
भागलपुर | 23 फरवरी, 2026: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने के ऐतिहासिक अवसर पर भागलपुर में एक भव्य ‘हिंदू सम्मेलन’ का आयोजन किया गया। यह गौरवशाली कार्यक्रम शहर के प्रसिद्ध बाबा वृद्धेश्वर नाथ मंदिर (बूढ़ानाथ) के प्रांगण में संपन्न हुआ, जहाँ स्वयंसेवकों और श्रद्धालुओं का भारी उत्साह देखने को मिला।
धार्मिक अनुष्ठान और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की झलक
सम्मेलन की शुरुआत पूरी तरह से पारंपरिक और सांस्कृतिक परिवेश में हुई, जिसने आगंतुकों को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
- गणेश वंदना: कार्यक्रम का शुभारंभ विघ्नहर्ता गणेश की वंदना के साथ किया गया।
- सामूहिक हनुमान चालीसा: परिसर में मौजूद सैकड़ों लोगों ने एक स्वर में सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ किया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
- भारत माता पूजन: राष्ट्र के प्रति समर्पण को दर्शाते हुए विधि-विधान के साथ भारत माता का पूजन और वंदन किया गया।
बौद्धिक सत्र: राष्ट्र और समाज के 100 वर्षों की यात्रा
सम्मेलन का एक मुख्य आकर्षण ‘बौद्धिक सत्र’ रहा, जिसमें संघ की विचारधारा और उसके अब तक के सफर पर गहराई से चर्चा की गई।
- विचार-विमर्श: इस सत्र के दौरान राष्ट्र, समाज और संगठन की पिछले 100 वर्षों की विकास यात्रा पर विस्तार से प्रकाश डाला गया।
- सामाजिक संदेश: आयोजकों ने स्पष्ट किया कि यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह समाज में समरसता, राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक जागरण का संदेश प्रसारित करने का एक माध्यम है।
- शताब्दी वर्ष का संकल्प: वक्ताओं ने राष्ट्र निर्माण में संघ की भूमिका और भविष्य की चुनौतियों पर अपने विचार साझा किए।
प्रमुख पदाधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति
इस भव्य सम्मेलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और दर्जनों सक्रिय सदस्य मौजूद रहे। स्वयंसेवकों ने अनुशासित तरीके से कार्यक्रम की व्यवस्था संभाली, जो संघ की कार्यशैली की पहचान मानी जाती है। स्थानीय नागरिकों ने भी इस शताब्दी वर्ष समारोह में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और इस मील के पत्थर को यादगार बनाया।
द वॉयस ऑफ बिहार की रिपोर्ट: 1925 में शुरू हुआ यह सफर आज 2026 में अपने 100 साल पूरे कर चुका है। भागलपुर का यह सम्मेलन न केवल संघ की मजबूती को दर्शाता है, बल्कि समाज को जोड़ने के उनके संकल्प को भी दोहराता है।


