
भागलपुर, 08 अगस्त 2025 – बिहार के भागलपुर जिले के नाथनगर क्षेत्र में शुक्रवार को एक दर्दनाक हादसा हुआ, जिसमें लोकमान्य तिलक एक्सप्रेस ट्रेन की चपेट में आकर 9 भैंसों की मौत हो गई। ये सभी भैंसें नाथनगर के अजमेरीपुर गांव के पशुपालकों की थीं, जिनकी मवेशी बाढ़ के कारण पहले ही संकट में थे। अब इस हादसे ने उनके लिए एक और नया संकट खड़ा कर दिया है।
घटना उस समय हुई जब बाढ़ पीड़ित पशुपालक अपने मवेशियों को चारा खिलाने के लिए नाथनगर रेलवे केबिन के पास ले गए थे। स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक, बाढ़ के कारण उनके घरों में पानी घुस गया था, जिसके बाद वे महाशय डयोरी में शरण ले आए थे। शुक्रवार को वे मवेशियों को चारा खिलाने के लिए रेलवे ट्रैक के पास गए थे, तभी तेज रफ्तार से आ रही लोकमान्य तिलक एक्सप्रेस ट्रेन ने मवेशियों को अपनी चपेट में ले लिया।
हादसे के बाद मौके पर पहुंची स्थानीय पुलिस और रेलवे अधिकारियों ने शवों को ट्रैक से हटाया, लेकिन तब तक 9 भैंसों की मौत हो चुकी थी। इस हादसे ने न केवल मवेशियों की मौत से पशुपालकों को झटका दिया है, बल्कि उनके लिए आर्थिक संकट भी खड़ा कर दिया है। बाढ़ के कारण पहले ही इन परिवारों की आजीविका प्रभावित हो चुकी थी और अब इस दुर्घटना ने उनके लिए एक और समस्या उत्पन्न कर दी है।
स्थानीय ग्रामीणों और पशुपालकों में आक्रोश और शोक का माहौल है। उनका कहना है कि बाढ़ की स्थिति के बाद, उनके पास मवेशियों की देखभाल करने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। अब इस दुर्घटना ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। पशुपालकों ने प्रशासन से मुआवजा और राहत की मांग की है ताकि वे अपने मवेशियों की क्षति का कुछ हद तक मुआवजा प्राप्त कर सकें।
इस हादसे ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि क्या बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मवेशियों की देखभाल और शरण के लिए उचित इंतजाम किए गए हैं, ताकि ऐसे हादसे से बचा जा सके। स्थानीय प्रशासन ने दुर्घटना की जांच शुरू कर दी है, लेकिन फिलहाल किसी प्रकार की राहत या मुआवजा की घोषणा नहीं की गई है।
साथ ही, इस घटना ने यह भी उजागर किया है कि बाढ़ के दौरान लोगों और उनके मवेशियों की सुरक्षा के लिए बेहतर उपायों की आवश्यकता है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस हादसे के बाद पशुपालकों के लिए किस प्रकार की राहत योजना लागू करता है।


