गृह विभाग का सख्त आदेश: सभी अधिकारियों को 15 फरवरी तक देनी होगी चल-अचल संपत्ति और देनदारियों की जानकारी

राज्य सरकार ने प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। गृह विभाग ने सभी पदाधिकारियों और अन्य कर्मियों को अपनी चल-अचल संपत्ति के साथ-साथ वित्तीय दायित्वों (देनदारियों) का पूरा विवरण तय समयसीमा के भीतर जमा करने का निर्देश जारी किया है। आदेश के अनुसार, वर्ष की अंतिम तिथि 31 दिसंबर को आधार मानते हुए सभी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को 15 फरवरी तक अपनी संपत्ति विवरणी समर्पित करनी होगी।

इस संबंध में गृह विभाग के संयुक्त सचिव नवीन चंद्र ने राज्य के शीर्ष पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को पत्र भेजा है। यह पत्र डीजीपी, सभी डीजी, बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग के सचिव, जेल आईजी, विशेष सुरक्षा दल के समादेष्टा, रेल एडीजी, अभियोजन निदेशालय और सैनिक कल्याण निदेशालय के निदेशक को संबोधित किया गया है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि पूर्व वर्षों की तरह इस वर्ष भी अखिल भारतीय सेवा के सभी पदाधिकारियों और राज्य सरकार के अधीन उपक्रमों में कार्यरत अधिकारियों व कर्मियों की संपत्ति विवरणी सार्वजनिक करना अनिवार्य है।

31 मार्च 2026 तक संपत्ति विवरणी सार्वजनिक करना अनिवार्य

गृह विभाग ने निर्देश दिया है कि सभी संपत्ति विवरणियों को 31 मार्च 2026 तक सार्वजनिक किया जाना है। इसके लिए समयबद्ध और सुव्यवस्थित प्रक्रिया अपनाने पर जोर दिया गया है, ताकि किसी भी स्तर पर लापरवाही या देरी न हो। विभाग का मानना है कि संपत्ति विवरणी की नियमित घोषणा से प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ती है और भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकता है।

वेतन भुगतान से जोड़ी गई जिम्मेदारी

निर्देशों के तहत निकासी एवं व्ययन पदाधिकारियों (DDO) की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया गया है। फरवरी माह के वेतन भुगतान के समय यह सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा कि संबंधित अधिकारी या कर्मचारी की संपत्ति विवरणी पहले ही प्राप्त हो चुकी हो। यदि किसी कर्मी ने तय समयसीमा में संपत्ति विवरणी जमा नहीं की, तो उसके वेतन भुगतान में बाधा उत्पन्न हो सकती है।

लापरवाही पर सख्त रुख

सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में कई मामलों में संपत्ति विवरणी समय पर जमा नहीं होने की शिकायतें सामने आई थीं। इसी को देखते हुए इस बार गृह विभाग ने स्पष्ट समयसीमा और जवाबदेही तय कर दी है। इसे प्रशासनिक सख्ती के रूप में देखा जा रहा है, जिससे यह संकेत मिलता है कि सरकार अब इस प्रक्रिया को महज औपचारिकता के रूप में नहीं, बल्कि गंभीरता से लागू करना चाहती है।

क्या-क्या देना होगा विवरण

गृह विभाग ने स्पष्ट किया है कि संपत्ति विवरणी में अधिकारी या कर्मचारी के नाम पर मौजूद सभी प्रकार की चल संपत्ति—जैसे नकद राशि, बैंक जमा, शेयर, बॉन्ड, वाहन आदि—और अचल संपत्ति—जैसे मकान, जमीन, फ्लैट आदि—का उल्लेख अनिवार्य होगा। इसके साथ ही किसी भी प्रकार के ऋण, कर्ज या अन्य वित्तीय दायित्वों की जानकारी भी देनी होगी, ताकि संपत्ति और देनदारियों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।

विभागों में बढ़ी हलचल

आदेश जारी होने के बाद विभिन्न विभागों में गतिविधियां तेज हो गई हैं। कई विभागों ने अपने स्तर पर कर्मचारियों को सूचना देना शुरू कर दिया है, ताकि समयसीमा के भीतर सभी से संपत्ति विवरणी एकत्र की जा सके। माना जा रहा है कि गृह विभाग इस पूरी प्रक्रिया की नियमित निगरानी करेगा और जरूरत पड़ने पर सख्त कार्रवाई भी की जा सकती है।

पारदर्शी प्रशासन की दिशा में कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि चल-अचल संपत्ति और देनदारियों का नियमित खुलासा सरकारी सेवा में ईमानदारी और जनविश्वास को मजबूत करता है। इससे न केवल प्रशासन की छवि बेहतर होती है, बल्कि अवैध संपत्ति और आय के स्रोतों की पहचान में भी मदद मिलती है।

कुल मिलाकर, गृह विभाग का यह आदेश राज्य सरकार की पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासनिक नीति को दर्शाता है। अब संपत्ति विवरणी जमा करना केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि अनिवार्य प्रशासनिक जिम्मेदारी बन गया है। ऐसे में सभी अधिकारियों और कर्मियों के लिए तय समयसीमा के भीतर सही और पूर्ण विवरण देना आवश्यक हो गया है।

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