
आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 के आंकड़े बता रहे हैं—राज्य की तस्वीर तेजी से बदल रही है
पटना | 2 फरवरी:बिहार का आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 इस बार सिर्फ आंकड़ों का दस्तावेज नहीं, बल्कि राज्य की बदलती औद्योगिक पहचान का संकेत बनकर सामने आया है। रिपोर्ट बताती है कि बीते पांच वर्षों में बिहार की इंडस्ट्रियल इकोनॉमी ने निवेश, उत्पादकता और ऊर्जा उपलब्धता—तीनों मोर्चों पर बड़ी छलांग लगाई है।
निवेश में दोगुनी रफ्तार
राज्य में प्रति व्यक्ति स्थिर पूंजी निवेश (Fixed Capital Investment)
- 2019–20: ₹11.7 लाख
- 2023–24: ₹25.9 लाख
यानी सिर्फ पांच साल में यह दो गुना से ज्यादा बढ़ गया। खास बात यह है कि 2022–23 और 2023–24 में बिहार का यह आंकड़ा राष्ट्रीय औसत से भी अधिक रहा।
देश के कुल स्थिर पूंजी निवेश में बिहार की हिस्सेदारी भी
0.40% → 0.78% तक पहुंच गई है—जो निवेशकों के बढ़ते भरोसे का संकेत है।
लेबर प्रोडक्टिविटी में बड़ा सुधार
निवेश बढ़ने का सीधा असर श्रम उत्पादकता पर पड़ा है।
प्रति संलग्न व्यक्ति शुद्ध मूल्यवर्धन (NVA)
- 2023–24: ₹10 लाख
यह राष्ट्रीय औसत के 93.5% के बराबर है—जो बताता है कि बिहार के उद्योग अब ज्यादा कुशल और प्रतिस्पर्धी हो रहे हैं।
महिला उद्यमिता बनी नई ताकत
खुद के श्रम आधारित निर्माण इकाइयों में
67.3% हिस्सेदारी महिला मालिकों की है।
यह संकेत देता है कि परिवार आधारित और छोटे उद्योगों की कमान अब बड़ी संख्या में महिलाओं के हाथों में है।
2016–17 से सितंबर 2025 तक
- 4,353 निवेश प्रस्ताव आए
- ₹1.11 लाख करोड़ के प्रस्तावों को मंजूरी मिली
ऊर्जा के मोर्चे पर ऐतिहासिक सुधार
प्रति व्यक्ति बिजली खपत:
- 2011–12: 134 यूनिट
- 2024–25: 374 यूनिट
यानी 2.8 गुना बढ़ोतरी।
अब शहरी इलाकों में 23–24 घंटे और ग्रामीण इलाकों में 22–23 घंटे बिजली मिल रही है—शहर–गांव का अंतर लगभग खत्म।
खपत में हिस्सेदारी
- घरेलू उपभोक्ता: 48%
- उद्योग व व्यापार: 35%
राज्य में बिजली उत्पादन/खरीद
- 2020–21: 3,207 करोड़ यूनिट
- 2024–25: 5,119 करोड़ यूनिट
आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़े साफ इशारा कर रहे हैं—
बिहार अब सिर्फ कृषि आधारित राज्य नहीं, बल्कि उभरती इंडस्ट्रियल इकॉनमी की ओर बढ़ रहा है।
निवेश, महिला उद्यमिता और ऊर्जा सुधार—तीनों मिलकर राज्य को नई आर्थिक पहचान दे रहे हैं।


