पूर्णिया का झंडा चौक: 77वीं बार आधी रात को लहराया तिरंगा, 1947 से चल रही परंपरा को स्वतंत्रता सेनानी परिवार ने निभाया

पूर्णिया, 15 अगस्त 2025 —जैसे ही घड़ी ने रात 12:01 का समय दिखाया, पूर्णिया के ऐतिहासिक झंडा चौक पर तिरंगा पूरे सम्मान के साथ लहराया। यह सिर्फ झंडोत्तोलन नहीं, बल्कि आज़ादी की उस रात से चली आ रही 77 साल पुरानी परंपरा का जीवंत प्रतीक था।

1947 की ऐतिहासिक घड़ी में, जब भारत की आज़ादी की घोषणा आकाशवाणी पर हुई थी, उसी क्षण स्वतंत्रता सेनानी रामेश्वर प्रसाद सिंह, रामरतन साह और शमशुल हक ने पहली बार भट्ठा बाज़ार (अब झंडा चौक) में आधी रात को तिरंगा फहराया था। तब से यह अनोखी परंपरा हर साल निभाई जा रही है — देश में वाघा बॉर्डर की तर्ज पर आधी रात का झंडोत्तोलन करने वाले गिने-चुने स्थलों में झंडा चौक का नाम गर्व से लिया जाता है।


स्वतंत्रता सेनानी के परिवार ने संभाली परंपरा

इस वर्ष भी, इस गौरवशाली परंपरा को निभाने की जिम्मेदारी स्वतंत्रता सेनानी पट्टो बाबू के परिवार ने उठाई। उनके पोते विपुल सिंह ने ध्वजारोहण कर स्वतंत्रता संग्राम की उस विरासत को आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा—

“यह सिर्फ झंडा फहराना नहीं, बल्कि दादा और उनके साथियों के सपनों को जीवित रखने का प्रण है।”


देशभक्ति के नारों से गूंजा माहौल

झंडोत्तोलन के साथ ही भारत माता की जय, वंदे मातरम् और इंकलाब जिंदाबाद के नारे गूंज उठे। शहर के कोने-कोने से आए लोग, युवा और बुजुर्ग, इस क्षण का हिस्सा बनने पहुंचे। माहौल देशभक्ति के रंग में डूबा रहा।


नेताओं और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी

कार्यक्रम में पूर्णिया के विधायक विजय खेमका, मेयर विभा कुमारी समेत कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। उनकी मौजूदगी ने कार्यक्रम की भव्यता और जोश को और बढ़ा दिया।


पूर्णिया की पहचान बनी परंपरा

झंडा चौक का यह आयोजन सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि स्वतंत्रता की यादों और भावनाओं को पीढ़ी-दर-पीढ़ी जोड़ने वाली कड़ी है। हर साल 14 अगस्त की रात को ठीक 12:01 बजे, तिरंगा लहराकर पूर्णिया देश को यह संदेश देता है कि आज़ादी सिर्फ एक दिन का उत्सव नहीं, बल्कि हमेशा संजोकर रखने वाली धरोहर है।


 

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