
पटना, 28 जुलाई 2025:पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की पुण्यतिथि पर शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. एस. सिद्धार्थ ने बिहार के शिक्षक समुदाय के नाम प्रेरणा संदेश जारी किया है। उन्होंने इस अवसर को सिर्फ श्रद्धांजलि का दिन नहीं, बल्कि आत्मावलोकन का अवसर बताया।
डॉ. सिद्धार्थ ने अपने पत्र में लिखा है कि शिक्षकों की भूमिका केवल विषय बोध कराने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उन्हें बच्चों के मन में उत्सुकता, जिज्ञासा और स्वप्न देखने की शक्ति का संचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि “आज का छात्र कल का वैज्ञानिक, नीति-निर्माता, मिसाइल मैन और राष्ट्रपति बन सकता है – अगर उसे एक संवेदनशील और प्रेरणादायक शिक्षक का साथ मिल जाए।”
कलाम को शिक्षक के रूप में याद किया जाना सबसे बड़ा सम्मान
पूर्व राष्ट्रपति डॉ. कलाम के उद्धरणों का उल्लेख करते हुए डॉ. सिद्धार्थ ने लिखा:
“शिक्षण एक पवित्र पेशा है, जो चरित्र के साथ व्यक्ति के भविष्य का निर्माण करता है। यदि लोग मुझे एक शिक्षक के रूप में याद करते हैं, तो यह मेरे लिए सबसे बड़ा सम्मान होगा।”
उन्होंने बताया कि कलाम हर शिक्षक से अपेक्षा करते थे कि वह सिर्फ ज्ञान का वाहक नहीं, बल्कि चरित्र और दृष्टिकोण का निर्माता भी हो। वे शिक्षा को राष्ट्र की आत्मा मानते थे, और शिक्षक को उसका शिल्पकार।
बिहार को फिर से बनाना है ज्ञान, संस्कृति और मूल्यों की भूमि
डॉ. सिद्धार्थ ने अपने संदेश में कहा कि शिक्षा में गुणवत्ता लाने के प्रयासों के माध्यम से हम एक बार फिर बिहार को ज्ञान, संस्कृति और मूल्यों की धरती के रूप में प्रतिष्ठित करने की दिशा में बढ़ रहे हैं। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे खुद को राष्ट्र निर्माता के रूप में देखें और वैसा ही जीवन जिएं।
उन्होंने नालंदा और विक्रमशिला जैसे प्राचीन विश्वविद्यालयों का उदाहरण देते हुए कहा कि बिहार की धरती सदियों से विश्व का बौद्धिक प्रकाश स्तंभ रही है और वह परंपरा आज भी जीवित रह सकती है — यदि प्रत्येक शिक्षक उसी भावना से कार्य करे।
मुख्य बिंदु:
- शिक्षक बच्चों को केवल विषय नहीं, दृष्टि और स्वप्न भी दें।
- कलाम शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का मूल माध्यम मानते थे।
- बिहार को फिर से ज्ञान, संस्कृति और मूल्यों की भूमि के रूप में स्थापित करने का संकल्प।
- शिक्षकों से आह्वान: “खुद को राष्ट्र निर्माता के रूप में देखें।”


