
- नई खेती, नई कमाई: बिहार सरकार ने स्ट्रॉबेरी और ड्रैगन फ्रूट की खेती को दिया बढ़ावा; किसानों की आय बढ़ाने के लिए मिल रही भारी सब्सिडी।
- अनुदान राशि: ‘स्ट्रॉबेरी विकास योजना’ में प्रति हेक्टेयर 3,02,400 रुपये और ‘ड्रैगन फ्रूट’ के लिए 2,70,000 रुपये की मिलेगी सरकारी मदद।
- अवसर: छोटे किसानों और महिला समूहों के लिए खुलेंगे रोजगार के नए द्वार; जैम, पल्प और प्रोसेसिंग से भी होगी अतिरिक्त कमाई।
द वॉयस ऑफ बिहार (पटना/ब्यूरो)
बिहार (Bihar) की खेती अब पारंपरिक फसलों तक सीमित नहीं रही। राज्य सरकार किसानों को ‘स्मार्ट खेती’ की ओर मोड़ रही है। कृषि मंत्री राम कृपाल यादव (Ram Kripal Yadav) ने बताया कि सरकार अब विदेशी फलों—खासकर स्ट्रॉबेरी (Strawberry) और ड्रैगन फ्रूट (Dragon Fruit)—की खेती को बड़े पैमाने पर प्रोत्साहित कर रही है। इसके लिए सरकार किसानों को लाखों रुपये का अनुदान (Subsidy) दे रही है।
कितना मिलेगा पैसा?
कृषि मंत्री ने योजनाओं का ब्योरा देते हुए बताया कि सरकार प्रारंभिक निवेश का बोझ कम करने के लिए मदद कर रही है:
- स्ट्रॉबेरी: ‘स्ट्रॉबेरी विकास योजना’ के तहत किसानों को प्रति हेक्टेयर 3,02,400 रुपये की सहायता दी जा रही है, जो कुल इकाई लागत का 40% है। यह कम समय में तैयार होने वाली फसल है, जिससे जल्दी कमाई होती है।
- ड्रैगन फ्रूट: ‘ड्रैगन फ्रूट विकास योजना’ के तहत प्रति हेक्टेयर 2,70,000 रुपये का अनुदान मिल रहा है। यह कम पानी में उगने वाली और लंबे समय तक फल देने वाली फसल है।
महिलाओं के लिए रोजगार के मौके
मंत्री ने कहा कि इन फसलों की खेती से गांवों में रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
- काम: रोपण, तुड़ाई, ग्रेडिंग, पैकेजिंग और परिवहन में लोगों को काम मिल रहा है।
- प्रोसेसिंग: महिला किसान और स्वयं सहायता समूह (SHGs) इन फलों से जैम, पल्प आदि बनाकर (Value Addition) अतिरिक्त मुनाफा कमा सकते हैं। इससे पोषण सुरक्षा भी मजबूत होगी।
कैसे लें लाभ?
इच्छुक किसान, किसान समूह या महिला स्वयं सहायता समूह इस योजना का लाभ उठाने के लिए अपने प्रखंड या जिला उद्यान कार्यालय (District Horticulture Office) अथवा कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) से संपर्क कर सकते हैं। सरकार तकनीकी प्रशिक्षण और मार्केटिंग में भी सहयोग करेगी।
किसानों के लिए यह खेती वरदान साबित हो सकती है।


