
नई दिल्ली | 31 जुलाई 2025: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को ‘नौकरी के बदले जमीन’ घोटाले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव को बड़ा झटका दिया है। शीर्ष अदालत ने विशेष अदालत में आरोप तय करने की कार्यवाही पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है।
जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने स्पष्ट किया कि विशेष अदालत द्वारा पारित किसी भी आदेश की वैधता पटना हाईकोर्ट में लंबित याचिका पर अंतिम निर्णय के अधीन होगी।
🔹 लालू यादव ने क्या कहा?
लालू यादव ने याचिका दाखिल कर हाईकोर्ट से अनुरोध किया था कि जब तक उनकी याचिका पर निर्णय नहीं हो जाता, तब तक विशेष अदालत आरोप तय न करे। उनका कहना था कि सीबीआई ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A के तहत संविधानिक प्राधिकार से पूर्व अनुमति लिए बिना उनके खिलाफ जांच शुरू की, जो कानून के विपरीत है।
🔹 सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि:
“आरोप तय होने से हाईकोर्ट में लंबित याचिका स्वत: निरस्त नहीं हो जाएगी।”
🔹 सीबीआई की प्रतिक्रिया
सीबीआई की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने याचिका का विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि:
- लालू यादव यह मुद्दा विशेष अदालत में उठा सकते हैं।
- उन्होंने अदालत का समय खराब किया है, इसलिए जुर्माना लगाया जाए।
हालाँकि, पीठ ने सीबीआई की इस मांग को अस्वीकार करते हुए कहा कि:
“फिलहाल किसी तरह का जुर्माना उचित नहीं।”
🔹 आगे क्या होगा?
- पटना हाईकोर्ट में लालू यादव की याचिका पर 12 अगस्त को सुनवाई होनी है।
- तब तक विशेष अदालत में आरोप तय करने की प्रक्रिया जारी रहेगी।
क्या है ‘नौकरी के बदले जमीन’ मामला?
यह मामला तब का है जब लालू यादव रेल मंत्री थे। उन पर आरोप है कि उन्होंने रेलवे में नौकरी देने के बदले लोगों से पटना और अन्य स्थानों पर कम दरों पर ज़मीन ली। सीबीआई ने इस मामले में चार्जशीट दाखिल कर दी है और अब विशेष अदालत आरोप तय करने की प्रक्रिया में है।


