खादी अब सिर्फ वस्त्र नहीं, बदलाव की बुनियाद बन रही है

– खादी केंद्रों से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ती महिलाएं

– हुनर गढ़ रहा है ग्रामीण बदलाव की नई तस्वीर

पटना, 28 जुलाई 2025: बिहार की ग्रामीण महिलाएं अब आत्मनिर्भरता की मिसाल बन रही हैं। कभी जो हुनर घर की चारदीवारी तक सीमित था, वह आज खादी प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से बाजारों में अपनी पहचान और चमक बिखेर रहा है। राज्य सरकार की योजनाएं इन महिलाओं को आर्थिक सशक्तिकरण के साथ-साथ आत्मविश्वास और सामाजिक सम्मान भी दिला रही हैं।


तकनीकी प्रशिक्षण से खुल रहे रोजगार के नए रास्ते

राज्य भर में संचालित खादी और ग्रामोद्योग संस्थानों के माध्यम से महिलाओं को सिलाई, कढ़ाई, बुनाई, ग्रामोद्योग और घरेलू उत्पाद निर्माण जैसे कार्यों में आधुनिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
प्रशिक्षण कार्यक्रमों में अब अगरबत्ती, साबुन, डिटर्जेंट पाउडर निर्माण जैसी गतिविधियों को भी शामिल किया गया है।

  • सिलाई-बुनाई का प्रशिक्षण: 3 माह
  • अगरबत्ती और डिटर्जेंट निर्माण: 1 माह

इन प्रशिक्षणों में केवल तकनीकी ज्ञान ही नहीं, बल्कि फैब्रिक चयन, डिजाइनिंग, बाजार ट्रेंड और विपणन कौशल की भी जानकारी दी जाती है ताकि महिलाएं अपने उत्पादों को प्रतिस्पर्धी बाजार में सफलतापूर्वक पेश कर सकें।


950 महिलाएं लाभान्वित, कई ने शुरू किया स्वयं का व्यवसाय

वर्ष 2024-25 में पूरे राज्य में 59 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें 950 महिलाएं और 550 पुरुष लाभान्वित हुए।

  • कई महिलाएं प्रशिक्षण के बाद स्थानीय खादी संस्थानों से जुड़कर नियमित आय अर्जित कर रही हैं।
  • कुछ महिलाओं ने अपना स्वयं का उद्यम भी शुरू किया है।

प्रत्येक प्रमंडल में खुलेगा खादी मॉल: उद्योग मंत्री

उद्योग मंत्री नीतीश मिश्रा ने कहा:

“हर प्रमंडल में खादी मॉल की स्थापना की जाएगी, जो इन ग्रामीण उत्पादों के लिए बड़ा बाजार बनेगा।
साथ ही स्थानीय उत्पादों को ई-कॉमर्स से जोड़कर एक व्यापक ऑनलाइन बाज़ार भी उपलब्ध कराया जाएगा।”

उन्होंने बताया कि ‘खादी फॉर फैशन, खादी फॉर नेशन और खादी फॉर ट्रांसफॉर्मेशन’ की सोच के साथ ग्रामोद्योग और खादी मिशन को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनाया जा रहा है।


सामाजिक दर्जा और आत्मसम्मान में बढ़ोतरी

खादी प्रशिक्षण केंद्रों की यह पहल न केवल आर्थिक बदलाव ला रही है, बल्कि इससे महिलाओं का सामाजिक दर्जा भी ऊंचा हुआ है।
ग्रामीण इलाकों में रोजगार के नए अवसर भी तेजी से पैदा हो रहे हैं और स्थानीय संसाधनों पर आधारित विकास का नया मॉडल उभर रहा है।


मूल संदेश:
खादी अब केवल वस्त्र नहीं, बल्कि बदलाव, सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की आधारशिला बनती जा रही है।


 

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