भागलपुर, 8 अगस्त —गंगा का पानी उतरने का नाम नहीं ले रहा और गंगा किनारे बसे गांवों में तबाही का मंजर जस का तस है। शहर में सुरक्षित जगह ढूंढते-ढूंढते सैकड़ों बाढ़ पीड़ित भागलपुर एयरपोर्ट मैदान पर डेरा डाल चुके हैं। लेकिन अब उनके सामने एक नई मुसीबत खड़ी हो गई है — राष्ट्रपति का दौरा।
दरअसल, राष्ट्रपति के संभावित आगमन के दौरान उनका विमान यहीं उतरना है। ऐसे में प्रशासन को एयरपोर्ट मैदान खाली कराना अनिवार्य हो गया है। गुरुवार को सदर अनुमंडल पदाधिकारी विकास कुमार पुलिस बल और राजस्व टीम के साथ मैदान पहुंचे और पीड़ितों से वैकल्पिक स्थल पर जाने की अपील की।
प्रशासन तैयार, लेकिन पीड़ितों का सवाल — “घर से उजड़कर फिर कहां जाएं?”
एसडीओ ने बताया कि प्रशासन ने पहले ही वैकल्पिक स्थल चिह्नित कर लिया है, जहां पीने का पानी, शौचालय और टेंट जैसी व्यवस्था की जा रही है।
लेकिन मैदान में बसे बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि वे बिना पक्की गारंटी के यहां से हटने को तैयार नहीं हैं।
“जब गांव में घर डूब गया, यहां आकर जान बचाई, अब यहां से भी भगा रहे हैं। कोई पक्का ठिकाना दिखा दो, फिर चले जाएंगे।” — एक महिला बाढ़ पीड़ित
दोहरी चुनौती में जिला प्रशासन
प्रशासन के सामने फिलहाल दो मोर्चे हैं —
- राष्ट्रपति के दौरे की सुरक्षा और तैयारी
- बाढ़ पीड़ितों के पुनर्वास की संवेदनशील जिम्मेदारी
अधिकारियों का कहना है कि दोनों मुद्दों को मानवीय दृष्टिकोण और प्रोटोकॉल की अनिवार्यता के बीच संतुलन बनाते हुए सुलझाया जाएगा।
मैदान में फिलहाल हालात
- करीब 300 से ज्यादा बाढ़ प्रभावित लोग टेंट और तिरपाल डालकर रह रहे हैं
- बच्चों और बुजुर्गों में बीमारियां फैलने का खतरा
- पीने के पानी और सफाई की किल्लत बढ़ी
- प्रशासन ने नई जगह पर शिफ्टिंग की तैयारी शुरू कर दी है
जैसे-जैसे राष्ट्रपति के संभावित दौरे की तारीख नजदीक आएगी, प्रशासन की सख्ती और पीड़ितों की मजबूरी के बीच टकराव बढ़ सकता है। अब देखना यह है कि भागलपुर में संवेदनशीलता और सुरक्षा—दोनों की नाक बचाते हुए प्रशासन इस पेचीदे हालात को कैसे संभालता है।


