
बेगूसराय, 7 अगस्त — जन सुराज यात्रा के दौरान प्रशांत किशोर ने आज बेगूसराय के बखरी में सरकार और चुनाव आयोग पर ऐसा तीखा हमला बोला, जो बिहार की सियासी जमीन को गर्म कर गया। उन्होंने आरोप लगाया कि एनडीए सरकार और चुनाव आयोग आपसी साठगांठ से समाज के वंचित तबके, गरीबों और प्रवासी मजदूरों का वोटर लिस्ट से नाम काटने की साजिश रच रहे हैं। उनका कहना है कि इन तबकों के लोग जब लौटेंगे तो भाजपा को वोट नहीं देंगे, इसलिए उनके नाम ही सूची से हटा दिए जा रहे हैं।
“जिसके पास आधार है, उसका वोट कोई नहीं काट सकता”
पत्रकारों से बातचीत में किशोर ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट स्पष्ट कर चुका है कि आधार रखने वाले व्यक्ति का मताधिकार कोई नहीं छीन सकता। उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव आयोग को अपनी साख की चिंता करनी चाहिए, ना कि किसी दल के एजेंडे को लागू करने की।
उन्होंने कहा, “हम इन लोगों के लिए लड़ेंगे जिनका नाम मतदाता सूची से काटा जाएगा। लेकिन इतना तय है कि जो बचेंगे, वही भाजपा और नीतीश कुमार को उखाड़ फेंकने के लिए काफी होंगे।”
जनता को बताया हनुमान, खुद को बताया जामवंत
मुंगेर के जमालपुर में जनसभा की अनुमति में हुई देरी पर टिप्पणी करते हुए किशोर ने कहा, “जनता को अब किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं है। हम तो जामवंत हैं, जो जनता यानी हनुमान को उसकी ताकत का एहसास करा रहे हैं। जन सुराज की यात्रा ने ही सरकार को नींद से जगा दिया है। अब देखिए, वर्षों से अटकी योजनाओं में अचानक तेजी कैसे आ रही है — चाहे वह वृद्धा पेंशन हो या रसोइया का वेतन।”
TRE-4 की बहाली पर भी सरकार को घेरा, डोमिसाइल नीति को बताया दिखावा
प्रशांत किशोर ने सरकार द्वारा शिक्षक नियोजन में TRE-4 में लागू की जा रही डोमिसाइल नीति को भी चुनावी स्टंट करार दिया। उन्होंने कहा कि यह बदलाव सिर्फ TRE-4 के लिए किया गया है, वो भी चुनाव नजदीक देखकर।
उन्होंने नीतीश कुमार पर भी सीधा हमला बोला — “2023 में प्रधानमंत्री बनने की चाहत में इन्होंने डोमिसाइल नियम ही हटा दिया था, जिससे लाखों बहालियां बिहार के बाहर के लोगों को मिलीं। अब चुनाव आया तो फिर से डोमिसाइल की बात करने लगे हैं। यह जनता को धोखा देने जैसा है।”
जन सुराज की मांग — हमेशा के लिए लागू हो दो-तिहाई डोमिसाइल आरक्षण
किशोर ने साफ शब्दों में कहा कि जन सुराज की मांग है कि बिहार की बहालियों में कम से कम दो-तिहाई सीटें बिहार के स्थायी निवासियों के लिए आरक्षित होनी चाहिए। “यह हक़ है, कोई एहसान नहीं। सरकार इस हक को सिर्फ चुनाव में लुभाने के लिए इस्तेमाल कर रही है,” उन्होंने कहा।


