पटना में शुरू हुआ आम महोत्सव, कार्बाइड फ्री आम खरीदने उमड़े लोग; किसानों से सीधे जुड़ने की अपील

बिहार की राजधानी पटना में आम प्रेमियों और किसानों के लिए एक खास आयोजन की शुरुआत हुई है। शहर के बुद्ध मार्ग स्थित बिहार राज्य सहकारी संघ परिसर में दो दिवसीय आम महोत्सव का आयोजन किया गया, जहां लोग सीधे आम उत्पादक किसानों से पेड़ पर पके और रसायनमुक्त आम खरीद सकते हैं। इस महोत्सव की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां बिक रहे सभी आम कार्बाइड फ्री हैं, यानी इन्हें कृत्रिम रसायनों से पकाया नहीं गया है। इससे उपभोक्ताओं को प्राकृतिक स्वाद और बेहतर गुणवत्ता वाले आम उपलब्ध हो रहे हैं, वहीं किसानों को भी अपने उत्पाद का उचित मूल्य मिल रहा है।

यह दो दिवसीय आयोजन द्वारा आयोजित किया गया है और 26 जून की शाम तक चलेगा। महोत्सव का उद्देश्य सिर्फ आम की बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों को सीधे बाजार से जोड़ना, बिचौलियों की भूमिका कम करना और कृषि उत्पादों की वैल्यू चेन को मजबूत बनाना भी है। आयोजन में बिहार के विभिन्न जिलों से आए आम उत्पादक किसान हिस्सा ले रहे हैं और अपनी उपज को सीधे ग्राहकों तक पहुंचा रहे हैं।

महोत्सव के उद्घाटन अवसर पर बिहार के सहकारिता मंत्री ने कहा कि किसानों को संगठित कर बाजार से जोड़ना समय की सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों को केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि उत्पादन से लेकर भंडारण, प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, मार्केटिंग और निर्यात तक पूरी प्रक्रिया में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना चाहती है। उनका कहना था कि यदि किसान संगठित होकर बाजार में उतरेंगे तो उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और कृषि क्षेत्र अधिक मजबूत बनेगा।

रामकृपाल यादव ने नाबार्ड द्वारा पहली बार आयोजित इस आम महोत्सव की सराहना करते हुए कहा कि बिहार के आम की मिठास और गुणवत्ता की पहचान पूरे देश में है। उन्होंने कहा कि आम सिर्फ फलों का राजा नहीं है, बल्कि यह बिहार की सांस्कृतिक पहचान और परंपरा से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। राज्य के कई जिलों में उगने वाली विभिन्न किस्मों के आम अपने स्वाद और सुगंध के लिए प्रसिद्ध हैं, जिन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की जरूरत है।

उन्होंने बताया कि सहकारिता विभाग द्वारा राज्य के सभी प्रखंडों में प्राथमिक सब्जी उत्पादक सहकारी समितियों यानी पीवीसीएस का गठन किया जा चुका है। आने वाले समय में इन समितियों को मल्टी परपज पैक्स यानी एम-पैक्स में परिवर्तित किया जाएगा। इससे किसान केवल सब्जी उत्पादन तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि फल, फूल, मसाले, मधुमक्खी पालन, मत्स्य पालन, डेयरी, बकरी पालन, मुर्गी पालन, बीज वितरण, उर्वरक, भंडारण और पैकेजिंग जैसे कई क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभा सकेंगे।

मंत्री ने कहा कि इस बदलाव से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिलेगी। आम बागान वाले किसान भी अब सहकारी मॉडल के माध्यम से अधिक संगठित रूप से बाजार से जुड़ पाएंगे। इससे उन्हें उत्पादन से लेकर बिक्री तक बेहतर सुविधाएं और अवसर मिलेंगे। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे आधुनिक तकनीक अपनाएं, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन करें और सामूहिक ताकत के साथ बाजार में अपनी मजबूत पहचान बनाएं।

नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक ने कहा कि यह महोत्सव शहरवासियों और किसानों के बीच सीधा संवाद स्थापित करने का एक प्रभावी माध्यम है। उन्होंने बताया कि आमतौर पर उपभोक्ता बाजार से आम खरीदते समय यह नहीं जान पाते कि फल कहां से आया है और कैसे तैयार किया गया है। लेकिन इस महोत्सव में ग्राहक सीधे किसानों से बातचीत कर सकते हैं और पेड़ पर प्राकृतिक रूप से पके आम खरीद सकते हैं।

उन्होंने कहा कि इस आयोजन का प्रमुख उद्देश्य किसानों को एक प्रत्यक्ष बाजार उपलब्ध कराना है, ताकि वे अपनी उपज बिना किसी बिचौलिए के सीधे ग्राहकों को बेच सकें। इससे किसानों को बेहतर कीमत मिलती है और ग्राहकों को उच्च गुणवत्ता वाला उत्पाद। साथ ही किसानों को ग्राहकों की पसंद, मांग और बाजार के रुझानों को समझने का अवसर भी मिलता है, जिससे उनकी मार्केटिंग क्षमता मजबूत होती है।

गौतम कुमार सिंह ने बताया कि महोत्सव में बिहार की कई प्रसिद्ध आम किस्में प्रदर्शित की गई हैं। यहां आने वाले लोग विभिन्न वैरायटी के आम देख और खरीद सकते हैं। उन्होंने कहा कि बिहार के आम का स्वाद बेहद अलग और खास होता है, जो सामान्य बाजार में उपलब्ध आमों से अलग अनुभव देता है। आयोजन की शुरुआत में ही किसानों द्वारा 4 से 5 क्विंटल आम की बिक्री हो चुकी है, जो इस आयोजन की लोकप्रियता को दर्शाता है।

आम महोत्सव केवल बिक्री मंच नहीं है, बल्कि यह किसानों के प्रशिक्षण और क्षमता विकास का मंच भी बन रहा है। आयोजकों ने बताया कि इस दौरान किसानों को आधुनिक बागवानी तकनीकों की जानकारी दी जाएगी। विशेषज्ञ किसानों के साथ संवाद कर उन्हें बताएंगे कि किस प्रकार कम लागत में उत्पादन बढ़ाया जा सकता है और फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान यानी पोस्ट-हार्वेस्ट लॉस को कम किया जा सकता है।

पोस्ट-हार्वेस्ट लॉस कृषि क्षेत्र की एक बड़ी समस्या मानी जाती है, जिसमें उत्पादन के बाद भंडारण, परिवहन या प्रसंस्करण की कमी के कारण काफी मात्रा में फसल खराब हो जाती है। ऐसे में किसानों को आधुनिक तकनीकों की जानकारी देना उनकी आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

बिहार राज्य सहकारी संघ के अध्यक्ष ने कहा कि किसानों और सहकारिता से जुड़े हर प्रयास में संघ पूरी मजबूती से सहयोग के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए संस्थागत सहयोग बेहद आवश्यक है और इस दिशा में सहकारिता मॉडल सबसे प्रभावी माध्यम साबित हो सकता है।

उद्घाटन समारोह में के अध्यक्ष रमेश चंद्र चौबे, के चेयरमैन विशाल सिंह और के महाप्रबंधक दीपक कुमार सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। सभी ने किसानों की आय बढ़ाने और कृषि उत्पादों को बेहतर बाजार दिलाने की दिशा में ऐसे आयोजनों की आवश्यकता पर जोर दिया।

पटना में आयोजित यह आम महोत्सव केवल फलों का मेला नहीं, बल्कि किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक सशक्त पहल बनकर उभरा है। यह आयोजन स्पष्ट संदेश देता है कि जब किसान सीधे बाजार से जुड़ते हैं तो उन्हें बेहतर लाभ मिलता है और उपभोक्ताओं को भी गुणवत्तापूर्ण उत्पाद प्राप्त होते हैं। आने वाले समय में ऐसे आयोजन बिहार के कृषि क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोल सकते हैं।

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