30 साल देश की सेवा के बाद गांव लौटे आर्मी कैप्टन मनोज सिंह, अमरा गांव में हुआ भव्य स्वागत

गया। बिहार के गया जिले के रहने वाले आर्मी कैप्टन मनोज सिंह ने भारतीय सेना में 30 वर्षों तक सेवा देने के बाद सेवानिवृत्ति ली। रिटायरमेंट के बाद जब वे अपने पैतृक गांव अमरा (मानपुर प्रखंड) पहुंचे, तो पूरे इलाके ने उन्हें देश के सच्चे सपूत की तरह सम्मान दिया। गांव में ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं।


फूल-मालाओं और बैंड-बाजे के साथ किलोमीटरों तक स्वागत

कैप्टन मनोज सिंह के स्वागत के लिए ग्रामीण कई किलोमीटर पहले से ही पैदल उनके साथ चल पड़े। फूल-मालाओं से उन्हें लाद दिया गया, वहीं बैंड-बाजे पर देशभक्ति धुनों की गूंज से पूरा इलाका राष्ट्रभक्ति के रंग में रंग गया।
यह काफिला मानपुर बाजार से होते हुए अमरा गांव तक पहुंचा।


कारगिल ऑपरेशन जैसे अहम अभियानों में निभाई भूमिका

जानकारी के अनुसार, कैप्टन मनोज सिंह ने अपने 30 वर्षों के सैन्य जीवन में ऑपरेशन कारगिल जैसे महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों में भी हिस्सा लिया। उन्होंने भारतीय सेना में रहते हुए कई अवसरों पर विशिष्ट और साहसिक सेवा प्रदान की।


माता-पिता ने दिया आशीर्वाद

इस ऐतिहासिक क्षण के गवाह बने कैप्टन मनोज सिंह के माता-पिता भी। उनकी मां शांति देवी और पिता सिद्धेश्वर सिंह स्वयं मानपुर बाजार पहुंचे और बेटे को आशीर्वाद दिया। गांव के सैकड़ों लोग, रिश्तेदार और गणमान्य नागरिक इस सम्मान समारोह में शामिल हुए।


भावुक हुए कैप्टन मनोज सिंह

इस अभूतपूर्व स्वागत से कैप्टन मनोज सिंह भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि यह पल उनके जीवन के सबसे यादगार क्षणों में से एक है।

कैप्टन मनोज सिंह ने कहा:

“30 साल तक भारतीय सेना में सेवा करना मेरे जीवन का सबसे बड़ा गौरव है। आज गांव वालों ने जो सम्मान दिया है, उसने मुझे भावुक कर दिया। यह मेरे लिए अविस्मरणीय क्षण है।”


युवाओं से की देशसेवा की अपील

कैप्टन मनोज सिंह का चयन 1995 में भारतीय सेना में हुआ था। रिटायरमेंट के बाद उन्होंने युवाओं से अनुशासन और राष्ट्र सेवा के मार्ग पर चलने की अपील की।

“आज की युवा पीढ़ी से मेरा संदेश है कि वे अनुशासन, ईमानदारी और राष्ट्रवाद को अपने जीवन का आधार बनाएं। देश की सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं होता।”


गांव को अपने सपूत पर गर्व

कैप्टन मनोज सिंह का स्वागत केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि देश सेवा के प्रति सम्मान का प्रतीक था। अमरा गांव को अपने इस वीर सपूत पर गर्व है, जिसने तीन दशकों तक मातृभूमि की रक्षा की।


 

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