भागलपुर, अगस्त 2025 –गंगा नदी का बढ़ता जलस्तर इस बार पिछले वर्षों के सभी रिकॉर्ड तोड़ता नज़र आ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में तबाही मचाने के बाद अब इसका असर शहर के दिल में भी दिखने लगा है। तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय का पूरा परिसर पानी में डूब चुका है, और हालात दिन-ब-दिन गंभीर होते जा रहे हैं।
कार्यालयों तक नाव से सफर
निचले तल पर पानी भरने के बाद प्रशासन ने सभी महत्वपूर्ण फाइलें और दस्तावेज़ ऊपरी मंज़िल पर शिफ्ट कर दिए हैं।
अब कर्मचारियों और प्रोफेसरों को अपने-अपने कक्ष तक पहुंचने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है।
कैंपस में चलते-चलते अचानक किसी सांप या बिच्छू से सामना हो जाने का डर हर किसी के दिल में है।
राष्ट्रपति का प्रस्तावित कार्यक्रम – चुनौती दोहरी
ऐसे हालात में विश्वविद्यालय परिसर में जल्द ही महामहिम राष्ट्रपति का आगमन होने वाला है।
यह कार्यक्रम बाढ़ के बीच आयोजित होना है, जिससे तैयारी और भी चुनौतीपूर्ण हो गई है।
प्रतिमा स्थल के आसपास का इलाका भी पानी में डूबा है, लेकिन काम दिन-रात जारी है।
कुलपति प्रो. जवाहरलाल ने स्पष्ट कहा –
“हम प्रकृति से मुकाबला नहीं कर सकते, लेकिन तैयारी में कोई कमी नहीं छोड़ी जाएगी। राष्ट्रपति का कार्यक्रम हर हाल में तय समय पर होगा।”
रेत, टाइल्स और आपात तैयारी
जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने एनटीपीसी से रेत मंगवाने का आदेश दिया है ताकि प्रतिमा स्थल और आसपास के टाइल्स का कार्य समय पर पूरा हो सके।
साथ ही, प्रशासन ने नाविक, बिजली मिस्त्री और चिकित्सक को 24 घंटे तैयार रहने का निर्देश जारी किया है।
पानी में फंसे कर्मचारियों को निकालने का काम लगातार चल रहा है।
‘काम रुकेगा नहीं’ – बाढ़ के बीच जज्बा
लगातार बारिश, पानी में डूबे रास्ते और सांप-बिच्छुओं के डर के बावजूद विश्वविद्यालय का माहौल जज्बे से भरा है।
15 अगस्त और राष्ट्रपति के आगमन दोनों ही महत्वपूर्ण अवसरों को सफल बनाने के लिए कर्मचारी, अधिकारी और प्रशासन पूरी ताकत झोंक रहे हैं।
कुलपति का कहना है –
“भले ही कार्यालय तक जाने के लिए नाव चलानी पड़े, लेकिन काम पहले जैसा ही चलता रहेगा।”


