
द वॉयस ऑफ बिहार | भागलपुर (20 फरवरी 2026)
बिहार में पूर्ण शराबबंदी का दावा एक बार फिर खोखला साबित होता दिख रहा है। ताज़ा मामला सिल्क सिटी और स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित हो रहे भागलपुर का है, जहाँ सत्ता और प्रशासन के सबसे बड़े केंद्रों के बीच शराबियों के ‘मस्ती’ भरे वीडियो ने सरकार की नीतियों पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
पावर सेंटर के बीच ‘लुढ़कते’ शराबी
हैरानी की बात यह है कि जहाँ यह नज़ारा दिखा, वह शहर का सबसे ‘सुरक्षित’ और पॉश इलाका माना जाता है:
- लोकेशन: एक तरफ कमिश्नर कार्यालय, दूसरी ओर नगर निगम और ठीक बगल में एसपी (SP) कार्यालय।
- क्या दिखा: प्रशासन के इन आला अधिकारियों के दफ्तरों से चंद कदमों की दूरी पर दिनदहाड़े नशे में धुत लोग सड़क पर लुढ़कते नज़र आए।
- नींबू पानी से ‘इलाज’: चश्मदीदों के मुताबिक, कमिश्नरी परिसर के बाहर जमीन पर पड़े इन शराबियों को जब लोगों ने हटाया, तो वे लड़खड़ाते हुए पास की दुकान पर नशा उतारने के लिए नींबू पानी पीते दिखे।
प्रशासन की चुप्पी पर खड़े हुए सवाल
यह घटना केवल शराब पीने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कानून व्यवस्था की विफलता को दर्शाती है:
- कहाँ से आ रही शराब?: जब चप्पे-चप्पे पर पुलिस और सीसीटीवी का पहरा है, तो इन प्रतिबंधित इलाकों में शराब कैसे पहुँच रही है?
- स्थानीय लोगों का आरोप: स्थानीय निवासियों का कहना है कि अब केवल शाम ही नहीं, बल्कि दिन में भी शराबियों का जमावड़ा बढ़ रहा है। इससे महिलाओं और बुजुर्गों का रास्ते से गुजरना दूभर हो गया है।
- अनदेखी या मिलीभगत?: लोगों का सीधा सवाल है कि क्या प्रशासन को इसकी जानकारी नहीं है, या जानबूझकर आँखों पर पट्टी बांध ली गई है?
सफेद हाथी साबित हो रहा कानून?
बिहार सरकार शराबबंदी को अपनी सबसे बड़ी कामयाबी बताती है, लेकिन भागलपुर की इन तस्वीरों ने स्पष्ट कर दिया है कि धरातल पर स्थिति इसके उलट है। उत्पाद विभाग और स्थानीय पुलिस की छापेमारी की खबरें अक्सर आती हैं, लेकिन जब मुख्यालय के बगल में ही शराब खुलेआम बिक और पी जा रही हो, तो इन छापों की विश्वसनीयता पर सवाल उठना लाजिमी है।
अब देखना यह होगा कि इस वीडियो के वायरल होने के बाद भागलपुर पुलिस और उत्पाद विभाग अपनी साख बचाने के लिए क्या कार्रवाई करता है।
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