो पक्षों के बीच जमकर लाठी-डंडे चले, जिसमें दोनों तरफ से करीब आधा दर्जन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। इस घटना ने गांव में तनाव का माहौल पैदा कर दिया है और स्थानीय पुलिस की कार्यशैली पर भी सवालिया निशान लगा दिए हैं।

आरोप-प्रत्यारोप: एक घटना, दो कहानियां

​दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे मामला उलझ गया है:

पक्ष

मुख्य आरोप

उनका दावा

पहला पक्ष (दुकानदार)

शराबियों का उत्पात

“हमारी नाश्ते की दुकान है। लोग यहाँ जबरन शराब पीने आते हैं, पैसे नहीं देते और विरोध करने पर मारपीट करते हैं।”

दूसरा पक्ष (ग्रामीण)

अवैध शराब का धंधा

“दुकान की आड़ में अवैध शराब और नशीले पदार्थों का कारोबार होता है। विरोध करने पर इन्होंने संगठित होकर हमला कर दिया।”

ग्रामीणों की चिंता: “सुरक्षा के घेरे में बेटियां”

​मनियारपुर के ग्रामीणों ने केवल मारपीट ही नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा पर भी गहरी चिंता जताई है। ग्रामीणों का आरोप है कि:

  • नशेड़ियों का जमावड़ा: गांव में बाहरी और स्थानीय नशेडियों का जमावड़ा लगा रहता है।
  • छेड़खानी की घटनाएं: नशे की हालत में मनचले गांव की लड़कियों पर अभद्र तंज कसते हैं, जिससे महिलाओं का घर से निकलना दूभर हो गया है।
  • पुलिस की लापरवाही: लोगों का कहना है कि यदि पुलिस रोजाना गश्त करे, तो ये अवैध धंधे और नशेड़ियों का आतंक समाप्त हो सकता है।

पुलिसिया कार्रवाई: जांच में जुटी टीम

​घटना की सूचना मिलने के बाद मधुसूदनपुर पुलिस मामले की छानबीन कर रही है। थानाध्यक्ष सफदर अली ने बताया:

“देर शाम एक पक्ष से एक महिला ने लिखित आवेदन दिया है। दूसरे पक्ष से फिलहाल कोई आवेदन नहीं मिला है। पुलिस घटना की सत्यता की जांच कर रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”

VOB का नजरिया: केवल FIR काफी नहीं, गश्त जरूरी

मनियारपुर की यह घटना बिहार में शराबबंदी के बावजूद ग्रामीण इलाकों में चल रहे ‘अवैध खेल’ की ओर इशारा करती है। जब तक थाना स्तर पर जवाबदेही तय नहीं होगी और पुलिस की ‘बीट गश्त’ (Daily Patrolling) प्रभावी नहीं होगी, तब तक ऐसे खूनी संघर्ष होते रहेंगे। स्थानीय लड़कियों के साथ होने वाली छींटाकशी को प्रशासन को गंभीरता से लेना चाहिए, इससे पहले कि कोई बड़ी अनहोनी हो।

ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।

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