
भागलपुर, अगस्त 2025 –गंगा नदी ने इस बार ऐसा रौद्र रूप दिखाया है कि सिर्फ गांव ही नहीं, अब शहर के दिल तक पानी पहुंच चुका है। तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय की प्रोफेसर कॉलोनी पूरी तरह जलमग्न हो चुकी है।
कभी किताबों और पढ़ाई की गूंज से भरे ये क्वार्टर अब पानी की कैद में हैं।
घर के अंदर बाढ़ का समंदर
कॉलोनी में रहने वाले प्रोफेसरों और उनके परिवारों की जिंदगी ठहर सी गई है।
कई घरों में पानी घुस चुका है – फर्श डूब चुके हैं, दरवाजे तक लहरें थपेड़े मार रही हैं।
एक प्रोफेसर की बूढ़ी माँ, जो बीमार हैं, बिस्तर पर लेटी पानी से घिरी हुई हैं। उन्हें बाहर ले जाना संभव नहीं, इसलिए बेटे ने ईंटों से पलंग ऊँचा कर दिया है, ताकि पानी बिस्तर तक न पहुंचे।
लेकिन बीमारी और बदबूदार पानी के बीच वह हर पल डर में जी रही हैं।
जल कैदियों का पलायन
जो लोग निकल सकते हैं, वे ठेले, नाव और यहां तक कि ट्रैक्टर के सहारे पलायन कर रहे हैं।
दृश्य ऐसा है मानो किसी फ़िल्म का सीन हो – एक तरफ बच्चे गोद में, दूसरी तरफ किताबों और ज़रूरी सामान से भरी बोरियां, और बीच में गंदे पानी में धक्का देते प्रोफेसर।
कई परिवारों ने अपने घरों के कीमती सामान को ऊँचाई पर रख दिया है और खुद दूसरी मंज़िल या रिश्तेदारों के घर शरण ले रहे हैं।
खतरनाक मेहमान – सांप और कीड़े
पानी के साथ सिर्फ संकट नहीं, मौत का साया भी आया है।
यह इलाका पहले से ही रसल वाइपर जैसे ज़हरीले सांपों के लिए बदनाम है।
पानी में छुपे ये खतरनाक मेहमान हर वक्त जान लेने को तैयार बैठे हैं।
अब हालात ऐसे हैं कि हर छाया, हर हलचल, लोगों को दहशत में डाल देती है।
कॉलेज जाने का रास्ता – ठेला और नाव
बाढ़ ने सड़कों को निगल लिया है।
कई विभागों और कॉलेजों में पहुंचने के लिए अब ठेले या नाव ही एकमात्र साधन हैं।
शिक्षक और छात्र, दोनों इस अनिश्चितता में हैं कि कब हालात सामान्य होंगे।
स्थानीय लोगों की पुकार
कॉलोनी के एक शिक्षक ने पानी में खड़े होकर कहा –
“सरकार को हमारी सुध लेनी चाहिए। घर में बूढ़ी माँ बीमार हैं, दवा और खाना लाना भी मुश्किल है। हम पढ़ाते हैं, लेकिन आज हम खुद जिंदगी का सबक सीख रहे हैं – प्रकृति के आगे कोई नहीं।”


