द वॉयस ऑफ बिहार | छपरा/सारण (18 फरवरी 2026)
’बिहार नवनिर्माण अभियान’ के तहत बुधवार को चुनावी रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर (PK) छपरा पहुंचे। शहर में मीडिया से मुखातिब होते हुए उन्होंने हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों, अपनी चुनावी हार और बिहार के सबसे चर्चित NEET छात्रा मामले पर बेबाकी से अपनी राय रखी।
“हार मंजूर है, पर सिद्धांतों से समझौता नहीं”
पिछले चुनावों में अपेक्षित परिणाम न मिलने के सवाल पर प्रशांत किशोर ने बेहद संजीदगी से जवाब दिया। उन्होंने कहा:
- ईमानदारी का दावा: “हम चुनाव जरूर हारे हैं, लेकिन हमने अपनी वैचारिकता के साथ कोई बेईमानी नहीं की और न ही किसी दल के साथ अनैतिक समझौता किया।”
- अगला लक्ष्य: PK ने साफ किया कि उनका एकमात्र लक्ष्य बिहार की व्यवस्था में सुधार करना है और इसके लिए वे अब पहले से भी अधिक मेहनत और मजबूती के साथ जमीन पर उतरेंगे।
NEET छात्रा मामले पर बड़ा हमला: “इसमें शामिल हैं बिहार के सफेदपोश”
मीडिया ब्रीफिंग के दौरान प्रशांत किशोर ने बिहार को झकझोर देने वाले NEET छात्रा मामले पर बड़ा बयान देकर राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।
- बड़े लोगों की संलिप्तता: PK ने सीधा आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में बिहार के कुछ बेहद रसूखदार और बड़े लोग शामिल हैं।
- SIT बनाम CBI: उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “अगर यह कोई छोटा-मोटा आपराधिक मामला होता, तो अब तक राज्य की SIT इसे सुलझा लेती। इस मामले की गंभीरता और इसमें शामिल ‘बड़े चेहरों’ के कारण ही इसकी CBI जांच हो रही है।”
- न्याय का संकल्प: उन्होंने पीड़ित परिवार को भरोसा दिलाते हुए कहा कि वे और उनका संगठन बच्ची को न्याय दिलाने के लिए पूरी ताकत के साथ खड़े हैं और इस लड़ाई को अंजाम तक पहुँचाएंगे।
छपरा में ‘नवनिर्माण’ की रणनीति
प्रशांत किशोर ने छपरा के युवाओं और बुद्धिजीवियों से संवाद करते हुए कहा कि सारण की धरती हमेशा से बड़े परिवर्तनों की गवाह रही है। उन्होंने अपील की कि लोग जाति और धर्म की राजनीति से ऊपर उठकर बिहार के भविष्य और बच्चों की शिक्षा-रोजगार के लिए वोट करें।
द वॉयस ऑफ बिहार का विश्लेषण: हार के बाद PK की नई आक्रामकता
चुनावों में पिछड़ने के बावजूद प्रशांत किशोर का तेवर नरम नहीं पड़ा है। NEET मामले जैसे संवेदनशील मुद्दे पर ‘बड़े लोगों’ का नाम लेकर उन्होंने सरकार और विपक्ष, दोनों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। छपरा से शुरू हुआ उनका यह ‘नवनिर्माण अभियान’ आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में नए समीकरण पैदा कर सकता है।


