
पौराणिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटकीय दृष्टि से ऐतिहासिक मेले को मिला राज्य स्तरीय दर्जा
पटना, 29 जुलाई:बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घोषणा की है कि मुंगेर जिले का ऐतिहासिक “सीताकुंड मेला” अब बिहार राज्य मेला अधिनियम, 2008 की धारा-3(v) के तहत बिहार राज्य मेला प्राधिकार के अंतर्गत संचालित किया जाएगा। इसकी अधिसूचना का प्रारूप तैयार कर लिया गया है।
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि इस निर्णय से मेले की व्यवस्थापन, पर्यटन आकर्षण और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि “सीताकुंड मेला” की पौराणिक, धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक एवं पर्यटकीय महत्ता को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है।
मेला का ऐतिहासिक महत्व
- सीताकुंड, मुंगेर सदर अंचल में स्थित एक पौराणिक स्थल है, जो जिला मुख्यालय से लगभग 8 किलोमीटर दूर गंगा नदी तट पर अवस्थित है।
- जनश्रुति के अनुसार, माता सीता ने यहीं अग्निपरीक्षा दी थी।
- यहाँ माता सीता, भगवान राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के कुण्ड स्थित हैं।
- इन कुण्डों में माता सीता के कुण्ड से गर्म जल और शेष चारों से ठंडा जल प्रवाहित होता है।
एक माह तक चलता है मेला
- “सीताकुंड मेला” माघी पूर्णिमा से फाल्गुन पूर्णिमा तक आयोजित होता है।
- यह मेला लगभग एक माह तक चलता है और इसमें मुंगेर, भागलपुर, खगड़िया, बेगूसराय, सहरसा, पूर्णिया, लखीसराय सहित आसपास के जिलों से लाखों श्रद्धालु भाग लेते हैं।
- हर वर्ष लगभग 5000 विदेशी पर्यटक भी यहां पहुंचते हैं।
धार्मिक पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
- सम्राट चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार धार्मिक और सांस्कृतिक मेलों को संरक्षित कर स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करना चाहती है।
- सीताकुंड मेले में बड़ी संख्या में फर्नीचर और अन्य दुकानों के माध्यम से स्थानीय लोगों को रोजगार मिलता है।
- गंगा तट के निकट होने से जलमार्ग से भी श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि मेले को राज्य मेला प्राधिकार के अधीन लाने से इसकी ब्रांडिंग, व्यवस्थापन और स्थायित्व सुनिश्चित होगा, जिससे यह न केवल राज्य बल्कि देश और विदेश के पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनेगा।


