पटना। शिक्षा विभाग में फर्जीवाड़े का एक बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एक ही सर्टिफिकेट के आधार पर दो अलग-अलग राज्यों में दो महिलाओं ने शिक्षिका के पद पर नौकरी हासिल कर ली। झारखंड की बोकारो निवासी असली मनोरमा गिरी जहां 2005 से सरकारी स्कूल में पढ़ा रही हैं, वहीं उसी के सर्टिफिकेट पर बिहार के बाढ़ में दूसरी महिला ने 15 साल तक फर्जीवाड़ा कर नौकरी की।
इस पूरे खेल का पर्दाफाश तब हुआ जब असली मनोरमा ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, चास कोर्ट एरिया ब्रांच में मकान निर्माण के लिए लोन का आवेदन दिया। बैंक जांच में पता चला कि उनके नाम और पैन नंबर पर पहले से ही एसबीआई बाढ़ शाखा से सात लाख रुपए का लोन लिया जा चुका है।
असली और नकली मनोरमा का सच
- असली मनोरमा – झारखंड के बोकारो जिले के सिंहडीह उत्क्रमित मध्य विद्यालय में 2005 से सहायक शिक्षिका।
- फर्जी मनोरमा – सिवान की रहने वाली महिला, जिसने इन्हीं प्रमाणपत्रों के आधार पर बाढ़ के कमला कन्या मध्य विद्यालय में 2010 से नौकरी कर ली।
फर्जी शिक्षिका ने न सिर्फ असली मनोरमा के शैक्षणिक प्रमाणपत्र और पैन कार्ड का इस्तेमाल किया, बल्कि वर्षों तक सरकारी वेतन भी उठाती रही।
ऐसे खुला राज
असली मनोरमा जब लोन लेने बैंक पहुंचीं तो कर्मचारियों ने बताया कि उनके नाम पर पहले से ही बाढ़ शाखा में सात लाख का लोन है। शक होने पर उन्होंने फौरन बोकारो चास थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। थाने से बाढ़ थाने को सूचना दी गई और जांच शुरू हुई। बाढ़ पुलिस जब विद्यालय पहुंची तो पता चला कि फर्जी शिक्षिका तीज व्रत के बाद से ही बिना सूचना विद्यालय से फरार है।
2010 से चल रहा फर्जी खेल
जांच में सामने आया कि नकली मनोरमा की नियुक्ति सबसे पहले 2010 में बाढ़ नगर परिषद के मध्य विद्यालय हरिजन बाढ़ में हुई थी। बाद में विद्यालयों के विलय के बाद उसकी तैनाती कमला कन्या मध्य विद्यालय में हो गई।
शिकायत और जांच
पीड़ित शिक्षिका ने बोकारो के प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी, बैंक मैनेजर और विद्यालय प्रधानाध्यापक को पूरे मामले की जानकारी दी है। इस आधार पर आपराधिक मामला दर्ज कराया जा रहा है।
बाढ़ प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी सुजीत कुमार सोनू ने कहा कि आरोप गंभीर हैं और जांच शुरू कर दी गई है। उच्च अधिकारियों को भी मामले से अवगत करा दिया गया है।


