बिहार: कामकाजी महिलाओं को बड़ी राहत; खुलेंगे 318 नए ‘आंगनबाड़ी-सह-क्रेच’, सुबह 9 से शाम 6:30 तक बच्चों को मिलेगा खाना, दूध और पढ़ाई

  • बड़ी योजना: बिहार सरकार ने कामकाजी माता-पिता की मुश्किलों को किया आसान; ‘मिशन शक्ति’ के तहत राज्य भर में खुलेंगे 318 नए आंगनबाड़ी-सह-क्रेच केंद्र, कुल संख्या होगी 504।
  • फुल टाइम केयर: सुबह 9:15 से शाम 6:30 बजे तक बच्चों की देखभाल; मिलेगा गर्म खाना, अंडा, दूध और स्नैक्स; माताओं के लेट होने पर भी खुला रहेगा क्रेच।
  • सुविधाएं: 6 महीने से 6 साल तक के बच्चों के लिए सोने, खेलने और पढ़ने की व्यवस्था; हर 3 महीने पर होगी हेल्थ चेकअप।

द वॉयस ऑफ बिहार (पटना/ब्यूरो)

​बिहार सरकार (Bihar Government) ने राज्य के कामकाजी माता-पिता, विशेषकर नौकरीपेशा माताओं के लिए एक बड़ी सौगात दी है। सरकार ने ‘मिशन शक्ति’ (Mission Shakti) के तहत राज्य भर में 318 नए आंगनबाड़ी-सह-क्रेच (Anganwadi-cum-Creche) केंद्र खोलने का फैसला किया है। इससे महिलाओं को अपने बच्चों की चिंता किए बिना नौकरी या व्यवसाय पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलेगी।

504 हो जाएगी कुल संख्या

​फिलहाल राज्य के सभी जिलों में 186 ऐसे केंद्र चल रहे हैं, जिनसे 1,097 बच्चों को फायदा मिल रहा है।

  • विस्तार: 318 नए केंद्र खुलने के बाद राज्य में इनकी कुल संख्या बढ़कर 504 हो जाएगी।
  • क्षमता: प्रत्येक क्रेच में औसतन 20-25 बच्चों को रखने की क्षमता होगी। इससे लगभग 8,000 से 10,000 अतिरिक्त बच्चों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

घर जैसा माहौल और पोषण

​इन क्रेच में बच्चों को केवल रखा नहीं जाएगा, बल्कि उनका पूरा विकास सुनिश्चित किया जाएगा।

  • समय: क्रेच का समय सुबह 9:15 बजे से शाम 6:30 बजे तक होगा। अगर माताएं काम की वजह से लेट हो जाती हैं, तो क्रेच उनके आने तक खुला रहेगा।
  • खान-पान: बच्चों को गर्म पका भोजन, अंडा, दूध और शाम को पौष्टिक स्नैक्स दिया जाएगा।
  • माहौल: दीवारों पर जानवरों और पक्षियों की पेंटिंग, हिंदी-अंग्रेजी वर्णमाला और कविताओं के जरिए ज्ञानवर्धक माहौल बनाया गया है।

देखभाल और रोजगार भी

​क्रेच में बच्चों के सोने, खेलने और बाल-सुलभ शौचालय की व्यवस्था है। साथ ही नियमित स्वास्थ्य जांच भी होगी।

  • मानदेय: इन केंद्रों को चलाने के लिए क्रेच वर्कर को 5,500 रुपये और हेल्पर को 3,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाएगा। इससे स्थानीय स्तर पर महिलाओं को रोजगार भी मिलेगा।

कामकाजी महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम है।

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