नालंदा की ज्ञान भूमि पर अल्पसंख्यकों के उत्थान का ‘ब्लूप्रिंट’: राजगीर में दो दिवसीय राष्ट्रीय ‘चिंतन शिविर’ शुरू; किरेन रिजिजू और कई राज्यों के मंत्री शामिल

द वॉयस ऑफ बिहार | राजगीर/नालंदा

​बिहार की ऐतिहासिक धरती और ज्ञान के प्राचीन केंद्र नालंदा विश्वविद्यालय, राजगीर में बुधवार (18 फरवरी 2026) से दो दिवसीय राष्ट्रीय ‘चिंतन शिविर’ का भव्य आगाज़ हुआ। केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा आयोजित इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम का उद्देश्य देश के अल्पसंख्यक समुदायों के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण के लिए एक ठोस और भविष्योन्मुखी रोडमैप तैयार करना है।

दिग्गज नेताओं और मंत्रियों का जमावड़ा

​इस शिविर में केंद्र और विभिन्न राज्यों के नीति-निर्धारकों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य तथा संसदीय कार्य मंत्री श्री किरेन रिजिजू कर रहे हैं।

  • विशिष्ट अतिथि: केंद्रीय राज्य मंत्री श्री जॉर्ज कुरियन, बिहार के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मोहम्मद जमा खान सहित अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा के मंत्रियों ने भी इस संवाद में हिस्सा लिया।
  • प्रतिभागी: केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, वक्फ बोर्ड के सदस्य और विभिन्न हितधारक इस चर्चा में शामिल हैं।

5 प्रमुख विषयों पर ‘मंथन’ से निकलेगा समाधान

​चिंतन शिविर में अल्पसंख्यक कल्याण की आधारशिला माने जाने वाले पांच मुख्य विषयों पर केंद्रित सामूहिक चर्चा की जा रही है:

  1. अवसंरचना विकास: प्रधान मंत्री जन विकास कार्यक्रम (PMJVK) की समीक्षा।
  2. सशक्तिकरण: पीएम विकास और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास एवं वित्त निगम के माध्यम से आर्थिक मदद।
  3. वक्फ प्रबंधन: वक्फ संपत्तियों के पारदर्शी और बेहतर उपयोग पर चर्चा।
  4. हज प्रबंधन: हज यात्रियों के लिए सुविधाओं को सुगम बनाना।
  5. नीतिगत सुधार: कार्यान्वयन में आ रही बाधाओं को दूर करना।

कल लॉन्च होंगे ‘हाई-टेक’ डिजिटल टूल्स

​शिविर के दूसरे दिन (19 फरवरी) को मंत्रालय तीन अत्याधुनिक प्रौद्योगिकीय पहलों की शुरुआत करेगा:

  • PMJVK मोबाइल ऐप: परियोजनाओं की रियल-टाइम निगरानी और पारदर्शिता के लिए।
  • हज सुविधा स्मार्ट रिस्ट बैंड: हज यात्रियों की सुरक्षा और लोकेशन ट्रैकिंग के लिए।
  • AI-चैटबॉट: नागरिकों के सवालों के तुरंत समाधान के लिए एआई आधारित सेवा।

नालंदा विश्वविद्यालय: आयोजन स्थल का विशेष महत्व

​यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल नालंदा का चयन समावेशी संवाद और प्राचीन ज्ञान की परंपरा को दर्शाने के लिए किया गया है। यह स्थान अल्पसंख्यक कल्याण और राष्ट्रीय विकास जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श के लिए एक प्रेरणादायक पृष्ठभूमि प्रदान कर रहा है।

सांस्कृतिक संध्या और योग सत्र

​पहले दिन का समापन बिहार की समृद्ध और गौरवशाली विरासत को प्रदर्शित करने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ होगा। वहीं, दूसरे दिन की शुरुआत योग सत्र से होगी, जो ‘स्वस्थ शरीर में स्वस्थ दिमाग’ के भारतीय दर्शन को रेखांकित करेगा।

द वॉयस ऑफ बिहार का टेक: केवल चर्चा नहीं, कार्रवाई की उम्मीद

​राजगीर में हो रहा यह चिंतन शिविर केवल एक औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि एक ‘एक्शन-ओरिएंटेड’ रोडमैप तैयार करने की कोशिश है। पूर्वोत्तर राज्यों के मंत्रियों की बड़ी भागीदारी यह दर्शाती है कि सरकार देश के हर कोने में अल्पसंख्यकों के विकास को समान महत्व दे रही है। उम्मीद है कि इस ऐतिहासिक भूमि से निकले निष्कर्ष अल्पसंख्यक समुदायों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाएंगे।

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