जीतन राम मांझी के कमीशन वाले बयान पर सियासी घमासान, कांग्रेस नेता अजीत शर्मा ने प्रधानमंत्री से की कार्रवाई की मांग

पटना।केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के कमीशन से जुड़े बयान ने बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। ठंड के मौसम में यह बयान सियासी तापमान बढ़ाने वाला साबित हो रहा है। मांझी ने हाल ही में दावा किया था कि हर सांसद और विधायक कमीशन लेते हैं और उन्होंने अपने बेटे संतोष सुमन से भी कमीशन लेने की बात कही थी। इस बयान के सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

अजीत शर्मा का कड़ा पलटवार

मांझी के बयान पर कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक अजीत शर्मा ने तीखा पलटवार किया है। उन्होंने इसे बेहद गंभीर मामला बताते हुए कहा कि इस बयान पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तुरंत संज्ञान लेना चाहिए। अजीत शर्मा ने सवाल उठाया कि क्या जनता अपने सांसदों और विधायकों को कमीशनखोरी के लिए चुनती है।

तीन बार विधायक रहे, कभी कमीशन नहीं लिया: अजीत शर्मा

अजीत शर्मा ने कहा कि वे स्वयं तीन बार विधायक रह चुके हैं और कोई भी व्यक्ति यदि यह साबित कर दे कि उन्होंने कभी कमीशन लिया हो, तो वे राजनीति छोड़ने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि अगर कोई सांसद या विधायक कमीशन लेता है, तो यह सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की श्रेणी में आता है और ऐसे लोगों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

प्रधानमंत्री से सख्त कदम उठाने की मांग

कांग्रेस नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री को ऐसे जनप्रतिनिधियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि जो भी सांसद या विधायक कमीशनखोरी में लिप्त पाए जाएं, उन्हें पद से बर्खास्त कर जेल भेजा जाए। अजीत शर्मा ने कहा कि लोकतंत्र में जनता अपने प्रतिनिधियों को विकास और जनसेवा के लिए चुनती है, न कि अवैध लाभ कमाने के लिए।

मांझी के बयान को बताया शर्मनाक

अजीत शर्मा ने जीतन राम मांझी के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान से न केवल जनप्रतिनिधियों की छवि धूमिल होती है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने मांग की कि मांझी को अपने बयान के लिए देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए।

राजनीतिक हलकों में तेज हुई चर्चा

इस पूरे घटनाक्रम के बाद बिहार की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। एक ओर विपक्ष इस बयान को भ्रष्टाचार का स्वीकारोक्ति बता रहा है, वहीं दूसरी ओर सत्तापक्ष की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है।

कुल मिलाकर, जीतन राम मांझी के कमीशन वाले बयान ने बिहार की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है। अब देखना यह होगा कि इस मामले में केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से कोई प्रतिक्रिया या कार्रवाई होती है या नहीं।

  • Related Posts

    दरौंदा रेलवे स्टेशन पर हादसा, ट्रेन में चढ़ते समय गिरने से STF कमांडर राजेश प्रसाद की मौत

    Share Add as a preferred…

    Continue reading
    “लाठियां खाईं, संघर्ष किया… अब देश को मिलेगा लाभ”— नीतीश के राज्यसभा जाने पर भावुक हुए अश्विनी चौबे; बधाई देते हुए साझा किए पुराने संस्मरण

    Share Add as a preferred…

    Continue reading