
एक दलित सरकारी कर्मचारी को अपमानित करने और धमकी देने के आरोप से जुड़े मामले में मनेर विधानसभा क्षेत्र से विधायक भाई वीरेंद्र की कानूनी परेशानियां बढ़ती नजर आ रही हैं। अब इस मामले की सुनवाई सांसदों और विधायकों से जुड़े मामलों के लिए गठित विशेष अदालत (एमपी-एमएलए कोर्ट) में होगी। इससे पहले यह केस एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत विशेष अदालत में चल रहा था।
हरिजन थाना पुलिस ने 28 नवंबर को इस मामले में अपना आरोप पत्र एससी/एसटी अदालत के विशेष न्यायाधीश पंकज चौहान की अदालत में दाखिल किया था। आरोप पत्र पर संज्ञान लेते हुए न्यायाधीश ने आदेश दिया कि चूंकि आरोपी एक वर्तमान विधायक हैं, इसलिए इस मामले की सुनवाई एमपी-एमएलए कोर्ट में की जानी चाहिए। इसके बाद केस को एमपी-एमएलए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश धनंजय कुमार मिश्रा की अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया।
फोन पर धमकी और जातिसूचक शब्दों का आरोप
यह पूरा मामला पटना जिले के मनेर प्रखंड से जुड़ा है। 28 जुलाई 2025 को मनेर प्रखंड की सराय पंचायत में पदस्थ पंचायत सचिव संदीप कुमार ने हरिजन थाना में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के आधार पर हरिजन थाना कांड संख्या 47/2025 दर्ज किया गया।
परिवादी संदीप कुमार ने आरोप लगाया कि 26 जुलाई 2025 को विधायक भाई वीरेंद्र ने उन्हें फोन कर धमकी दी और जातिसूचक व अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। संदीप कुमार दलित समुदाय से आते हैं और सरकारी सेवा में पंचायत सचिव के पद पर कार्यरत हैं।
राजनीतिक प्रभाव के दुरुपयोग का आरोप
शिकायत में कहा गया है कि विधायक ने अपने पद और राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया और डराने-धमकाने की कोशिश की। परिवादी के अनुसार, इस घटना से उन्हें गंभीर मानसिक आघात पहुंचा और उनकी सामाजिक गरिमा को ठेस लगी।
मामला दर्ज होने के बाद हरिजन थाना पुलिस ने विस्तृत जांच की। जांच के दौरान परिवादी के बयान, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों की जांच की गई। अनुसंधान पूरा होने के बाद पुलिस ने आरोपों को सही पाते हुए एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम समेत अन्य धाराओं में आरोप पत्र दाखिल किया।
एमपी-एमएलए कोर्ट में तेज सुनवाई की उम्मीद
मामले के एमपी-एमएलए कोर्ट में पहुंचने के बाद इसकी अहमियत और बढ़ गई है। इस अदालत का गठन जनप्रतिनिधियों से जुड़े मामलों की त्वरित सुनवाई के उद्देश्य से किया गया है, ताकि ऐसे मामलों में अनावश्यक देरी न हो। अगली सुनवाई में अदालत द्वारा संज्ञान और आगे की कानूनी प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट होने की संभावना है।
राजनीतिक हलकों में बढ़ी हलचल
मनेर विधायक भाई वीरेंद्र बिहार की राजनीति में एक चर्चित नाम रहे हैं और वे कई बार विधानसभा सदस्य रह चुके हैं। ऐसे में उनके खिलाफ एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज इस मामले का एमपी-एमएलए कोर्ट में जाना राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विपक्षी दल पहले ही इस मुद्दे को लेकर सवाल उठा रहे हैं, जबकि सत्तापक्ष की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
कानूनी जानकारों की राय
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के मामलों में अदालतें सख्त रुख अपनाती हैं। आरोप सिद्ध होने की स्थिति में दोषसिद्धि और कड़ी सजा का प्रावधान है। वहीं, बचाव पक्ष को भी अपना पक्ष रखने और साक्ष्य प्रस्तुत करने का पूरा अवसर मिलेगा।
फिलहाल, इस पूरे प्रकरण पर सभी की नजरें एमपी-एमएलए कोर्ट की आगामी कार्यवाही पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में अदालत की सुनवाई से यह तय होगा कि मामला किस दिशा में आगे बढ़ता है और न्यायिक प्रक्रिया का अगला कदम क्या होगा।



