श्रावणी मेला और बाढ़ सुरक्षा को लेकर भागलपुर में जल संसाधन विभाग सतर्क, कटाव रोकथाम व घाटों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान

भागलपुर / पटना, 05 अगस्त 2025: राज्य में जारी मॉनसूनी वर्षा और संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए जल संसाधन विभाग, बिहार सरकार, पूरी सतर्कता और संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रहा है। विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में नदियों के तटों की सुरक्षा, संवेदनशील स्थलों की निगरानी और जनहित से जुड़ी गतिविधियों, विशेष रूप से श्रावणी मेले के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना शामिल है।

श्रावणी मेला 2025 को लेकर घाटों पर चल रहे कार्य
बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, भागलपुर के अधीन सुलतानगंज प्रखंड में गंगा नदी के किनारे स्थित प्रमुख घाट — सीढ़ी घाट, जहाज घाट और नमामी गंगे घाट — पर कार्य तेजी से जारी है। श्रावणी मेला 2025 में लाखों कांवरियों की संभावित आमद को देखते हुए, घाटों की संरचनात्मक सुरक्षा एवं जल नियंत्रण की व्यवस्थाएं सुदृढ़ की जा रही हैं। ये सभी कार्य वरीय पदाधिकारियों एवं भागलपुर जिला प्रशासन के निर्देशानुसार संचालित हो रहे हैं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो और जलस्तर नियंत्रित रहे।

सबौर में त्वरित कार्रवाई से नियंत्रित हुआ कटाव
इधर, भागलपुर जिले के सबौर प्रखंड अंतर्गत चायचक गांव में गंगा के किनारे वर्ष 2025 पूर्व कराए गए कटाव निरोधक कार्य के एक हिस्से में करीब 20 मीटर की लंबाई में स्लोप (ढलान) के क्षतिग्रस्त होने की सूचना प्राप्त हुई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जल संसाधन विभाग ने तत्काल संज्ञान लिया और अध्यक्ष, बाढ़ संघर्षात्मक बल के निर्देश तथा वरीय अधिकारियों के परामर्श के आधार पर युद्धस्तर पर मरम्मत कार्य प्रारंभ किया गया। समय पर हस्तक्षेप के कारण कटाव को प्रभावी रूप से नियंत्रित कर लिया गया है।

निगरानी और समन्वय पर विभाग का जोर
विभागीय प्रवक्ताओं के अनुसार, जल संसाधन विभाग पूरी मुस्तैदी के साथ हालात पर नजर बनाए हुए है। तटबंधों की नियमित निगरानी, संवेदनशील स्थानों का निरीक्षण और जिला प्रशासन के साथ समन्वय के माध्यम से बाढ़ की किसी भी स्थिति से निपटने की तैयारी की जा रही है। विभाग की कोशिश है कि आम जनता की सुरक्षा हर हाल में सुनिश्चित की जा सके और किसी भी आपदा की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया दी जाए।

बिहार में जल संसाधन विभाग की यह सक्रियता न केवल प्रशासनिक सजगता का उदाहरण है, बल्कि आम लोगों में भरोसा जगाने वाली पहल भी मानी जा रही है।


 

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