पटना।राज्य सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और विधिसम्मत बनाने की दिशा में एक और अहम कदम उठाया है। अनुशासनात्मक मामलों में अक्सर होने वाली प्रक्रियागत उलझनों और कानूनी त्रुटियों से बचने के लिए अब अधिकारियों को एक संक्षिप्त, व्यावहारिक और सरल मार्गदर्शिका उपलब्ध कराई गई है।
तीन वरिष्ठ अधिकारियों ने किया संयुक्त विमोचन
पुराना सचिवालय स्थित सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव के कक्ष में इस विशेष पुस्तिका का विमोचन किया गया।
इस मौके पर—
- महानिदेशक सह मुख्य जांच आयुक्त श्री दीपक कुमार
- राजस्व परिषद की अध्यक्ष श्रीमती हरजोत कौर बम्हरा
- अपर मुख्य सचिव, सामान्य प्रशासन एवं शिक्षा विभाग डॉ. बी. राजेंदर
ने संयुक्त रूप से पुस्तक का लोकार्पण किया।
क्या है इस पुस्तिका की खासियत?
यह पुस्तक उस विस्तृत ग्रंथ का संक्षिप्त और व्यवहारिक संस्करण है, जिसमें—
- अनुशासनात्मक कार्रवाई से जुड़े संवैधानिक प्रावधान,
- नियम-कायदों की प्रक्रिया,
- और महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णयों
को सरल भाषा में संकलित किया गया है, ताकि अधिकारी किसी भी मामले में भ्रम या तकनीकी भूल से बच सकें।
जवाबदेही पर सरकार का स्पष्ट संदेश
विमोचन के दौरान यह स्पष्ट किया गया कि राज्य सरकार अधिकारियों की जवाबदेही और पारदर्शिता को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। इस पुस्तिका का उद्देश्य यही है कि—
- अनुशासनात्मक मामलों में समय की बचत हो,
- प्रक्रियाएं कानूनी रूप से मजबूत हों,
- और निर्णय निष्पक्ष व पारदर्शी तरीके से लिए जा सकें।
अधिकारियों के लिए होगा “रेडी रेफरेंस”
सरकारी अधिकारियों के लिए यह गाइडबुक अब एक रेडी रेफरेंस टूल की तरह काम करेगी।
जब भी कोई अनुशासनात्मक मामला सामने आएगा, यह पुस्तक उन्हें सही दिशा दिखाने में मदद करेगी—बिना देरी, बिना गलती।
निष्कर्ष
यह पहल न केवल प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक मजबूत कदम है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि सरकार अब “सिस्टम की मजबूती” को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।


