“देसी गाय के साथ जर्सी और भैंस पालन पर जोर, बिहार में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने की बड़ी योजना”

बिहार में डेयरी उद्योग को मजबूत बनाने और पशुपालकों की आय बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। बिहार पशु विश्वविद्यालय ने राज्य में सफेद क्रांति को नई रफ्तार देने के लिए एक विस्तृत ब्लूप्रिंट तैयार किया है। यह ब्लूप्रिंट विश्वविद्यालय के कुलपति और ‘मुर्रा मैन ऑफ इंडिया’ के नाम से प्रसिद्ध पशु वैज्ञानिक डॉ. इंद्रजीत सिंह के मार्गदर्शन में तैयार किया गया है।

देसी गाय के साथ जर्सी गाय पालन पर जोर

ब्लूप्रिंट में पशुपालकों को देसी गायों के साथ जर्सी गाय और भैंस पालन को बढ़ावा देने की सिफारिश की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, जर्सी गायों के पालन से पशुपालकों की आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है। अमेरिका और कनाडा जैसे देशों में होल्स्टीन फ्राइजियन (एचएफ) नस्ल के साथ जर्सी गायों के संयुक्त पालन का मॉडल पहले ही सफल साबित हो चुका है।

जर्सी गाय का आकार छोटा होने के कारण इनके पालन की लागत कम होती है और बीमारियों का खतरा भी अपेक्षाकृत कम रहता है। साथ ही, इनसे उच्च गुणवत्ता वाला दूध उत्पादन संभव होता है, जिससे पशुपालकों को बेहतर कीमत मिल सकती है।

पटना में बनेगा मॉडल डेयरी फार्म

राज्य के पशुपालकों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए पटना स्थित संजय गांधी डेयरी प्रौद्योगिकी संस्थान में एक मॉडल डेयरी फार्म तैयार किया जा रहा है। इस फार्म में देसी गायों के साथ जर्सी गायों को रखा जाएगा। प्रस्तावित फार्म की दूध उत्पादन क्षमता लगभग 2 लाख लीटर होगी।

यहां गायों के भ्रूण पर वैज्ञानिक अनुसंधान भी किया जाएगा। इसके अलावा, बिहार में डेयरी उद्योग शुरू करने वाले पशुपालकों को प्रशिक्षण देने की भी योजना बनाई गई है। उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए जर्सी गायें राज्य के बाहर से मंगाई गई हैं।

भैंस पालन को भी मिलेगा बढ़ावा

ब्लूप्रिंट में भैंस पालन को भी डेयरी ईकोसिस्टम का अहम हिस्सा माना गया है। रिपोर्ट के अनुसार, भैंस पालन में निवेश करने से पशुपालकों को लंबे समय में अधिक लाभ हो सकता है। एक भैंस अपने जीवनकाल में लगभग 18–19 बच्चे देती है और इसमें किए गए एक रुपये के निवेश पर 50–60 रुपये तक का मुनाफा संभव है।

बिहार पशु विश्वविद्यालय केंद्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान, हिसार से उच्च गुणवत्ता की भैंसें मंगाने की योजना पर भी काम कर रहा है।

सरकार के सामने रखा जाएगा प्रस्ताव

कुलपति डॉ. इंद्रजीत सिंह ने बताया कि यह ब्लूप्रिंट पहले पंजाब के डेयरी विकास मॉडल के आधार पर तैयार किया गया था। अब इसे बिहार सरकार के समक्ष विचार के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। इस संबंध में वे राज्य के पशुपालन मंत्री, कृषि मंत्री और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर पूरी योजना और दस्तावेज सौंपेंगे।

इस ब्लूप्रिंट के लागू होने से राज्य के पशुपालकों को आधुनिक डेयरी प्रबंधन, बेहतर नस्लों और वैज्ञानिक प्रशिक्षण का लाभ मिलेगा, जिससे बिहार में डेयरी उद्योग को नई दिशा और आर्थिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।


 

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